मुलायम पुत्र की सरकार तलेबेकाबू मजहबी उन्माद-लखनऊ से शशि सिंह-
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मुलायम पुत्र की सरकार तलेबेकाबू मजहबी उन्माद-लखनऊ से शशि सिंह-

Written byArchiveArchive
Aug 25, 2012, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 25 Aug 2012 15:07:21

 

आज उत्तर प्रदेश में सवाल उठने लगा है कि यहां मुलायम सिंह की सरकार है या उनके पुत्र अखिलेश यादव की? इस सवाल का जवाब सामान्य तौर पर यही दिया जा रहा है कि सरकार तो अखिलेश की है, लेकिन उसकी नकेल मुलायम सिंह यादव के हाथों में है। तभी तो कभी खुलेआम एक पूर्व मुख्यमंत्री की मूर्ति तोड़ी जा रही है, दूसरी ओर तीन शहरों में खुला उपद्रव होता है। मूर्ति तोड़ने का मामला राजनीतिक होता है इसीलिए लीपापोती करते हुए नई मूर्ति लगवा दी जाती है और आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाता है। लेकिन असम और म्यांमार में मुस्लिमों पर कथित ज्यादती के बाद प्रदेश के तीन बड़े शहरों-राजधानी लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद- में हजारों उपद्रवियों द्वारा घंटों उत्पात किया जाता है, पत्रकारों को पीटा जाता है, छायाकारों के कैमरे तोड़ दिए जाते हैं, इसके बावजूद कुछ अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं होती।

पता था, पर रोका नहीं

उत्तर प्रदेश में 17 अगस्त को अलविदा की नमाज का दिन उपद्रव के नाम रहा। राजधानी लखनऊ, कानपुर के साथ ही इलाहाबाद को भी हिंसा की भेंट चढ़ा दिया गया। राजधानी में जमीयत उलेमाए हिंद ने चार दिन पहले से ही घोषणा कर रखी थी कि वह अलविदा की नमाज (17 अगस्त-शुक्रवार) के बाद असम और म्यांमार की घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन करेगी। जिला प्रशासन ने पहले तो उसे अनुमित दे दी थी, लेकिन ऐन मौके पर उसे निरस्त कर दिया। इसका साफ मतलब था कि उसे किसी गड़बड़ी का अंदेशा था। लेकिन तब भी उसकी रोकथाम के लिए किसी तरह का इंतजाम नहीं किया गया। नतीजा, पूरा शहर हिंसा की भेंट चढ़ गया। पहले से तैयार अराजक तत्व टीले वाली मस्जिद से लेकर विधानभवन तक (करीब चार किलोमीटर के दायरे में) तीन घंटे तक उपद्रव मचाते रहे। तैयारी पहले से थी। उन्हें बताया गया था कि 'असम और म्यामांर में मुसलमानों पर घोर अत्याचार किया गया है। उनका बदला लेना है।' लाठी, डंडे और घातक हथियारों समेत वे पहले से ही तैयार थे।

महावीर स्वामी की प्रतिमा तोड़ी

टीले वाली मस्जिद में नमाज खत्म होने के थोड़ी ही देर बाद हजारों की संख्या में भीड़ एकत्रित हो गई। हिंसा पर उतारू ये मजहबी कट्टरवादी वहां से उत्पात मचाते हुए विधानसभा की ओर चल पड़े। रास्ते में जो जहां मिला, उसको पीटते और तोड़-फोड़ करते रहे। उत्पाती भीड़ गोमती नदी के किनारे बुद्ध पार्क, कारगिल शहीद पार्क और हाथी पार्क में घुस गई और जमकर तोड़-फोड़ की। महावीर स्वामी की प्रतिमा तोड़ी गई। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में लगी झालरों को छिन्न-भिन्न कर दिया। रास्ते में एक दर्जन से अधिक आम लोग इनकी हिंसा के शिकार हुए। पूरी घटना को अपने कैमरे में उतार रहे छायाकार भी इनका निशाना बने। उनकी जमकर धुनाई की गई और कैमरे तोड़ डाले गए। रील निकाल ली गई ताकि उनकी हिंसा को दिखाया न जा सके। दोपहर करीब दो बजे से शुरू हुआ इनका उपद्रव शाम पांच बजे तक जारी रहा। उपद्रवियों ने रास्ते में जिलाधिकारी आवास में भी घुसने की कोशिश की। फिर आगे बढ़ते हुए हजरतगंज स्थित मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय को निशाना बनाया। उसमें घुसने की कोशिश की। बहरहाल वहां तैनात रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया।

हिंसा का उफान

पुलिस ने उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। वे साथ-साथ चल रहे थे, मानो उनकी मूक सहमति हो। एक दो पुलिसवाले भी उनका निशाना बने। एक पुलिसवाले की मोटरसाइकिल में ही आग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्हें उपद्रवियों को कड़ाई से रोकने का कोई आदेश नहीं मिला था। भीड़ हजरतगंज होते हुए विधानसभा मार्ग पर धरनास्थल की ओर बढ़ी तो भी उसे रोकने का इंतजाम नहीं किया गया। उधर प्रदर्शन पर रोक के बावजूद धरनास्थल पर जमीयत उलेमाए हिंद का विरोध जारी रहा। वहां जुटे लोगों ने देशविरोधी और सरकार विरोधी नारे लगाए। हिंसक भीड़ धरनास्थल पर आई तो वहां धरने पर बैठे अन्य विभिन्न संगठनों के लोगों को मारकर भगा दिया गया। शाम को स्थिति अत्यंत विस्फोटक होने पर बड़ी संख्या में पुलिस बल आया तो हिंसक भीड़ तितर-बितर हो गई। अपने ऊपर हुए अन्याय के खिलाफ जब पत्रकार एकजुट हुए तो सरकार ने घटना की जांच राजधानी के मंडलायुक्त को सौंपकर मामले को थामने की कोशिश की। बाद में 15 हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कानपुर में उत्पात

उधर कट्टर मजहबी तत्वों द्वारा कानपुर में भी व्यापक हिंसा की गई। यहां यतीमखाना स्थित नानपारा मस्जिद में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की गई। नमाज के बाद वहीं असम मामले पर भड़काऊ भाषण शुरू कर दिया गया। सभी लोग नारेबाजी करते हुए नवीन मार्केट की ओर बढ़ने लगे। यहां पुलिस ने उन्हें रोकने की थोड़ी कोशिश की तो उपद्रवी भारी पड़े। सैकड़ों लोगों की भीड़ साइकिल मार्केट की ओर बढ़ी और हिंसा का नंगा नाच शुरू हो गया। इनके आने से इस व्यस्त मार्केट में भगदड़ मच गई। उपद्रवियों ने वाहनों को अपना निशाना बनाया। दुकानों में तोड़-फोड़ का सिलसिला काफी देर तक जारी रहा। इसके बाद नई सड़क का इलाका उनके निशाने पर रहा। वहां भी व्यापक उत्पात किया गया। यहां पुलिस और उत्पातियों के बीच लुकाछिपी का खेल काफी देर तक चला। कानपुर में भी हिंसा के बाद अभी तक किसी कार्रवाई की खबर नहीं है।

लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद में तोड़–फोड़

राजधानी में भगवान महावीर की मूर्ति तोड़ी

कारगिल शहीद पार्क को भी बनाया निशाना

पत्रकार और छायाकार भी हिंसा के शिकार

पूरे राज्य में दहशत का माहौल, सरकार ने साधी चुप्पी

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