| दिंनाक: 16 Feb 2015 14:38:42 |
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आवरण कथा 'चुनौती को तैयार' से प्रतीत होता है कि देश के सामने आज बहुत सी चुनौतियां और खतरे हैं। पहला तो पड़ोसी देश पाक-चीन जो आए दिन भारत का अनिष्ट करने के लिए तैयार दिखाई देते हंै तो वहीं देश के अंदर सिर उठाए बैठा नक्सलवाद आज आन्तरिक रूप से सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। देश के लगभग दो सौ से ज्यादा जिलों में फैलता नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसलिए देश को आन्तरिक और बाह्य दोनों रूप से खतरे को भांपते हुए इस कठिन परिस्थिति के लिए रणनीति बनानी होगी तभी इन खतरों से निपटा जा सकेगा।
—सूर्यप्रताप सिंह, कांडरवासा (म.प्र.)
जहर घोलते अलगाववादी
जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने कुल मिलाकर अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन जिस प्रकार के प्रदर्शन की उम्मीद घाटी में की जा रही थी वह प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। घाटी में अलगाववादी ताकतों ने भाजपा के खिलाफ स्थानीय मुसलमानों में जमकर जहर घोला और उसका परिणाम नतीजों के रूप में सामने है। साथ ही एक बात और स्पष्ट हो गई कि इन मुसलमानों के साथ कुछ भी किया जाए ये देश और समाज का हित करने वालों का साथ नहीं देंगे। हाल ही में घाटी में आई दैवीय आपदा में नरेन्द्र मोदी सरकार ने रातदिन एक करके स्थानीय लोगों के जीवन को बचाया लेकिन इन लोगों ने उसे भूलकर उन लोगों की मदद की जो लोग उस समय नदारद थे।
—जमालपुरकर गंगाधर
जियागुडा-हैदराबाद (तेलंगाना)
बढ़ती करतूत
जब दिल्ली जैसे केन्द्र में ईसाई मिशनरियां बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका कन्वर्जन कराने का काम कर सकती हैं तो देश के अन्य राज्यों में क्या स्थिति होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है। देश के कुछ वनवासी क्षेत्रों में न तो उतनी प्रशासन की पहुंच है और न ही मीडिया की, ऐसे में ईसाई मिशनरियां बेधड़क होकर अपने कार्यों को अंजाम देती हैं। आज देश के कई राज्यों में शिक्षा,चिकित्सा के नाम पर मिशनरियां अपने लोगों को इसमें लगा रही हैं,जिसके बाद वे धीरे-धीरे हिन्दुओं को बहलाती हैं और कन्वर्जन को प्रेरित करती हैं। राजस्थान, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड राज्यों में ईसाई मिशनरियों की करतूतों को देखा जा सकता है। आज वनवासी क्षेत्रोें में लाखों हिन्दू इनका शिकार हो चुके हैं। सरकार को ऐसे राज्यों में तत्काल कड़े कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि आने वाले समय में यह एक बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है।
—बी.एल.सचदेवा
263,आईएनए बाजार (नई दिल्ली)
ङ्म सैकड़ों वर्षों से हिन्दुओं का ही कन्वर्जन किया जाता रहा है। यह सब भय,लालच व कथित सेवा,शिक्षा की आड़ में होता रहा है। इस्लाम और ईसाइयत दोनों मिलकर हिन्दुओं का कन्वर्जन वनवासी क्षेत्रों में जबरदस्त तरीके से कर रहे हैं। सेकुलर नेता सब जानकर भी इन विषयों पर ऐसे चुप रहते हैं जैसे उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं ।
—गोकुल चंद गोयल
सवाई माधोपुर (राज.)
रियायत न दें!
जो करोड़ों-करोड़ रुपया विमानन उद्योग को रियायत में दिया जाता है,उसे नहीं दिया जाना चाहिए। यही पैसा गरीब तबके के लाभ और उनके विकास के लिए लगाया जाना चाहिए। आगामी बजट में अच्छा हो सरकार विमानन उद्योग के घाटे की पूर्ति के लिए किसी भी प्रकार की रियायतें देने के बजाय उन्हें खर्चों में कमी करके घाटा पूरा करने को कहे और कर्ज देना या नहीं इसका फैसला बैंकों के विवेक पर छोड़ दे।
—बी.जे.अग्रवाल
अग्रसेन रोड, नागपुर (महाराष्ट्र)
प्रतिष्ठा में होती गिरावट!
आज देश के नागरिकों में जिस तरह से नैतिक गिरावट निरन्तर बढ़ती जा रही है उससे लगने लगा है कि हम अपनी प्राचीन संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं,जिसके फलस्वरूप यह सब हो रहा है। देश के प्राय: सभी सामाजिक,साहित्यिक,राजनीतिक व शैक्षिक मंचों पर अक्सर इस विषय पर चर्चा होती रही है और उसके निराकरण के भी उपाय बताये जा रहे हैं। अगर हम देश को पुन: सर्वोच्च स्थान पर देखना चाहते हैं तो हमें अपनी संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था को पुनर्जीवित करने का प्रयास करना होगा।
—ओम हरित फागी
जिला-जयपुर (राज.)
इस्लाम के नाम पर खूनखराबा
आज विश्व के कई देशों में इस्लाम खून-खराबे पर अमादा है। जिहाद के नाम पर लोगों को मारा-काटा जा रहा है। सवाल है कि यदि इस्लाम को शान्ति का मजहब बताते हैं तो इस्लाम का झंडा लेकर ये लोग जो खून-खराबा कर रहे हैं वे कौन हैं? क्या असल में यही इस्लाम का संदेश है? कुल मिलाकर इस्लाम के बढ़ते प्रभुत्व को अगर न रोका गया तो अभी तक तो ये कुछ ही देशों में खून-खराबे पर अमादा हैं, आने वाले दिनों में इसका और भी खौफनाक चेहरा सामने आने वाला है। इससे पहले कि इसका खौफनाक चेहरा दुनिया के सामने आए सभी देशों को आतंक के विरुद्ध एकजुट होकर इसे रोकना होगा।
—प्रमोद प्रभाकर वालसंगकर
दिलसुखनगर (हैदराबाद)
गोधन पर मडराता संकट
आज दिनोदिन गोवंश घटता जा रहा है। लाखों गायों की हत्या सुबह होते ही कर दी जाती है। कभी किसानों के लिए सबसे उपयोगी रहने वाले गोवंश को आज जान के लाले पड़े हैं। पहले तो टै्रक्टर के आने से गोवंश का महत्व घटा तो कभी ज्यादा दूध के नाम पर इनको भुलाया गया। जो गायें विदेश से आईं न तो उनका दूध काम का और न ही वे कृषि के किसी भी कार्य में आने वालीं। उसके बाद कृषि में जो इनका योगदान गोबर की खाद के रूप में होता था,उसकी जगह रासायनिक खादों ने ले ली और देश के किसानों की खेती को लगभग चौपट ही कर दिया। इतना होने के बाद भी अभी हम नहीं जाग रहे हैं और न गोवंश की चिंता कर रह हैं। जल्द ही इस ओर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो किसान और कृषि का भविष्य उज्ज्वल नहीं है।
—दामोदर वैष्णव
प्रतापनगर,उदयपुर (राज.)
पुनीत कार्य
भूख, गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा मिलकर एक सज्जन व्यक्ति का जितना नुकसान करते हैं,उतना कोई और नहीं करता। इनके कुचक्रों में फंसा आदमी कितने षड्यंत्रों का हिस्सा बनता चला जाता है,इसे सोचा भी नहीं जा सकता है। ऐसे कठिन समय में देश में हिन्दू हित को सर्वोच्च स्थान पर रखने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही ऐसा एकमात्र संगठन है, जो समाज की पीड़ाओं को समझ रहा है और उनको दूर करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। वनवासी क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षा दिलाना, ईसाई मिशनरियों के चंगुल से हिन्दुओं को कन्वर्जन से बचाना जैसे पुनीत कार्य में हर दम लगा हुआ है।
—दिनेश सिंह 'बृजवासी'
ग्राम-टीकैत, जिला-हाथरस (उ.प्र.)
ङ्म जिस प्रकार भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ रही है उससे न केवल चीन,जापान बल्कि अमरीका भी सोचने पर मजबूर है कि मोदी में ऐसा क्या है कि सभी उनकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं। असल में भारत में स्वयं में इतनी शक्ति है कि वह विश्व के समक्ष अपनी महत्ता को सिद्ध कर अन्य देशों की भांति अपना सम्मान स्थापित कर सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब देश का नेतृत्व अपने देश और अपने समाज के सम्मान को सर्वोच्च रखकर किसी के आगे घुटने न टेके। नरेन्द्र मोदी की यही विशेषता है कि वह अपने देश और यहां के लोगों के हित को ही अपना हित मानते हैं इसलिए सभी देश उनका सम्मान कर रहे हैं।
—प्रो.बी. आर. ठाकुर
संगम नगर, इंदौर(म.प्र.)
सोच बदलो,देश बदलेगा
जो लोग आज तक दूसरों पर इल्जाम लगाते रहे हैं वे आज दस महीने में ही सब कुछ बदलने की बात करते हुए दिखाई देते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी के पास कोई जादू की छड़ी है जिसे घुमाकर सब कुछ ठीक कर देंगे। असल में यह उनकी भूल है। किसी भी चीज को बदलने के लिए समय की आवश्यकता होती है। लेकिन जो लोग इतने कम समय में शोरशराबा कर रहे हैं वे यह बताएंगे कि क्या इस देश पर जिस सरकार ने साठ वर्षों तक राज किया आखिर उसने इस देश और जनता के लिए क्या किया? दस वषोंर् तक रही संप्रग सरकार का इस देश के लिए क्या योगदान रहा है?
—राजेन्द्र गुप्ता
डी-203, अशोक विहार (दिल्ली)
लगाम की जरूरत
आए दिन ओवैसी बंधुओं की ओर से आते देश विरोधी बयानों को हिन्दू समाज को गंभीरता से लेना होगा। उत्तर प्रदेश चुनाव से संबंधित ओवैसी बंधुओं के बयान को अगर देखें तो वे प्रदेश में हिन्दू-मुसलमान के बीच आग लगाकर साम्प्रदायिकता पर वोट की रोटियां सेकने की फिराक में हैं। उनके आग लगाने वाले बयान कहीं आने वाले दिनों में प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा न बन जाएं इसके लिए प्रशासन को गंभीरता से लेना होगा।
—गोपाल कृष्ण पाण्ड्या
नागदा, उज्जैन (म.प्र.)
जानें धर्म के बारे में!
बहुत पीड़ा होती है जब हम पढ़ते हैं कि अमुक देश में मंदिर तोड़े गए, हिन्दुओं का उत्पीड़न हुआ,जबरन उनका कन्वर्जन किया गया। लेकिन कभी इसकी तह में नहीं जाते कि आखिर हिन्दुओं के साथ ही ऐसा क्यों होता है? लेकिन पहले सवाल है कि हिन्दू कौन है? क्या वह जो राम-कृष्ण को पूजते हैं या जो विष्णु की उपासना करते हैं अथवा मंदिर में जाने वाले मूर्ति पूजक हिन्दू हैं? या फिर तिलक लगाने वाले,मंदिर जाने वाले…। अगर इन सबका उत्तर 'हां' में है तो यह हिन्दुत्व नहीं है। हिन्दू दर्शन अत्यंत व्यापक है। हिन्दू ओंकार में विश्वास करता है। हिंसा का परित्याग करता है। गो को माता मानता है और भारतभूमि को अपनी जननी मानकर उसे पूजता है यह है हिन्दुत्व के विषय में कुछ थोड़ा सा दर्शन। हिन्दुत्व 'वसुधैव कुदुम्बकम्' से सुशोभित एक स्वस्थ जीवन शैली है जिसमें मनुष्य अपनी मनुष्यता का उच्चतम स्तर तक विकास कर सकता है। क्या कभी आपके मन में यह प्रश्न कौंधा कि हिन्दुओं में तिलक धारण करने का विधान क्यों है? मंदिरों में दीप क्यों जलाते हैं? घंटा क्यों बजाया जाता है? हमें इन आसान प्रश्नों के उत्तर खोजने होंगे क्योंकि प्रश्न भले ही आसान लगें पर इनके उत्तर अनेकानेक रहस्यों को उद्घाटित करने वाले हैं। यही कुछ चीजें हैं जिनसे हिन्दू सबल होता है। इसलिए अगर हिन्दू को सबल होना है और अपनी रक्षा करनी है तो स्वयं में परिवर्तन लाना शुरू कर दीजिए और जानकारी प्राप्त कीजिए कि हम हिन्दू क्यों कहलाते हैं। क्यों हमारी संस्कृति इतने विक्षोप और आघातों के बावजूद जीवित है? हमारी संस्कृति हमारी परम्परा एक धरोहर हैं और इसे संभालना हमारा कर्त्तव्य है। लेकिन यह तभी होगा जब हिन्दुत्व की नींव मजबूत होगी और इसका दर्शन सभी हिन्दुओं के अन्त:करण में उतरेगा।
-डॉ.शुभा ग्रोवर 'वृन्दावन'
म.न.-59,फेज-1
पंत विहार,सहारनपुर(उ.प्र.)