सागर किनारे विचार मंथन
August 19, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

सागर किनारे विचार मंथन

Written byArchiveArchive
Dec 27, 2014, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 27 Dec 2014 15:01:12

 

 

पाञ्चजन्य ब्यूरो

इंडिया फाउंडेशन की पहल पर पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को केंद्र में रखकर गोवा के पार्क हयात होटल में तीन दिवसीय इंडिया आइडियाज कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। 19 से 21 दिसंबर तक हुए इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में शिक्षा, संस्कृति, व्यापार, राजनीति , न्याय, समानता, धर्म व मीडिया सहित 17 विभिन्न विषयों पर सम्पन्न सत्रों में विशेषज्ञ मंडल की अगुवाई में विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में विविध क्षेत्रों के 250 विशेषज्ञों सहित लगभग 400 प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यक्रम के समापन सत्र में केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा मौजूद थीं। नेतृत्व पर आयोजित सत्र में अमरीका के हवाई से प्रतिनिधि तुलसी गबार्ड ने कहा कि गीता को आधार मानकर, कर्म सिद्धांत और भक्ति योग के आधार पर नेतृत्व हो तो यह बेहतर हो सकता है। नेतृत्व की क्षमता रखने वाले अब दुर्लभ हो गए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि त्याग, आत्मशक्ति और अन्यों के लिए उदाहरण सामने रखने की क्षमता रखने वाला नेतृत्व ही अंत्योदय के सपने को पूरा कर सकता है।
भारतीय आर्थिक सुधार विषय पर हुए सत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि ध्यान रोजगार सृजन पर होना जरूरी है। भारत में यह तभी हो सकता है जब कुछ ऐसे परंपरागत निर्माण क्षेत्रों में फिर से जान फूंकी जाए जहां रोजगार सृजन की भारी क्षमता है। ज्यादा पूंजी, ज्यादा रोजगार और नवोन्मेष के जरिए अंत्योदय के लक्ष्यों को पाया जा सकता है। भारतीय कृषि उत्पाद दुनिया में सबसे सस्ते हैं। हमें विश्व बाजार तक प्रभावी पहुंच बनानी चाहिए। सबसे युवा देश, को नवोन्मेष की धुरी बनाना चाहिए, जोखिम लेकर उद्यमिता की मिसाल खड़ी कर सकने वाला सबसे बड़ा वर्ग हमारे यहां है। अर्थशास्त्री और ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड के सदस्य लॉर्ड मेघनाद देसाई ने कहा कि मैं कचरे और शौचालयों की बात करना चाहूंगा। गंदगी में रहकर आध्यात्मिकता की बात करने का कोई मतलब नहीं। हमारी विकास योजनाओं का स्वच्छता से सीधा संबंध है। भयमुक्त, स्वच्छ स्थितियां लक्ष्य प्राप्ति में असरकारक हो सकती हैं। अमरीका के एशियन डेवलपमेंट बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री अनिल पनगढि़या ने कहा कि पूंजी की कमी हो तो गरीबों के लिए आशा खत्म हो जाती है। भारत के लिए चीन और अमरीका जैसी स्थितियां नहीं हैं। अच्छी नौकरियों के लिए कुशल कामगारों की उपलब्धता यहां नहीं दिखती, श्रम आधारित उत्पादन में हमें अपना स्थान बनाना चाहिए। भूमि अधिग्रहण कानून, श्रम कानून, उच्च शिक्षा इन सभी क्षेत्रों में हमें अभी काफी काम करने की आवश्यकता है। इस सत्र के संचालक केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि मेक इन इंडिया, जन-धन, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत जैसे अभियानों की घोषणा की गई है, उसका दीर्घकालिक परिणाम होगा और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचेगा। भारत को प्राकृतिक संसाधनों के लिए ऐसी समग्र नीति बनानी चाहिए कि विकास का लाभ सभी को समान रूप से मिले। भारत के सामने चुनौती यह है कि उद्यमिता का विकास कैसे हो।
'भविष्य के झंझावात-हमने क्या सीखा' विषय पर हुए सत्र में नीदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री प्रो. रड लुबर्स ने कहा कि मैं ऊर्जा क्षेत्र का व्यक्ति हूं और इसीलिए इसकी बात करते हुए इसे पर्यावरण में आ रहे बदलाव जैसी समस्या से जोड़ रहा हूं। ऊर्जा संघ (एनर्जी यूनियन) बनाया जाना चाहिए ताकि वैश्विक समस्या से निपटा जा सके। मुझे लगता है कि यहीं भारत की भूमिका शुरू होती है। यह हाथ मिलाकर आगे बढ़ने का समय है।
यूएनआईडीओ, अर्जेटीना के पूर्व महानिदेशक कार्लोस मेगारिनोस ने कहा कि विकसित देश मंदी से जूझ रहे हैं। अर्थव्यवस्थाएं थमी हुई हैं। जबकि विकासशील देशों के लिए यह स्थिति इसके उलट है। धीमे-धीमे बढ़ते हुए विकासशील देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में दो तिहाई का योगदान करने लगेंगे। इसमें भी एशिया की भागीदारी सबसे ज्यादा रहने वाली है। वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ आदि वैश्विक संस्थाओं का प्रभाव हमने देख लिया। यह पिछली सदी की बातें हैं। पूर्व महासचिव ओआईसी और तुर्की के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे प्रो. एक्मेलेद्दीन इहसानोग्लू ने कहा कि कट्टरवाद, जिहाद और जन्नत की कहानियां युवाओं को भटका रही हैं। हमें राजनीति और मजहब के बीच की रेखा को परिभाषित करने की जरूरत है। यदि शांत, सभ्य और विकसित समाज चाहिए तो कट्टरवाद से पीछा छुड़ाना होगा।
'संस्कृति और राष्ट्र' विषय पर हुए सत्र की शुरुआत में डेविड फ्रॉली उपाख्य वामदेव शास्त्री ने कहा कि महर्षि रमण, महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद भारतीय ऋषि परंपरा के नाम हैं। ऋषि वह होता है जो व्यक्ति की चेतना को पारलौकिक चेतना से जोड़ता है। ऋषि पारलौकिक चेतना का सीधा स्रोत होता है। ऋषि का मानस मानवीय समस्याओं का हल दे सकता है, वह मानव में भेद नहीं करता। ऋषि आत्मा जिसका उपनिषद में उल्लेख है, मानवता के कल्याण की पोषक है। इसी ऋषि आत्मा का आह्वान एक व्यक्ति और राष्ट्र के रूप में भारत की चेतना को जगा सकता है। शिवत्रयी के प्रसिद्ध लेखक अमीष त्रिपाठी ने इस सत्र में कहा कि बच्चों को बताया जाता है कि आर्य बाहर से आए जबकि आर्य यहीं के हैं, इस बात को सत्य साबित करने के वैज्ञानिक प्रमाण हैं।
'नेतृत्व के लिए सीखना' विषय पर हुए सत्र में नीदरलैंड के लीडन विश्वविद्यालय से आईं एलिजाबेथ डेन बोअर ने कहा कि शैक्षिक के अतिरिक्त आध्यात्मिक इतिहास का ज्ञान भी आवश्यक है। हमें भविष्य के लिए ऐसा ही नेतृत्व चाहिए जिनकी चेतना जाग्रत हो। स्वामी मित्रानंद जी ने कहा कि नेता वह है जो ज्ञान के लिए, कुछ नया सीखने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है। भारत में यह परंपरा रही है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज की स्थापना की। भारत में स्वीकार्यता नहीं मिली तो उन भारतीयों को साथ लिया जो देश के बाहर रहते थे और अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करना चाहते थे। उनमें भारत के लिए लड़ने का जज्बा जगाया। भूटान से आए डॉ. सामदू छेत्री ने कहा कि भारत विभिन्न मत पंथों को जगह देने वाला पालना रहा है। मानव के अस्तित्व का सवाल शेष जगत के साथ सहयोग, समन्वय और सामंजस्य से जुड़ा है, अकेले अपने लिए चीजों को परिभाषित करने वाले हम कौन होते हैं? नेता वह है जो वैचारिक दृष्टि से नेतृत्व कर सके। मैत्री, न्याय, संसाधनों का सही बंटवारा जो कर सके वही नेता है। चीन से आए प्रो. एच.