बेकाबू होते बंगाल के हालात
July 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

बेकाबू होते बंगाल के हालात

Written byArchiveArchive
Feb 13, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 13 Feb 2017 12:28:07

15 जनवरी, 2017  

आवरण कथा 'दर्द अनदेखा' मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन-प्रशासन के पंगु होने का उदाहरण है। धूलागढ़ में हिंदुओं पर जो जुल्म ढहाए गए, उन्हें भुलाया नहीं जा सकता। आज ये परिवार एक-एक दाने को तरस रहे हैं। जहां इनका रोजगार छिना, वहीं किसी का व्यापार। आधे से ज्यादा परिवारों में तबाही का आलम है। लेकिन इस सबके बाद भी सेकुलरों के मुंह से आह तक नहीं निकल रही है। अब मानवाधिकारों की बात करने वाले कहां गए? क्या हिंदुओं के अधिकार इन्हें दिखाई नहीं देते? क्या फिर हिंदुस्थान में हिंदुओं के साथ होते अत्याचारों पर उन्होंने अपनी जुबान सिल ली है? आखिर तुष्टीकरण की राजनीति कब तक चलेगी?
—सूर्यप्रताप सिंह, कांडरवासा (म.प्र.)

धूलागढ़ की रपट आंखों में आंसू ला देती है। सैकड़ों उन्मादियों ने हिंदू घरों पर हमला करके निरीह मां-बहनों पर अत्याचार किया और घर, दुकान, संपत्ति सब कुछ जलाकर तहस-नहस कर दिया। इससे बढ़कर कट्टरता का उदाहरण और क्या हो सकता है? पश्चिम बंगाल में ममता सरकार बनने के बाद से उन्मादियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे आए दिन इस तरह की वारदातें करते हैं और प्रशासन उन पर कोई कार्रवाई ही नहीं करता। मुख्यमंत्री इस मामले में अभी तक चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
—कृष्ण वोहरा, सिरसा (हरियाणा)

यह रपट सभी भारतीयों की आंख खोलने के लिए काफी है। जो अभी भी सेकुलर बनने के लिए व्याकुल दिखते हों, उन्हें इस रपट को पढ़ना चाहिए। केंद्र सरकार को धूलागढ़ पीडि़तों को उचित न्याय दिलाने के लिए ठोस पहल करनी होगी। अभी तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है। साथ ही बंगाल सहित देश के अन्य स्थानों पर जहां हिंदू दंगों में प्रभावित हुए हैं, सरकार उनके पुनर्वास और रोजगार की तत्काल व्यवस्था कराएं। ममता सरकार धुलागढ़ में शामिल सभी मुसलमानों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की भी पहल करे।
—आनंद कनौजिया, वाराणसी (उ.प्र.)

 पश्चिम बंगाल में आए दिन हो रहे हैं दंगों का सबसे प्रमुख कारण बंगलादेश से आए हुए घुसपैठी मुसलमान हैं। ये लोग पहले अपनी जनसंख्या बढ़ाते हैं और बाद फिर यहां के हिंदुओं को प्रताडि़त करना शुरू कर देते हैं। विरोध करने पर मालदा और धूलागढ़ जैसा अंजाम होता है। ये घुसपैठिये इतने मजबूत हो चुके हैं कि शासन इनकी मदद करता है क्योंकि इनके पास वोटबैंक की ताकत जो है। ये हर गलत काम को करते हैं फिर भी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती। आज बंगाल के हिंदुओं को जागने की जरूरत है। नहीं तो मालदा और धूलागढ़ जैसी घटनाएं आए दिन होंगी और हिंदुओं की चीख पुकार कोई नहीं सुनेगा।
—हरीशचन्द्र धानुक, लखनऊ (उ.प्र.)

 ममता बनर्जी खुद एक महिला हैं और उन्हें महिलाओं के दु:ख-दर्द से ही कोई वास्ता नहीं, इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है। धूलागढ़ में सैकड़ों महिलाओं पर मुसलमानों ने जो अत्याचार किए, उन्हें शब्दों में बताना संभव नहीं है। लेकिन इसके बाद भी मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी घटनाओं की भर्त्सना तक न करना सोचने पर विवश करता है। क्या यह उनके निष्पक्ष शासन को दिखाता है या तुष्टीकरण की तरफ इशारा करता है। वोट बैंक के लिए वे इतना गिर सकती हैं?
—मनमोहन वेनवंशी, समस्तीपुर (बिहार)

 दुर्भाग्य से कुछ चंद लोग देश को उन्माद की आग में धकेलना चाहते हैं और शायद वे अपने मंसूबे में खरे भी उतर रहे हैं। बंगाल ही नहीं, देश के अन्य प्रदेशों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनती जा रही है। दादरी कांड, कैराना प्रकरण इसी उन्माद का हिस्सा हैं। ये सिर्फ चंद उदाहरण हैं जो यह बताने के लिए काफी हैं कि अगर हिंदू एक नहीं हुए तो आने वाला समय और ज्यादा खतरनाक होगा और हम ताकते
रह जाएंगे।
—रोशनलाल, मेरठ (उ.प्र.)

   बंगाल में हिंदुओं पर जो अत्याचार हुआ, उसकी जितनी भी आलोचना और निंदा की जाए, कम है। यह सोचकर दुख होता है कि यह जिस प्रशासन के कंधे पर लोगों की सुरक्षा का दायित्व होता है वह सुरक्षा की जगह लोगों को डर से भागने के लिए तो कहे, इसे क्या समझा जाए? धूलागढ़ में पुलिस की मिलीभगत के चलते उन्मादी प्रशासन के सामने ही हिंदुओं के घर जलाते रहे और वह मूक दर्शक बनकर तमाशा देखता रहा। यहां तक कि देश विरोधी नारे भी लगाये गए लेकिन पुलिस ने उन पर कोई कार्रवाई ही नहीं की। आखिर इसे क्या समझा जाए?
—नीलम ठाकुर, अहमदनगर (महा.)

 केंद्र सरकार को बंगलादेशी घुसपैठियों पर कड़ी कार्रवाई करनी ही होगी। क्योंकि देश में के कई हिस्सों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। और ये संख्याबल बढ़ने से अपराध और दंगे कर रहे हैं। बंगाल में ममता सरकार इनको पाल पोस रही है जिससे यह विषबेल लगातार बढ़ रही है। लेकिन अन्य स्थानों पर जहां ये घुसपैठिये बसे हुए हैं, उन्हें देश से खदेड़ा जाना चाहिए और इन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई
होनी चाहिए।
—निहाल सिंह, मेल  से

ममता कैसे अपने प्रशासन का दुरुपयोग करती हैं, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 14 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में दिखा। पहले से तय कार्यक्रम को राज्य सरकार ने अनुमति देने से मना कर दिया। कार्यक्रम न होने पाए इसके लिए उसने कुतकोंर् को तर्क बनाकर पेश किया। लेकिन संघ तो शांति और सद्भाव का काम करता है, तो फिर उसके कार्यक्रम पर कौन ग्रहण लगा सकता था। न्यायालय ने इस पर त्वरित निर्णय लिया और कार्यक्रम के लिए अनुमति दी। ममता संघ से टकराने और इसे रोकने की कोशिश न करें क्योंकि इससे टकराना उनके वश
की बात नहीं है। संघ का कार्य ईश्वरी कार्य है।
—सौरभ त्यागी, मेल से

पूरे होते वादे

रपट 'कतार के पार' से जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी करके काली कमाई करने वालों को चोट दी है। आमजन को फैसले के बारे में ठीक से समझना चाहिए। फैसले के बाद कैसे कुछ चेहरे बिलबिला रहे थे। दरअसल ये सभी काली कमाई में डूबे हुए थे। माया-ममता के चेहरे पर जो छद्म आवरण पड़ा था, वह कम से कम दिखाई तो दिया और इनकी असलियत इसी बहाने समाज के सामने आ गई।
                   —अरुण मित्र, रामनगर (दिल्ली)

