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पाठकीय :अंक-सन्दर्भ 25 नवम्बर,2012

Written byArchiveArchive
Dec 15, 2012, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 15 Dec 2012 16:58:02

मेवात में मजहबी उत्पात

पाञ्चजन्य में प्रकाशित मेवात की रपट को पाठकों की सराहना खूब मिल रही है। वेबसाइट पर भी अनेक पाठकों ने प्रतिक्रिया दी है। उधर मेवात के हिन्दू बड़ी संख्या में पत्र लिखकर पाञ्चजन्य को बता रहे हैं कि उनकी क्या दुर्दशा है। सबकी पीड़ा लगभग समान है। किन्तु उन पर वहां के कट्टरवादियों का इतना खौफ है कि वे अपना नाम और पता प्रकाशित करने से मना करते हैं। यहां एक ऐसा ही पत्र प्रकाशित किया जा रहा है।–सं.

सम्पादक जी

नमस्ते।

मुझे पाञ्चजन्य का अंक (25 नवम्बर 2012) पढ़ने को मिला। इसमें आपने मेवात क्षेत्र में हिन्दुओं की दुर्दशा का मार्मिक चित्रण किया है। इसकी हमारे यहां हिन्दुओं में अच्छी चर्चा हो रही है और लोग आपके प्रति अपना आभार प्रकट कर रहे हैं। परन्तु जैसा आपको पता है कि मेवात क्षेत्र में हमारे ऊपर इतना दबाव रहता है कि हम अपनी बात खुले रूप से कहने में या अपना पता देने में भी डरते हैं। लेकिन यदि कभी सरकार हमारी रक्षा करने की पूरी व्यवस्था करे और गुप्त रूप से हमारी अवस्था की जांच करे तो हम अपने बयान दे सकते हैं, अन्यथा नहीं। क्योंकि अपने नाम, पते प्रकट होने पर हमें और हमारे परिवार के लिए संकट खड़ा हो सकता है। लेकिन इतना आपसे जरूर कह सकते हैं कि आपने जो बातें लिखी हैं वे पूरी तरह तथ्यों पर आधारित हैं। इससे भी कहीं अधिक संकटों का सामना हिन्दुओं को करना पड़ रहा है। बहुत सारे हिन्दू, जिनके पास रहने–खाने की व्यवस्था है वे तो मेवात से बाहर चले जाते हैं। परन्तु जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं वे सभी इसी क्षेत्र में रहने को बाध्य हैं। सरकार से हमारी यही मांग है कि मेवात के हिन्दुओं की दुर्दशा की जांच करवाई जाए। हम आपको इस रपट के लिए धन्यवाद देते हैं और अपना नाम, पता गुप्त रखने के लिए क्षमा चाहते हैं।–मेवात का एक हिन्दू

आवरण कथा के अन्तर्गत श्री अरुण कुमार सिंह की रपट 'मेवात को पाकिस्तान बनने से बचाओ' देशवासियों को एक कड़ी चेतावनी दे रही है। विदेशी आक्रमणों से सीमा-सुरक्षा में तैनात जवान प्राण-पण से मुकाबला कर सकते हैं। परन्तु देश के भीतर चल रहीं इन साजिशों से राजनीतिक दल और प्रबुद्ध नागरिक भी अनजान हैं।

–आचार्य मायाराम पतंग

एफ-63, पंचशील गार्डन, नवीन शाहदरा दिल्ली-110032

मेवात में हिन्दुओं की हालत से परिचित हुआ। यह दुर्भाग्यजनक ही नहीं, बल्कि शर्मनाक भी है। मजहब के नाम पर हिन्दू समुदाय को प्रताड़ित किया जा रहा है। जो लोग अपने आपको सेकुलर कहते हैं वे मेवात को लेकर खामोश क्यों हैं? हिन्दू मारे जाएं, भगाए जाएं, पर न तो सेकुलर नेता कुछ बोलते हैं और न ही कोई मानवाधिकारवादी मुंह खोलता है।

–मनोहर 'मंजुल'

पिपल्या–बुजुर्ग, प. निमाड़-451225 (म.प्र.)

मेवात के हिन्दुओं की समस्याओं को तथ्यों और निर्भीकता के साथ प्रकाशित करने के लिए पाञ्चजन्य का धन्यवाद। आशा करते हैं कि सरकार के कानों तक मेवात के हिन्दुओं की करुण आवाज पहुंचेगी।

–पदमचन्द आर्य

579/5, गली सं. 4, पटेल नगर

गुड़गांव (हरियाणा)

यह बेचैनी की बात है कि भारत में भी एक 'लघु पाकिस्तान' मेवात के रूप में बन चुका है। हमें जानकारी थी कि मेवाती राजपूत मुसलमान हाल-हाल तक अपने को हिन्दू पूर्वजों से जोड़कर गौरवान्वित होते थे। नि:संदेह तब्लीगी आन्दोलन ने उन्हें हमसे दूर कर दिया है। हिन्दू संगठनों को मेवात में अपने कार्यक्रमों में तीव्रता लानी होगी। स्वामी श्रद्धानन्द की भूमिका में आने के लिए राष्ट्रवादियों में होड़ लगनी चाहिए।

–क्षत्रिय देवलाल

उज्जैन कुटीर, अड्डी बंगला, झुमरी तलैया, कोडरमा-825409 (झारखण्ड)

मैं नरेला में एक कम्पनी में काम करता हूं। मेरी कम्पनी प्लास्टिक सामान की आपूर्ति करती है। दिनभर अनेक ट्रक माल लाते और ले जाते हैं। उन ट्रकों के अधिकांश चालक मेवात के होते हैं। मेवाती ट्रक चालकों की करतूतों की कहानी मैं रोज ही सुनता हूं। पाञ्चजन्य उनकी करतूतों को समाज के सामने लाया है। धन्यवाद।

–मोहन सिंह कंडयाल

औद्योगिक क्षेत्र, नरेला (दिल्ली)

मेवात की स्थिति पूरे देश के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। हिन्दुओं का जबरन मतान्तरण, मन्दिरों और श्मशान भूमि पर कब्जा, किसी हिन्दू मृतक का सड़क के किनारे अन्तिम संस्कार- ये घटनाएं यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि देश के जिस भाग में भी हिन्दुओं की संख्या कम हुई है वहां जिहादी तत्व मजबूत हुए हैं। मेवात में मजहबी तत्वों की वजह से ही हिन्दुओं का जीना दुश्वार हो गया है।

–हरिहर सिंह चौहान

जंवरीबाग नसिया, इन्दौर-452001 (म.प्र.)

मेवात को हिन्दू-विहीन करने में कट्टरवादियों को सेकुलरों की मौन-स्वीकृति प्राप्त है। सेकुलर कट्टरवादियों की करतूतों को छिपाकर कभी न नष्ट होने वाला पाप कर रहे हैं। मेवात में विदेशी मुसलमानों को खुलेआम बसाया जा रहा है और सेकुलर मीडिया में उसकी खबर तक नहीं बनती है, यह देशद्रोह है। आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।

–ठाकुर सूर्यप्रताप सिंह सोनगरा

कांडरवासा, रतलाम-457222 (म.प्र.)

मेवात हो या अन्य कोई मुस्लिम-बहुल क्षेत्र, हर जगह हिन्दुओं का उत्पीड़न हो रहा है। असम में तेजी से हिन्दू अल्पसंख्यक हो रहे हैं। राजधानी दिल्ली में कर्बला के आसपास सरकारी भूखण्डों पर कब्जा हो रहा है। वहां के हिन्दुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। दुर्भाग्य से प्राय: सभी राजनीतिक दल मुस्लिमों को रिझाने में लगे हैं। हिन्दू एकता ही इन समस्याओं का समाधान है।

–बी.एल. सचदेवा

263, आईएनए मार्केट, नई दिल्ली-110023

मेवात के हिन्दुओं के दु:ख-दर्द को देश के सामने रखने के लिए पाञ्चजन्य परिवार बधाई का पात्र है। आशा है पाञ्चजन्य ऐसी ही निर्भीकता के साथ अन्य समस्याओं को भी उठाएगा।

–ओमप्रकाश त्रेहन

एन-10, मुखर्जी नगर, दिल्ली-110009

मेवात जैसी स्थिति देश के अनेक भागों में बन रही है। चाहे दिल्ली हो, गुवाहाटी हो या हैदराबाद हर जगह कट्टरवादी तत्व सक्रिय हैं। सत्तालोलुप सेकुलर नेताओं के कारण इनके मनोबल दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। ताजा उदाहरण के लिए हैदराबाद के भाग्यलक्ष्मी मन्दिर प्रकरण को ले सकते हैं। दीपावली पर प्रतिवर्ष इस मन्दिर की सजावट की जाती है, पर कट्टरवादियों को यह मंजूर नहीं है। आपने बिल्कुल सही लिखा है कि कांग्रेस का हाथ लीगियों के साथ है।

–प्रमोद प्रभाकर वालसंगकर

1-10-81, रोड नं.- 8बी, द्वारकापुरम, दिलसुखनगर, हैदराबाद-500060

मेवात की जानकारी मिली। लगता है सेकुलर मीडिया बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, ईसाई मिशनरियों, भ्रष्ट नेताओं और विदेशी गुप्तचर एजेंसियों के हाथों की कठपुतली बन चुका है। इस मीडिया ने पूरे देश में भ्रम का माहौल बना रखा है। भाई को भाई से दूर कर इस देश-धर्म व संस्कृति को नष्ट करने की मीडिया ने मानो कसम खा रखी है। साधु-सन्तों और देशभक्त संगठनों पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। सेकुलर मीडिया ने षड्यंत्रपूर्वक हिन्दू समाज को भ्रमित कर मोह की चिरनिद्रा में सुला दिया है। इस मीडिया पर लगाम लगाने की आवश्यकता है। तभी हिन्दू समाज अन्य सभी समस्याओं का मुकाबला करने की स्थिति में खड़ा हो सकेगा।

–जितेन्द्र जैन

महावीर नगर 3, केशवपुरा रोड, कोटा (राजस्थान)

मेवात की परिस्थितियां अति चिन्ताजनक हैं। वहां से हिन्दू पलायन कर रहे हैं। 'लव जिहाद' के नाम पर हिन्दू लड़कियों से मुसलमान लड़के निकाह कर रहे हैं। मेवात में अनेक गिरोह हैं, जो लूट-पाट, चोरी-डकैती करते हैं। पुलिस इन्हें पकड़ने की हिम्मत नहीं कर पाती है। गोहत्या बढ़ने की बात तो प्रशासन भी मान रहा है।

–दिनेश आर्य

पटेल नगर, गुड़गांव-122001

मेवात में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक घोषित किया जाए और वहां जारी देशविरोधी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। हो सके तो मेवात के अध्ययन के लिए एक विशेष आयोग का गठन हो।

–राजेश कुमार अग्रवाल

खैर, अलीगढ़ (उ.प्र.)

मेवात में हालात आपके लिखे से भी ज्यादा खराब हैं। आएदिन गोहत्या, लूट-मार, मतान्तरण, हिन्दू लड़कियों का अपहरण जैसी घटनाएं होती रहती हैं। हमारे बहुत सारे रिश्तेदार मेवात में रहते हैं। वे लोग मेवात की स्थिति से बराबर अवगत कराते हैं। हम सरकार से जांच की मांग करते हैं।

–सुमित्रा देवी

पटेल नगर, गुड़गांव (हरियाणा)

पाञ्चजन्य की रपट बहुत सही है। फिर भी हम कह सकते हैं कि जो लिखा गया है वह कम है। जमीनी हालात शायद इससे भी बदतर हैं। मैं स्वयं मेवात संभाग का निवासी हूं। हिन्दुओं की उपेक्षा और मुस्लिमों के तुष्टीकरण के चलते हिन्दुओं में जो भय व्याप्त है तथा पलायनवादी मानसिकता का विस्तार हुआ है वह निश्चय ही अकल्पनीय है। सत्ता में बैठे लोगों से क्या अपेक्षा करें, परन्तु मीडिया भी क्यों पक्षपाती हो गया है? समझ से परे है। कृपया इस क्षेत्र के हिन्दुओं की पीड़ा और दुर्दशा पर और गहराई से नियमित रपट प्रकाशित करें।

–डा. सुनील आर्य

सेक्टर14, गुड़गांव (हरियाणा)

सावधान रहे भारत

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी में हुए नेतृत्व परिवर्तन पर आधारित श्री आलोक गोस्वामी की रपट 'चीन से चौकन्ने रहो' समयोचित है। चीन का नेतृत्व चाहे कोई करे उसकी विदेश नीति कभी नहीं बदलती है। चीन विस्तारवादी है। अपना विस्तार करने में वह यह नहीं देखता है कि क्या गलत है और क्या सही। वह विश्व विरादरी की आलोचनाओं पर भी ध्यान नहीं देता है। एक ही धुन में लगा रहता है कि चीन का डंका दुनिया में कैसे बजे। चीन से सबसे अधिक सावधान भारत को ही रहना पड़ेगा।

–सुहासिनी प्रमोद वालसंगकर

द्वारकापुरम, दिलसुखनगर, हैदराबाद-60 (आं.प्र.)

ऐसे दूर होगा भ्रम

आज देश में सात्विक शक्तियों और आसुरी शक्तियों के मध्य जो युद्ध चल रहा है, उसमें सात्विक शक्तियां इसलिए दुर्बल प्रतीत हो रही हैं क्योंकि इस देश का सेकुलर मीडिया आसुरी शक्तियों के पक्ष में खड़ा हो गया है। लेकिन धीरे-धीरे आम जनता सेकुलर मीडिया की करतूतों को समझती जा रही है। आज आवश्यकता है- देश के अंतिम से अंतिम व्यक्ति तक सरल भाषा में, उदाहरण सहित ये बात पहुंचाई जाए कि 'सेकुलर अखबार में छपी और न्यूज चैनल में बतायी जा रही प्रत्येक खबर सही नहीं होती' तभी भारत में भ्रम का माहौल समाप्त होगा।

–हेमराज पाटीदार

ग्रा.-धरोला, तह-नलखेड़ा, जि.-शाजापुर (म.प्र.)

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