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पर्यावरण
पृथ्वी के लगातार बढ़ते तापमान के कारण दोनों ध्रुवों पर बर्फ पिघलने लगी है। समुद्र के जल का स्तर एक से तीन मिमी. प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में यदि आने वाले दशकों में समुद्र का जलस्तर दो मीटर भी बढ़ गया तो निचले इलाकों के कई देश डूब जाएंगे। मौसम में असंतुलन पैदा हो जाएगा। कहीं सूखा पड़ेगा तो कहीं आवश्यकता से अधिक बारिश होगी। पूरा पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाएगा।
पर्यावरण आज समूचे विश्व के लिए चिन्ता का विषय है चाहे ग्लोबल वार्मिंग हो या प्रकृति के प्रकोप से अलग-अलग क्षेत्रों में आने वाली आपदाएं। हिमालय और गंगा भारत की जीवन रेखा के पर्याय हैं, आज हिमालय भी मर रहा है और गंगा का पानी सूखकर गंदगी का ढेर दिखाई पड़ रहा है। आज देश को सुजलाम् सुफलाम् के लक्ष्य तक पहुंचाने की आवश्यकता है, इसके लिए पेड़ लगाने, मिट्टी का संरक्षण करने और हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को पोषण देने की जरूरत है। हिमालय भारतीय संस्कृति का गौरव और गंगा हमारी जीवनदायिनी मां है। अब तक के देश के कई प्रधानमंत्रियों के सम्मुख मैंने हिमालयी नीति और गंगा की अविरल धारा के संरक्षण का प्रस्ताव रखा, लेकिन अपेक्षित प्रयत्न फलीभूत नहीं दिखे। नरेन्द्र मोदी अपनी कार्यशैली और वचनवद्धता के लिए जाने जाते हैं, वाराणसी में गंगा को देश के विकास के साथ जोड़ने के उनके संकल्प ने पर्यावरणविदों में आस जगाई है और मुझे पूरा विश्वास है कि देश के हिमालयी राज्यों को आपदा से बचाने के लिए भी देश के भावी प्रधानमंत्री कोई ठोस नीति बनाएंगे। हम भारतीयों को विश्व के समक्ष पर्यावरण की शुचिता के श्रेष्ठ मानक भी उपस्थित करने चाहिए और बढ़ते औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप निरंतर समस्या हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कार्यनीति बनानी चाहिए।
-पद्मविभूषण सुन्दरलाल बहुगुणा
शीर्ष पर्यावरणविद् एवं चिपको प्रणेता
क्या हो दृष्टिकोण
वैश्विक ताप बढ़ने के कारण कार्बन उत्सर्जन का बढ़ता स्तर जिम्मेदार है। हर देश को, खासकर विकसित देशों को अपने यहां कार्बन उत्सर्जन घटाना होगा। जंगलों के आवरण को बचाना होगा। धरती की हरियाली बरकरार रहे, इसके उपाय करने होंगे। भूजल स्तर पर विशेष ध्यान देना होगा। पेट्रोल पर निर्भरता कम करनी होगी।
दीर्घकालिक लक्ष्य
ल्ल शहरीकरण की आपाधापी से बाज आना होगा।
ल्ल पर्यावरण नियंत्रण के लिए होने वाली वैश्विक बैठकों में देशहित का ध्यान रखते हुए जिम्मेदारी निभानी होगी।
फौरन करना होगा
ल्ल कार्बन उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण
ल्ल नदियों्र तालाबों को बचाना होगा, अविरल, निर्मल करना होगा।
ल्ल ई-कचरा तिस्तारण और कचरा प्रबंधन व स्पष्ट परिपत्र।
यह है वादा
ल्ल साफ स्वच्छ उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
ल्ल प्रदूषण नियंत्रण के विभिान्न उपक्रमों को प्राथमिकता के आधार पर करना।
ल्ल वर्तमान वनों और अन्य जीव स्थानों का संरक्षण करना, बंजर भूमि का उपयोग सामाजिक वनक्षेत्र के लिए करना।