होते पस्त हौसले
रपट 'आतंक पर कसता शिकंजा' से स्पष्ट है कि केन्द्र में राजग सरकार बनने के बाद से आतंकवादियों के हौसले पस्त हुए हैं। हां, ये जरूर है कि हाल के दिनों में सीमा पार से आतंकवादी घटनाओं में इजाफा हुआ है लेकिन खुशी इस बात की है कि जितने आए, उतने साफ भी हो गए। दरअसल यह पाकिस्तान की छटपटाहट है, इसलिए वह भारत में आतंकवादियों को भेज रहा है। लेकिन सरकार को और सख्ती बरतनी चाहिए और इन पर लगाम लगानी चाहिए।
—जितेन्द्र कुमार, चड़ीगढ़ (हरियाणा)

 पिछली सरकारों ने अगर कश्मीर में सख्ती बरती होती तो आज जो हालात यहां के हैं, वे नहीं होते। एक तरीके से कहा जाए कि पिछली सरकारें आतंकवादियों और अलगाववादियों के आगे नतमस्तक थी। वे जो कहते, सरकार वही करती थी। लेकिन अब समय और सरकार दोनों बदल गए हैं। ऐसी सरकार आई है जो बराबर राष्ट्र हित के बारे में सोचती है। ऐसे में इनके  पेट में मरोड़ होना स्वाभाविक है।
—महेशचंद गंगवाल,अजमेर (राज.)

 एक तरफ देश के प्रधानमंत्री अपने पड़ोसी देश के साथ मित्रता की हर संभव कोशिश में लगे रहते हैं लेकिन हमारा पड़ोसी है कि अपनी ओछी हरकत से बाज नहीं आता। आए दिन सीमा पार की ओर से होते हमले और टुकडि़यों में भेजे जा रहे आतंकवादी उसकी घृणित मानसिकता को दर्शाते हैं। अभी तक भारत ही पाकिस्तान का विरोध करता था लेकिन आज विश्व के कई दर्जन देश इस लाइन में हैं और उसे आतंकी राष्ट्र घोषित करने के लिए हुंकार भर रहे हैं। अब भी समय है कि वह अपने अस्तित्व की रक्षा कर सकता है। बेहतर होगा कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी घटनाओं की बजाए विकास के लिए  करे।
—विमल नारायण खन्ना, कानपुर (उ.प्र.)

रास्ता दिखाता संघ
हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर
केंद्रित संग्रहणीय विशेषांक के लिए
पाञ्चजन्य परिवार को बधाई। संघ के 90 वर्ष के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानने- समझने को मिला एवं कई प्रश्नों के उत्तर
भी मिले जो मन में घुमड़ रहे थे। इस नौ
दशक लंबे समय में संघ की देश के प्रति महती भूमिका रही और उसका भारत की सेवा में अभूतपूर्व योदगान रहा।
—दिनेश राजमोहन, भोपाल (म.प्र.)

 

लोकतंत्र को नरक बनाया॥

दोनों शहजादे मिले, क्या होगा परिणाम
लूटपाट के रास्ते, होंगे खुले तमाम।
होंगे खुले तमाम, आज हैं गले लगाते
जो कल तक थे दूजे को पापी बतलाते।
कह 'प्रशांत' फिर राजतंत्र परचम लहराया
शहजादों ने लोकतंत्र को नरक बनाया॥
— 'प्रशांत'

पुरस्कृत पत्र
अब न सहेगा हिन्दू

कब तक हिंदुओं की पीड़़ा और दर्द का उबाल ऐसे ही देश सहता रहेगा। बंगाल का धुलागढ़ उन्मादियों की बर्बरता का एक ऐसा उदाहरण है जिसे भारतवासी अनदेखा नहीं कर सकते। बंगाल में पहले वामपंथी शासन में हिंदुओं पर जुल्म ढहाये जाते रहे, अब ममता की तृणमूल सरकार में भी हिंदू ही निशाना बन रहे हैं। जो लोग दूर बैठे हैं उन्हें हिंदुओं की पीड़ा से कोई मतलब ही नहीं है। उन्हें तो ऐसी खबरें अतिरंजित और उन्माद फैलाने वाली लगती हैं। लेकिन जब वे हकीकत देखेंगे तो उन्हें घटना की गंभीरता का अंदाजा होगा। हिंदुओं पर हुई हिंसा सिर्फ हिंसा नहीं बल्कि कलंक है। इसे इंसानियत का पतन ही तो कहेंगे कि इन बेचारे हिंदुओं के घर जलने के बाद भी इनके आंसू तक पोंछने कोई नहीं गया। लेकिन जहां एक मुसलमान मरता है तो पूरी सेकुलर जमात और झोलेधारी मानवाधिकार कार्यकर्ता हांफते हुए पहुंच जाते हैं। लेकिन धुलागढ़ जाने के लिए उन्हें समय नहीं मिला और न ही उन्हें घटना की शायद जानकारी हुई। यहां कई दिनों तक उन्मादियों द्वारा उत्पात मचाया जाता रहा लेकिन राज्य की ममता सरकार को भी कुछ नहीं दिखा। क्या सरकार को इनकी चीखें सुनाई नहीं दीं? उलटे उनका प्रशासन हिंदुओं को सुरक्षा देने के बजाए अपने घर छोड़कर भागने के लिए कहता दिखाई दिया। केंद्र सरकार को इस हिंसा की कड़ाई से जांच करानी चाहिए और जो भी इसमें शामिल हों, उनको किसी भी हालत में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
— हरिहर सिंह चौहान, जंबरीबाग, नसिया, इंदौर (म.प्र.)

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

पुरी के ग्रैंड रोड पर रथों का दक्षिण मोड़ अनुष्ठान।

24 जुलाई को लौटेंगे भगवान जगन्नाथ, उससे पहले पूरी हुई यह खास रस्म, जानिए क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

SIR in Uttarakhand

उत्तराखंड में SIR का दूसरा चरण शुरू, मस्जिदों में पोस्टर लगाकर हटाए गए वोटर वापस जोड़ने की कवायद

राजनाथ सिंह

9 नौसैनिक महिला अधिकारियों ने पूरी ‘समुद्र प्रदक्षिणा’, राजनाथ सिंह बोले-बेटियों का हैसला समंदर से ऊंचा

Punjab Water lavel goes down

सरकार के दावों के उलट पंजाब का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा, संगरूर सबसे बुरी हालत में

Assam Flood

असम में बाढ़ का कहर: 50 मौतें, 5 लाख 64 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

जनता से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी देते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

पेपर लीक की घटनाओं पर PM नरेंद्र मोदी का बड़ा ऐलान, जांच के लिए बनाएंगे ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’

Load More

ताज़ा समाचार

पुरी के ग्रैंड रोड पर रथों का दक्षिण मोड़ अनुष्ठान।

24 जुलाई को लौटेंगे भगवान जगन्नाथ, उससे पहले पूरी हुई यह खास रस्म, जानिए क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

SIR in Uttarakhand

उत्तराखंड में SIR का दूसरा चरण शुरू, मस्जिदों में पोस्टर लगाकर हटाए गए वोटर वापस जोड़ने की कवायद

राजनाथ सिंह

9 नौसैनिक महिला अधिकारियों ने पूरी ‘समुद्र प्रदक्षिणा’, राजनाथ सिंह बोले-बेटियों का हैसला समंदर से ऊंचा

Punjab Water lavel goes down

सरकार के दावों के उलट पंजाब का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा, संगरूर सबसे बुरी हालत में

Assam Flood

असम में बाढ़ का कहर: 50 मौतें, 5 लाख 64 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

जनता से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी देते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

पेपर लीक की घटनाओं पर PM नरेंद्र मोदी का बड़ा ऐलान, जांच के लिए बनाएंगे ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’

पंजाब पुलिस द्वारा दलित सफाई सेवकों पर अमानुषिक लाठीचार्ज का राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने लिया स्वत संज्ञान

पंजाब फार्मेसी पेपर लीक कांड: 3.5 से 13 लाख में बिक रहे थे पेपर, 35 गिरफ्तार

दिल्ली मेट्रो

CJP के ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो ने बंद किए 16 स्टेशन, इन स्टेशनों से होगा इंटरचेंज

Piyush Goyal India Canada FTA

‘झारखंड… जम्मू कश्मीर’, गैर बीजेपी वाले राज्यों में पेपर लीक: राहुल गांधी के सेलेक्टिव रुख पर केंद्रीय मंत्री के सवाल

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies