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-मोहनराव भागवत, सरकार्यवाह, रा.स्व.संघ
वचनेश जी के जाने से एक प्रेरक जीवन और उस जीवन से नि:सृत प्रेरक लेखन अस्त हो गया है। निर्भय और बेबाक रूप से राष्ट्रहित में ही लिखना और राष्ट्रहित के लिए जीवन जीने की प्रेरणा तरुणों में जगाने के लिए ही लिखना, ऐसा उनका संकल्प था। और अपनी तरुणाई से लेकर जीवन की अंतिम श्वांस तक उसी प्रकार का जीवन उन्होंने जिया। क्रांतिकार्य की प्रखरता का दाह उतने ही प्रबल संकल्प के साथ उन्होंने सहन किया और आज की स्थिति में वर्तमान पीढ़ी के समक्ष जीने लायक जीवन का उदाहरण स्वयं के जीवन से चरितार्थ किया, जीवनभर उसी को लेखन में भी प्रकट किया। उनकी लेखनी और उनका जीवन हम लोगों को सदा प्रेरणा देता रहेगा। ऐसे व्यक्ति को तो आध्यात्मिक गति प्राप्त होती ही है। ऐसा व्यक्तित्व और ऐसा लेखन अब आगे हमें उपलब्ध नहीं रहेगा। उस लेखन और उस जीवन की स्मृति को साथ लेकर हम लोग उस उदाहरण अपने जीवन में चरितार्थ कर सकें, ऐसा प्रयास हम करें। इतना बल और धैर्य प्रभु हमें प्रदान करें, यही एकमेव प्रार्थना है।
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