के. चांग ने कहा कि चीन में अधिकतर लोग कन्फ्यूशियस वाद को मानते हैं लेकिन ताओ और बौद्ध मत भी हैं। चीनी परंपरा में नेता का मतलब खुद से पहले जन कल्याण का भाव होना होता है। नेता को आलोचना सहने की योग्यता और हर परिस्थिति में जनकल्याण का भाव रखने वाला होना चाहिए। हम पड़ोसी हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता, हम दोस्त बने रहें, यह मानवता के लिए जरूरी है।
धर्म-सहिष्णुता और आतंक विषय पर हुए सत्र में 'न्यू ऐज इस्लाम इंडिया' के संस्थापक और संपादक सुल्तान शाहीन ने कहा कि उदारवादी मुस्लिमों के जिम्मे बड़ी भारी जिम्मेदारी है। इस्लाम के सकारात्मक पक्ष को स्वीकारने को कोई तैयार नहीं। वहाबियों की मुहिम जितनी तेजी से बढ़ी, यह चुनौती उतनी ही बड़ी हो गई है। कुरान को आसमानी किताब मानने और स्थापित करने वालों के साथ दिक्कत यह है कि वे यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि इस्लाम के साथ कहीं कोई बुनियादी गड़बड़ है। कुरान रची हुई पुस्तक है। हदीस की प्रामाणिकता अंतिम नहीं है। बेल्जियम के डॉ. कोनराड एल्स्ट ने कहा कि बोको हराम, तालिबान और आईएसआईएस की हरकतों के बाद इस स्पष्टीकरण का कोई मतलब नहीं रह गया कि इन बातों का इस्लाम से लेना- देना नहीं। निर्ममता और अत्याचार इस्लाम का आधार रहेे हैं। मोहम्मद ने यही सब किया था। इस्लाम के आलोचकों ने किसी मुस्लिम को नहीं मारा जबकि खुद मुसलमानों ने हजारों मुसलमानों की हत्या की थी।
'संस्कृति और राष्ट्र' विषय पर महाबोधी सोसाइटी श्रीलंका के अध्यक्ष पूज्य बानागला उपातिस्सा ने कहा कि मैं 12 वर्ष की आयु में वाराणसी आया। भगवान बुद्ध ने यहीं से पहला उपदेश दिया था यहां मेरे आसपास हिन्दू और मुसलमान थे, किंतु कभी मुझे यह अनुभव नहीं हुआ कि कोई फर्क है। यही भारत है।
इस्रायल स्थित रोमा वर्चुअल नेटवर्क के कार्यकारी संपादक वालेरी नोवोसेलेस्की ने कहा कि 'मैं रोमा लोगों में से हूं। ऐसे लोग जिनकी पहचान भटक गई है लेकिन हम लोग ऐतिहासिक रूप से भारत के लोग हैं। ऐसे में कह सकता हूं कि मैं अपनी ऐतिहासिक मातृभूमि की यात्रा पर आया हूं।'
'दक्षिण एशिया में स्थायी शांति' विषय पर हुए सत्र में पूर्व राजनयिक जी. पार्थसारथी ने कहा कि भारत दक्षिण एशिया का केन्द्र रहा है। इस क्षेत्र में आक्रमण सदा पश्चिम से हुए, पूर्व से नहीं। सिकंदर से लेकर आगे तक के उदाहरण देखे जा सकते हैं। भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री जिग्मे वाई. थिनले ने कहा कि भारत दक्षिण एशिया का केन्द्र ही नहीं, इसकी समृद्धि और सौहार्द का भी केन्द्र है। यह इस क्षेत्र का नेतृत्व कर सकता है। धर्मशाला स्थित तिब्बत प्रशासन के मुखिया श्री लोबसांग सांग्ये ने कहा, 'मैं तिब्बत से हूं, भारत में शरणार्थी हूं, लेकिन अपनी बात शिवजी का नाम लेकर शुरू करूंगा। दक्षिण एशिया में शांति तिब्बत में शांति के बगैर संभव नहीं।' कार्यक्रम के अंतिम सत्र में भारत के लिए विकास मंत्र विषय पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के समापन पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि अंत्योदय ने मुझे गहराई से प्रभावित किया है। हम ऐसे समय में विचार मंथन के लिए जुटे हैं जब विश्व में अशांति और उथल-पुथल मची है। हम अहिंसा परम धर्म पर चलने के हामी हैं।

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

वंदे मातरम विवाद: सोनिया गांधी के खिलाफ गाजियाबाद कोर्ट में शिकायत दाखिल

पानी में पेशाब मिलाने की घटना के बाद परिजनों ने स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।

स्कूल में छात्राओं की पानी की बोतल में पेशाब मिलाया, परिजनों ने किया हंगामा

Bastar Naxal Violence Victims Reach Delhi Real Stories CRPF Martyrs Panchjanya

“हमारे शरीर छलनी हैं और वो नक्सलवाद पर गर्व करते हैं”: नक्सल पीड़ित पहुंचे दिल्ली, सुनाई रूह कंपा देने वाली दास्तान

Satynder Jain plea application dismissed

दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले में AAP नेता सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार

RSS Akhil Bharatiya Samanvay Baithak Visakhapatnam Mohan Bhagwat Sunil Ambekar Demographic Change Panchjanya

डेमोग्राफिक चेंज पर संघ गंभीर : अखिल भारतीय समन्वय बैठक में होगी चर्चा, ‘Join RSS’ से संख्या में बड़ा उछाल!

चमोली टनल हादसा: 117 घंटे बाद पूरा हुआ देश का सबसे कठिन रेस्क्यू, 12 श्रमिक सकुशल निकले, 10 की दुखद मौत

Load More

ताज़ा समाचार

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

वंदे मातरम विवाद: सोनिया गांधी के खिलाफ गाजियाबाद कोर्ट में शिकायत दाखिल

पानी में पेशाब मिलाने की घटना के बाद परिजनों ने स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।

स्कूल में छात्राओं की पानी की बोतल में पेशाब मिलाया, परिजनों ने किया हंगामा

Bastar Naxal Violence Victims Reach Delhi Real Stories CRPF Martyrs Panchjanya

“हमारे शरीर छलनी हैं और वो नक्सलवाद पर गर्व करते हैं”: नक्सल पीड़ित पहुंचे दिल्ली, सुनाई रूह कंपा देने वाली दास्तान

Satynder Jain plea application dismissed

दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले में AAP नेता सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार

RSS Akhil Bharatiya Samanvay Baithak Visakhapatnam Mohan Bhagwat Sunil Ambekar Demographic Change Panchjanya

डेमोग्राफिक चेंज पर संघ गंभीर : अखिल भारतीय समन्वय बैठक में होगी चर्चा, ‘Join RSS’ से संख्या में बड़ा उछाल!

चमोली टनल हादसा: 117 घंटे बाद पूरा हुआ देश का सबसे कठिन रेस्क्यू, 12 श्रमिक सकुशल निकले, 10 की दुखद मौत

CM Pushkar Singh Dhami BJP Organizational Review Meeting Dehradun Panchjanya

उत्तराखंड में भाजपा संगठन को धार: सीएम धामी ने 3 लोकसभा क्षेत्रों के दिग्गजों संग की बैठक, बूथ स्तर की रणनीति तैयार!

Azam Khan Political Rise Crime History Jauhar University Demolition Notice Income Tax Panchjanya

रामपुर से ‘मिनी CM’ तक: जानिए आजम खान का उदय, अपराध का इतिहास और जौहर यूनिवर्सिटी का काला सच

विनोद तावड़े बने यूपी के प्रभारी, संगठन मंत्री ने दी बधाई

Chakma Black Day Buddhist Community Demands Chittagong Hill Tracts Merge With India Panchjanya

‘चटगांव को भारत में मिलाया जाए’ : चकमा ब्लैक डे पर उठी बड़ी मांग, 1947 की ऐतिहासिक भूल सुधारने की अपील!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies