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हरियाणा के गुरुग्राम में 2 से 5 फरवरी तक पहली बार हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले का आयोजन हुआ। इसमें देश की विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं का संगम दिखाई दिया। मेले में दर्शकों को आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारत की महान संस्कृति से रू-ब-रू होने का अवसर मिला। मेले को वात्सल्य ग्राम, वृंदावन की संस्थापक साध्वी ऋतम्भरा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी एवं, अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख श्री गुणवंत कोठारी सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया।
समारोह के अंतिम दिन लगभग एक लाख लोग मेले में पहुंचे। अंतिम दिन सद्भावना सम्मेलन आयोजित हुआ। इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि ऐसे सम्मेलन समय-समय पर होने से समाज में जागरूकता बढ़ती है। मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र कार्यवाह श्री सीताराम व्यास ने कहा कि अगर छुआछूत पाप नहीं है तो दुनिया में दूसरा कोई और पाप नहीं हो सकता।
दिल्ली से पधारे महामण्डलेश्वर स्वामी श्री नवलकिशोर ने रामायण काल के उदाहरण देते हुए कहा कि छुआछूत अपनी सनातन संस्कृति की भावना के विपरीत है। हम सब एक हैं, अनेकता में एकता भारत का मूल स्वरूप है। स्वामी शरणानंद ने मेले के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के सम्मेलन शहरों के साथ ही गांव-गांव में किए जाने चाहिए। दहिया खाप से विशेष तौर पर सम्मेलन में आमंत्रित सुरेंद्र दहिया ने कहा कि कुछ भ्रमित लोग समाज में विघटन का कारण बन रहे हैं। हमें ऐसी शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। -गुरुग्राम (विसंकें)
झलकियां
* गुरुग्राम जैसे अत्याधुनिक और विश्वविख्यात शहर में इस तरह का पहला कार्यक्रम हुआ।
* मेले में भारतीय संस्कृति और सभ्यता की झलक दिखी।
* इस चार दिवसीय मेले में लगभग चार लाख लोगों ने भाग लिया।
* देशभर के लगभग 300 उन संगठनों ने हिस्सा लिया, जो अपने स्तर पर सेवा कार्य करते हैं।
* मेले का उद्घाटन प्रकृति-पूजन से हुआ।
* समारोह में आचार्य और मातृ-पितृ पूजन भी किया गया।
पारिवारिक मूल्यों में गिरावट और प्रकृति के अनादर का परिणाम है सामाजिक मूल्यों का पतन।
—सुरेश सोनी
सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
इस तरह के आयोजनों की आज बहुत ही आवश्यकता है,क्योंकि आज दुनिया को सबसे अधिक जरूरत है भारतीय मूल्यों की।
—गुणवंत सिंह कोठारी
अ.भा.सह सेवा प्रमुख, रा.स्व.संघ
यह बहुत ही निराशाजनक बात है कि आज के बच्चों को फिल्मी सितारों के नाम तो पता हैं,
पर देश के लिए त्याग करने वालों के
नाम पता नहीं।
—साध्वी ऋतम्भरा
संस्थापक, वात्सल्य ग्राम, वृंदावन
ऐसे सम्मेलन समय-समय पर होने से समाज में जागरूकता बढ़ती है।
—स्वामी ज्ञानानंद गीता मर्मज्ञ
इस राज्य के सभी 2.5 करोड़ लोग मेरे अपने परिवार के सदस्य हैं। मैं चाहता हूं कि सभी इस देश की बेहतरी के लिए कार्य करें।
—मनोहर लाल मुख्यमंत्री, हरियाणा










