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अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर भले ही न्यायालय के फैसले की बाट जोह रहा हो, भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ के रायपुर में 15 करोड़ रुपए की लागत से भव्य राम मंदिर का निर्माण सम्पूर्ण
-अनिल द्विवेदी-
यदि आप वायु मार्ग से छत्तीसगढ़ पहुंच रहे हैं तो राजधानी रायपुर में यात्रा की शुरुआत प्रभु श्रीराम के दर्शन से होगी। इस मार्ग में लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से भव्य राम मंदिर के स्थापित होने के बाद इस पथ को श्रीराम मार्ग के नाम से जाना जाएगा। लगभग छह साल की अथक मेहनत और हिन्दू समाज के सहयोग से तैयार इस भव्य इस राम मंदिर का लोकार्पण करते हुए गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छत्तीसगढ़ का राजिम भगवान राम का ननिहाल माना जाता है और ज्योतिषीय मान्यता है कि जब भगवान राम ननिहाल में विराजमान हो जाएंगे तब अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। मंदिर के लोकार्पण की शुरुआत देवों की प्रतिमा पर विमान से पुष्पवर्षा कर की गई। मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री बलरामजी दास टण्डन तथा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और माता जानकी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा। राज्यपाल ने अपने आशीर्वचन में उम्मीद जताई कि भगवान राम के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ समृद्ध हो रहा है और समाज उनके बताए आदशार्ें पर चलकर पश्चिमी संस्कृति के कुप्रभाव से मुक्त होगा। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि कभी पलायन और गरीबीयुक्त राज्य माना जाने वाला छत्तीसगढ़ विकास के मामले में अब दूसरे राज्यों के लिए आदर्श साबित हुआ है। प्रभु श्रीराम जी के विराजने के बाद राज्य को जल्दी ही नक्सलवाद से भी मुक्ति मिल सकेगी।
छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष छगन मूंदड़ा कहते हैं, डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में श्रीराम मंदिर का बनना यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में राम राज्य है। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य रूप से संत विजय कौशल जी महाराज, स्वामी गिरि गोस्वामी, संत परमात्मानंद महाराज, शदाणी दरबार के संत युधिष्ठिर लाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार, श्रीराम मंदिर समिति के संरक्षक और राज्य के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर सहित लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए। श्रीराम मंदिर न्यास के कोषाध्यक्ष श्री नंदन जैन ने बताया कि मंदिर में पूजा-अर्चना के अलावा जनसेवा केन्द्र, गोशाला का संचालन, शोध कार्य तथा सांस्कृतिक-धार्मिक गतिविधियों का संचालन भी होगा। लगभग तीन साल से मंदिर परिसर में बूढ़ादेव जनकल्याण समिति, वनवासी छात्रावास का संचालन कर रही है जिसमें ऐसे 100 वनवासी बच्चों का पालन-पोषण हो रहा है जिनके माता-पिता नक्सलियों की ज्यादती के शिकार हुए हैं। इसके अलावा गो सेवा केन्द्र भी प्रारंभ किया गया है, जिसमें 20 गायें हैं। आने वाले दौर में यहां विशाल ऑडिटोरियम का निर्माण होगा।
वैसे राम मंदिर स्थापित करने का असली बीड़ा अखिल भारतीय धर्म जागरण मंच के सह-प्रमुख श्री राजेन्द्र ने उठाया। वरिष्ठ पत्रकार भरत योगी ने बताया कि जिस जमीन पर भगवान राम का मंदिर बना है, वह आवासीय क्षेत्र में है और इस 16 एकड़ जमीन पर भू-माफिया के साथ-साथ राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोगों की नजर थी। इसलिए जमीन को विवादित बना दिया गया था लेकिन न्यास से जुड़े लोगों ने जब असली कागजात खंगाले तो पता चला कि यह बेशकीमती जमीन प्रभु श्रीराम के नाम पर आरक्षित है यानी इसका कोई व्यावसायिक या आवासीय उपयोग नहीं हो सकता।
ऐसे में सबसे पहले जमीन के असली मालिक दुगधाधारी मठ को विश्वास में लिया गया और नया श्रीराम मंदिर बनाने का फैसला हुआ। मंदिर के संचालक न्यास के अध्यक्ष बृजलाल गोयल के मुताबिक मंदिर प्रांगण ने संत विजय कौशल जी महाराज की कथा नि:शुल्क होती रहेगी, जबकि गोविंद गिरि महाराज ने यहां पर वेद शिक्षण की शाला प्रारंभ करने की घोषणा की है।
छत्तीसगढ़ का राजिम भगवान राम का ननिहाल माना जाता है और ज्योतिषीय मान्यता है कि जब भगवान राम ननिहाल में विराजमान हो जाएंगे तब अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
—योगी आदित्यनाथ, सांसद, गोरखपुर
कभी पलायन और गरीबीयुक्त राज्य माना जाने वाला छत्तीसगढ़ विकास के मामले में अब दूसरे राज्यों के लिए आदर्श साबित हुआ है। प्रभु श्रीराम जी के विराजने के बाद जल्दी ही नक्सलवाद से भी राज्य को मुक्ति मिल सकेगी।
—डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़











