अजेय है भारतीय संस्कृति
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अजेय है भारतीय संस्कृति

Written byArchiveArchive
Dec 17, 2011, 12:00 am IST
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अंतिम पृष्ठ

दिंनाक: 17 Dec 2011 16:20:42

पटना में “संस्कृति बचाओ महासम्मेलन” सम्पन्न

-अशोक सिंहल, अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद

सांस्कृतिक गौरव संस्थान के तत्वावधान में गत दिनों पटना में “संस्कृति बचाओ” विषय पर 2 दिवसीय राष्ट्रीय महासम्मेलन का आयोजन किया गया। महासम्मेलन का उद्घाटन विश्व हिन्दू परिषद के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल ने किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सुमेरु पीठ (काशी) के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती ने की। इस अवसर पर जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी, गुजरात के पूर्व राज्यपाल श्री कैलाशपति मिश्र और सांस्कृतिक गौरव संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डा. महेश चन्द्र भी मंचासीन थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अशोक सिंहल ने कहा कि भारतीय संस्कृति अजेय है, इसका कोई विनाश नहीं कर सकता। हमारी संस्कृति संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। यह लाखों वर्षों में तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का अवतरण ऋषि-मुनियों के तप एवं आशीर्वाद से हुआ है। वेद मंत्रों के श्रुति-वाचन से धरती पर दैवीय शक्तियां निवास करने लगती हैं। उन्हीं शक्तियों ने पुरातन काल में संस्कार से युक्त सांस्कृतिक समाज का निर्माण किया।

श्री सिंहल ने कहा कि आज धर्म आधारित समाज विलुप्त हो रहा है। आज के परिवेश में भोगवादी संस्कृति का परित्याग कर अपनी भारतीय संस्कृति की रक्षा करना ही धर्म है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ षड्यंत्रकारी हमारी संस्कृति को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। सांस्कृतिक गौरव संस्थान इन शक्तियों के विनाश के लिए ही स्थापित किया गया है।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए विराट हिन्दू समाज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी एक सात्विक हिन्दू थे, लेकिन वर्तमान परिवेश एवं देश की परिस्थिति को देखते हुए विराट हिन्दू समाज समय की मांग है।

सुमेरु पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि दुनिया में सभी प्रभावी संस्कृतियों का इतिहास तीन हजार वर्ष ही पुराना है, लेकिन हमारी सनातन हिन्दू संस्कृति युगों-युगों से है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। परन्तु इतिहास गवाह है कि हमारी संस्कृति को मिटाने वाले खुद ही मिट गए।

उद्घाटन सत्र में सांस्कृतिक गौरव संस्थान की स्मारिका “संस्कृति बचाओ महासम्मेलन – पटना 2011” का लोकार्पण सुमेरु पीठ (काशी) के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती, श्री अशोक सिंहल और डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री बालकृष्ण नाइक विशेष रूप से उपस्थित थे। द प्रतिनिधि

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