राज्य/असम - असम बचाने का नया अध्याय
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राज्य/असम – असम बचाने का नया अध्याय

Written byArchiveArchive
May 8, 2017, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 08 May 2017 17:07:55

-गुवाहाटी से रंजीब कुमार शर्मा

गत दिनों असम की भाजपा सरकार ने राज्य की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए एक कदम उठाया है। उसके अनुसार दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को अनेक सरकारी सुविधाओं से वंचित करने का निर्णय लिया गया है। असम सरकार के वरिष्ठ मंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने 9 अप्रैल को इस मसौदे को जनता के सामने रखा। उन्होंने इस पर 21 जुलाई तक जनता से अपनी राय देने का अनुरोध किया है। विधानसभा के मानसून सत्र में इस विधेयक को प्रस्तुत किया जाएगा। लेकिन कांग्रेस, वामपंथी दल और बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट  (एआईयूडीएफ) ने इसका विरोध किया है। वहीं असम के अधिकांश लोग इस विधेयक के पक्ष में हैं। असम के सभी जनजाति छात्र संगठनों तथा गैर-राजनीतिक संगठनों ने इसका  स्वागत किया है।
उल्लेखनीय है कि असम के लोगों ने 1979 से लेकर 1985 तक असम को विदेशी मुक्त करने के साथ-साथ बांग्लादेश से हो रही मुस्लिम घुसपैठ को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक आंदोलन किया था। लेकिन आज  32 वर्ष बाद भी असम बांग्लादेशी घुसपैठियों से परेशान है। यह समस्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। 1979 में असम के केवल दो जिले मुस्लिम-बहुल थे, लेकिन अब नौ जिले मुस्लिम-बहुल हो गए हैं। इसका मुख्य कारण है बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ। रोजाना सैकड़ों बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर रहे हैं। असम में लाखों मुस्लिम घुसपैठिए रह रहे हैं। काजीरंगा और दूसरे सभी राष्ट्रीय उद्यानों के ज्यादातर हिस्सों पर इन घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया है। इन घुसपैठियों को लगता है कि जितनी उनकी आबादी बढ़ेगी, उतनी उनकी ताकत बढ़ेगी। इसलिए वे निरंतर आबादी भी बढ़ा रहे हैं। इस कारण असम में तेजी से जनसांख्यिक बदलाव हो रहा है, साथ ही सांस्कृतिक गिरावट हो रही है। इन सबसे असम की जमीन और असम की जनता को बचाने के लिए एक नए कानून की जरूरत अरसे से महसूस की जा रही थी। भाजपा ने चुनाव के समय इस तरह का कानून लाने का वादा भी किया था।
नई जनसंख्या नीति के लिए तैयार विधेयक के बारे में डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि असम में पिछले 13 साल में लगभग एक करोड़ जनसंख्या बढ़ी है। देश और राज्य के हित में इस जनसंख्या विस्फोट को रोकना जरूरी है। उन्होंने यह भी  कहा कि दो बच्चों की शर्त पर सरकारी नौकरी पाने वाले लोगों को अपने कार्यकाल तक इस नियम का पालन करना होगा। वहीं रोजगार सृजन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के तहत ट्रैक्टर देने, आवास उपलब्ध कराने और इस तरह की अन्य सरकारी योजनाओं में भी दो बच्चों वाली यह नीति लागू होगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में सभी बालिकाओं को विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा नि:शुल्क देने का प्रस्ताव है। साथ ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विवाह के लिए निर्धारित आयु सीमा (लड़की 18 वर्ष और लड़का 21 वर्ष) को बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। जो भी इस आयु सीमा को तोड़ेगा, उसे सरकारी नौकरी से वंचित रखा जाएगा।  उनके घर वालों के विरुद्ध आपराधिक मामला भी दर्ज कराया जाएगा। राज्य में एक जनसंख्या परिषद् तथा जनसंख्या अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी। हर भारतीय को असम सरकार की इस पहल का स्वागत करना चाहिए, लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वालों को अपने हित से आगे कुछ सूझ ही नहीं रहा। उनकी और देश की भलाई इसी में है कि वे जनता की पदचाप को पहचानें।    

 

कुछ खास बातें
ल्ल    दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोका जाएगा और विधानसभा तथा लोकसभा के चुनाव लड़ने से रोकने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार सलाह भेजेगी।
ल्ल     विवाह के लिए निर्धारित निम्नतम आयु को बढ़ाने पर विचार और बाल विवाह करने वालों को सरकारी नौकरी नहीं।
    

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