समय चूक फिर का पछिताने
June 19, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

समय चूक फिर का पछिताने

Written byArchiveArchive
Nov 28, 2016, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 28 Nov 2016 14:58:44

 

पश्चिम की लोकोक्ति है- 'मौके बहुत हौले से दस्तक देते हैं इसलिए इन्हें सुनना सीखिए।' यानी अवसर को नहीं पहचानना व्यक्ति के लिए पिछ़ड़ने और पछताने का कारण बनता है।

कहावतों का कोई एक भूगोल नहीं होता इसलिए बात पश्चिम में सही है तो पूरब में भी सही है। भारतीय राजनीति और राष्ट्रीय आवश्यकता के क्षितिज द्वार पर कुछ मौके लंबे समय से थे। कमाल की बात यह कि इनकी पदचाप भी हल्की नहीं थी बल्कि पूरे माहौल में गड़गड़ा रही थी। लेकिन जिसने 'ना सुनने' की ठान ली हो, उसे कौन सुनाए! अनसुनी करने वालों ने पिछड़ना ही था। दो बरस पहले संप्रग सरकार ने जिन मुद्दों को खो दिया वही मुद्दे वर्तमान राजग सरकार के पक्ष में हर्ष-कोलाहल की लहरें उठा रहे हैं।

जाकिर नाईक की घेराबंदी और कालेधन की रोकधाम के लिए बड़े नोटों को बंद करने का फैसला कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं। देश की जड़ें खोखली करने वालों से निबटने के तौर-तरीकों में तब और अब क्या अंतर है? जो अंतर है, वह साफ दिख भी रहा है।

नोटबंदी की दिशा में बढ़ने की बात तब भी सोची गई थी। कारण यही थे। आयकर विभाग (इसे आप पूरी कर व्यवस्था भी पढ़ सकते हैं) को बौना साबित करते कालेधन का पहाड़ और रिजर्व बैंक को फर्जी देनदारियों के बोझ से पस्त करते पाकिस्तान में छपे नकली नोटों का और क्या तोड़ हो सकता था? करना तब भी यही था मगर सूत्र बताते हैं कि पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते इस दिशा में कदम बढ़ाने की बात पहले ही 'लीक' हो गई। ऐसा नहीं है कि यही फैसला संप्रग सरकार करती तो लोग ज्यादा परेशान या नाराज होते। समाज का अधिकांश वर्ग अगर आज सुकून अनुभव कर रहा है और इस कारण एटीएम कतारों में भी संयम का परिचय दे रहा है तो भारत के लोगों की पहले भी यही प्रतिक्रिया होनी थी। लेकिन तब जनता में जहां साहसिक निर्णय देखने की इच्छा थी,

वहां भ्रष्टाचार की सड़ांध और राजनीतिक इच्छाशक्तिकी छीजन दिखी।

इसी तरह दूसरा मामला जाकिर नाईक का है जिसके लिए नाहक ही 'उपदेशक ' जैसे सकारात्मक शब्द को गलत जगह प्रयुक्त किया जा रहा है। घोर नकारात्मकता, अन्य धर्म-पंथों के लिए विषैला भाव…जाकिर की क्या यही पहचान तब नहीं थी? क्या 'पीस टीवी' वास्तव में शांति की बात करता था? 'हार्मनी मीडिया' ने इस्लाम से इतर आस्था रखने वालों के लिए तब कौन-सी सद्भावना और सहिष्णुता का भाव जताया था? आज राष्ट्रीय जांच एजेंसी जाकिर के विभिन्न ठिकानों, उसके एनजीओ और करीबियों पर छापेमारी कर रही है तो उसकी वजहें पुरानी हैं। यही तो चल रहा था। सब देख रहे थे। इस्लामी उन्मादियों को प्रेरणा (जैसा कि बांग्लादेश में 'काफिरों' को कत्ल करते आतंकियों को देखने और उनके बयानों से पता चला) मिल रही थी। बाकी लोग घुट रहे थे, कुढ़ रहे थे, गुस्से से उबल रहे थे। जाकिर की जहरीली बातों का समय पर इलाज होता तो जनता के गुस्से पर संतोष के छींटे ऐसी ही राहत देते लेकिन तब संप्रग सरकार तुष्टीकरण का कंबल ताने सोती रही। बटला हाउस पर 'आंसू बहाने' और जाकिर के मंच पर चढ़कर उसकी तारीफ करने वालों के पास जनता का हाल जानने की फुरसत कहां थी?

समय निकल गया। जो मौके संप्रग के पास थे वे राजग के पास आए। ये सिर्फ कोरे अवसर नहीं थे, पारदर्शिता और प्रबल इच्छाशक्ति की ऐसी अग्निपरीक्षा इनके साथ थी जो किसी भी राजनैतिक नेतृत्व को बेचैन करने के लिए काफी थी।

बेचैनी को झटकते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जनता की उम्मीदों को पहचाना और राष्ट्र के लिए चुनौती बनती समस्याओं को ऐसे अवसरों में बदल दिया। उनके विरोधी चित हैं, हांफ रहे हैं, चिल्ला रहे हैं। पर जनता राहत की सांस ले रही है।

एक कहावत भारत में भी है—मौका चूके इनसान और डाल से चूके बंदर, दोनों का हाल बुरा होता है। हाल किसका बुरा है, कितना बुरा और हो सकता है, देखते जाइए।

 

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

हरदीप सिंह मुंडिया

पंजाब के मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया पर बड़ा आरोप, उच्च न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

हरिद्वार में संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं मानवता के कल्याण के लिए संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

यूपी एटीएस ने शहजाद भट्टी गैंग के दो गुर्गों को दबोचा

आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े मोहम्मद उमर और फैजान गिरफ्तार

जामिया विश्वविद्यालय का पीड़ित कर्मचारी पहुंचा NCST, मारपीट, पनिशमेंट पोस्टिंग और काफिर बुलाने का लगाया आरोप

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच

Load More

ताज़ा समाचार

हरदीप सिंह मुंडिया

पंजाब के मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया पर बड़ा आरोप, उच्च न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

हरिद्वार में संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं मानवता के कल्याण के लिए संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

यूपी एटीएस ने शहजाद भट्टी गैंग के दो गुर्गों को दबोचा

आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े मोहम्मद उमर और फैजान गिरफ्तार

जामिया विश्वविद्यालय का पीड़ित कर्मचारी पहुंचा NCST, मारपीट, पनिशमेंट पोस्टिंग और काफिर बुलाने का लगाया आरोप

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच

बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी (फाइल फोटो)

बांग्लादेश में फिर से हिंसा की तैयारी? जुलाई चार्टर को लेकर जमात ने दी सरकार को धमकी

ग्वालियर की समाधि से राष्ट्र की स्मृति तक रानी लक्ष्मीबाई का अमर शौर्य

19 जून का पंचांग

19 जून का पंचांग: शुक्रवार को बन रहे हैं खास ग्रह योग, जानिए दिनभर का शुभ-अशुभ समय

Love Jihad: लव जिहाद का प्रयास विफल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने लड़की को परिवार को सौंपा- जानिये पूरा मामला

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies