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दो साल सरकार के 'आपका' नहीं, अपनों का विकास

Written byArchiveArchive
Feb 20, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 20 Feb 2017 13:16:55

 

राज्य/ दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने दो साल के राज में प्रदेश के विकास के लिए अभी तक कोई खास काम नहीं किया है, हां अपने नाते-रिश्तेदारों के विकास के लिए सारे नियम-कायदों को ताक पर रख दिया

-अरुण कुमार सिंह-

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार ने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। 14 फरवरी, 2015 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। ज्यादातर लोगों का कहना है कि यह सरकार विकास के मोर्चे पर फुस्स साबित हुई है। शाहदरा में रहने वाले शंकर गोयल कहते हैं, ''दिल्ली में अब तक जितनी भी सरकारें रही हैं, उनमें यह सबसे निकम्मी है। इस सरकार ने अपना एक भी वायदा पूरा नहीं किया है।'' दिल्ली के कुछ लोगों से बात करने पर लगा कि गोयल की बातों में दम है। तिलक नगर में रहने वाले सरदार स्वेटा कहते हैं, ''2016 में पूरी दिल्ली में लगभग 75 लाख लोग चिकनगुनिया से पीडि़त हुए। अभी भी बहुत लोग ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। नालों की सफाई नहीं होने से यह बीमारी फैली थी।''

सच में दिल्ली में साफ-सफाई का बुरा हाल है। दिल्ली सरकार की जिद से आएदिन नगर निगम के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं और लोग गंदगी में ही रहने को मजबूर हैं।  लोग यह भी कहते हैं कि दिल्ली सरकार जनता के साथ छल कर रही है। बदरपुर निवासी नरेंद्र सिंह कहते हैं, ''इस सरकार ने कहा था, 'बिजली हाफ, पानी माफ।' लेकिन हकीकत कुछ और है। पहले 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को कुछ न कुछ छूट मिल जाती थी और 400 से अधिक यूनिट होने पर बढ़ी हुई यूनिट पर कोई छूट नहीं दी जाती थी। लेकिन अब 401 यूनिट होने पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाती है। इसे जनता को ठगना नहीं तो क्या कहेंगे?'' इसके विपरीत करोलबाग में रहने वाले अजय सचदेवा कहते हैं, ''पहले बिजली और पानी बिल भरते-भरते परेशान रहते थे। आआपा सरकार आने के बाद से बड़ी राहत है। बिजली बिल कम हो गया है।'' केजरीवाल पर आरोप लग रहे हैं कि वे दिल्ली में रहते ही नहीं हैं। नांगलोई निवासी देवेंद्र कहते हैं, '' केजरीवाल का ध्यान दिल्ली के विकास पर नहीं है, उनका ध्यान अपने विकास पर है। अपने विकास के लिए वे पूरे देश में घूम सकें इसलिए उन्होंने अपने पास कोई विभाग तक नहीं रखा है। यह जनता के साथ धोखा है।'' जैतपुर में रहने वाले शशिकांत पोद्दार भी इस सरकार पर धोखा करने का आरोप लगाते हैं। वे कहते हैं, ''जैतपुर और उसके आसपास के क्षेत्र को ओ जोन (यमुना से तीन किमी के दायरे में आने वाले क्षेत्र को ओ जोन माना गया है और इस क्षेत्र में घर बनाना मना है) में रखा गया है। आआपा के नेताओं ने कहा था कि सरकार बनते ही ओ जोन खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है। लोग बहुत मुश्किल से घर बनाते हैं और सरकारी अधिकारी उन घरों को ढहा देते हैं। वहीं शाहीनबाग और बाटला हाउस, जो मुस्लिम-बहुल हैं और ओ जोन में आते हैं, वहां बहुमंजिली इमारतें बेरोकटोक बन रही हैं।'' उत्तम नगर में रहने वाले राजू शर्मा कहते हैं, ''बहुत ही बेकार सरकार है। विकास का एक भी काम नहीं किया है। पहले जो काम हुए हैं, उनकी देखरेख भी यह सरकार नहीं कर पा   रही है।''

पालम में रहने वाले श्याम किशोर कहते हैं, ''इस इलाके में वर्षों से पानी नहीं था। इस सरकार ने पानी पहुंचाया। मोहल्ला क्लीनिक से लोगों की परेशानी कम हुई है। छोटी-छोटी बीमारियों के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।'' दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली ज्योति कहती हैं, ''पहले केजरीवाल कहते थे न तो गाड़ी लेंगे और न बंगला, लेकिन उन्होंने सब कुछ लिया। और अब नियमों को तोड़कर अपने नजदीकी रिश्तेदारों को सरकारी ठेके और पद दे रहे हैं। वे केवल अपना और अपनों का विकास कर रहे हैं।'' द्वारका निवासी प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं, ''यदि केजरीवाल दिल्ली पर ही ध्यान देते तो जरूर दिल्ली का विकास होता, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री बनने का भ्रम हो गया है। इसलिए वे दिल्ली में कभी टिकते ही नहीं। दिल्ली के खजाने से अपनी पार्टी और अपना विकास कर रहे हैं।''

हालांकि केजरीवाल सरकार के पास अभी तीन वर्ष का समय है। चाहे तो वह बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन इन दो वर्ष में इस सरकार का जो रवैया रहा है, उससे लोगों का गुस्सा होना स्वाभाविक है। 

पहले 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को कुछ न कुछ छूट मिल जाती थी और 400 से अधिक यूनिट होने पर केवल बढ़ी हुई यूनिट पर छूट नहीं मिलती थी, लेकिन अब 401 यूनिट होने पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाती है। इसे जनता को ठगना नहीं तो क्या कहेंगे?

— नरेंद्र सिंह, निवासी, बदरपुर

    पहले केजरीवाल कहते थे न तो गाड़ी लेंगे और न बंगला, लेकिन उन्होंने सब कुछ लिया। और अब नियमों को तोड़कर अपने नजदीकी रिश्तेदारों को सरकारी ठेके और पद दे रहे हैं। वे केवल अपना और अपनों का विकास कर रहे हैं।

—ज्योति, छात्रा,  दिल्ली विश्वविद्यालय

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