| दिंनाक: 12 Nov 2005 00:00:00 |
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हरिमंगलभाजपा विधायक की हत्या की साजिश तो एक अर्से से चल रही थी। क्या उत्तर प्रदेश सरकार इससे अनजान थी? क्या सरकार के खुफिया विभाग को श्री राय की हत्या के षडंत्र की खबर नहीं थी? सरकार व प्रशासन कुछ भी कहे, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। सूत्रों के अनुसार, अगस्त, 2005 के अंतिम सप्ताह से ही बाहुबली मुख्तार अंसारी के पैतृक गांव यूसुफपुर में 35-40 बाहरी व्यक्तियों के आने जाने की सूचना “स्पेशल टास्क फोर्स” (एस.टी.एफ.) को मिली थी। एस.टी.एफ. ने अपना जाल बिछाया तो पता चला कि इन सारे लोगों के तार पाकिस्तान में बैठे दाऊद इब्राहिम से लेकर मुम्बई के कुछ माफियाओं और स्थानीय अपराधियों से जुड़े हैं। यह किसी बड़ी घटना को अंजाम देंगे और इन अपराधियों के निशाने पर कृष्णानंद राय सहित उनका परिवार है। सूत्रों का कहना है कि एस.टी.एफ. के अधिकारियों ने पूरे मामले का विवरण उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस विभाग के आला अफसरों को देते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की अनुमति मांगी थी परन्तु उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। स्थानीय पुलिस ने भी अपने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था कि मुख्तार का इलाका यूसुफपुर अपराधियों का गढ़ बन गया है जहां कुख्यात माफिया मुन्ना बजरंगी समेत अनेक अन्तरराष्ट्रीय अपराधी भी गाहे-बगाहे शरण लेते हैं। जो भी हो, कृष्णानन्द राय को जान गंवानी ही पड़ी। मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने, समाचार लिखे जाने तक, गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक का तबादला कर एस.टी.एफ. आगरा के पुलिस अधीक्षक अखिल कुमार को जिले की कमान सौंप दी है। एस.टी.एफ. के एक विशेष जांच दल को घटना का पर्दाफाश करने के लिए लगाया गया है। पुलिस ने हत्याकाण्ड में संलिप्त अपराधियों को पकड़ने में इंटरपोल से भी सहायता मांगी है। वहीं दूसरी ओर श्री राय के परिजनों ने विधायक मुख्तार अंसारी, सांसद अफजाल अंसारी, मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान, एजाज, फिरदौस सहित आठ अज्ञात लोगों के विरुद्ध कृष्णानन्द राय की हत्या करने, हत्या का षडंत्र रचने का मुकदमा मुहम्मदाबाद थाने में दर्ज कराया है। समाचार लिखे जाने तक एजाज के आत्मसमर्पण की सूचना है।हरिमंगलNEWS