| दिंनाक: 01 Sep 2005 00:00:00 |
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सच दिखाया तो कांग्रेस ने कुछ पादरियों को भड़काया-प्रतिनिधि”गोवा इंक्विजीशन” के दौरान हिन्दू बंदियों के यातना शिविरों का चित्रण। इस रेखाचित्र में यातना के दौरान ईसाई पादरियों द्वारा हिन्दुओं को आग में जलाते हुए व कोड़े लगाते हुए दर्शाया गया है। यह रेखाचित्र पुर्तगाली शासन के समय चित्रकार ने बनाया था जिसे हमने ए.के. प्रिओलकर की पुस्तक “द गोवा इंक्विजीशन” से लिया है।गोवा सरकार द्वारा जारी सी.डी. का आवरणभारत कैसा पंथनिरपेक्ष देश है कि जहां हिन्दुओं की भावना से छेड़छाड़ की जाए या कुठाराघात भी किया जाए तो वे तिलमिलाते नहीं, बल्कि अपनी पंथनिरपेक्षता पर कायम रहते हैं। इसी पंथनिरपेक्षता के नाम पर हिन्दुओं के जगद्गुरु शंकराचार्य जी को बेहिचक गिरफ्तार किया गया है। लेकिन इस देश पर हमला कर अत्याचार करने वाले यदि मुस्लिम या ईसाइ हों और उनकी कोई अनुचित बात उजागर हो जाए तो उसे सांप्रदायिक कहा जाता है। गोवा सरकार द्वारा गोवा स्वातंत्र्य संग्राम पर बनाए गए वृत्तचित्र पर विवाद इसका ताजा उदाहरण है।गोवा सरकार ने हाल ही में इस वृत्तचित्र की सी.डी. राज्य के सभी विद्यालयों तथा अन्य संस्थाओं को वितरित की है। 19 दिसम्बर का दिन गोवा के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। 400 वर्षों तक पुर्तगालियों की गुलामी में रहे गोवा ने 45 वर्ष पूर्व इसी दिन स्वतंत्रता प्राप्त की थी। गोवा स्वातंत्र्य दिवस के अवसर पर यह वृत्तचित्र राज्य के सभी विद्यालयों में दिखाया गया।वृत्तचित्र के प्रसारण के साथ ही कांग्रेस के उकसाने पर कुछ ईसाई पादरियों ने उसके खिलाफ हल्ला मचाना प्रारंभ कर दिया। उनका कहना था कि इस फिल्म के सहारे सरकार समाज में साम्प्रदायिक विद्वेष का जहर फैला रही है। यह फिल्म देखकर बच्चों के मन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। राज्य के शिक्षा विभाग ने बिना किसी सलाह-मशविरे के सी.डी. विद्यालयों को भेज दी। इस तरह के कई आरोप डायोसिस सेवा केन्द्र और “डायोसिस शिक्षा मंडल” ने राज्य सरकार पर लगाए। उल्लेखनीय है कि डायोसिस शिक्षा मंडल गोवा में लगभग सौ स्कूल चलाता है।”गोवा का स्वतंत्रता संग्राम” फिल्म में ऐसी क्या बात है, जिसने ईसाइयों को इस कदर आकुल कर दिया? इस प्रश्न के उत्तर में डायोसिस शिक्षा मंडल के प्रवक्ता फादर वेलेटियन वाज कहते हैं – “यह फिल्म गोवा का स्वतंत्रता संग्राम कम, साम्प्रदायिक विद्वेष ज्यादा दिखाती है। ईसाई पादरियों ने हिन्दू जनता पर भयंकर अत्याचार किए, उनका जबरदस्ती मतांतरण किया, महिलाओं पर बलात्कार किए गए आदि बातें दिखाना गलत है। स्कूली बच्चों को जिस तरह यह सब दिखाया गया, सर्वथा अनुचित है।”असल बात तो यह है कि गोवा के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास इन तथ्यों से भरा पड़ा है कि वहां के ईसाई पादरियों ने हिन्दुओं पर कैसे-कैसे अत्याचार किए। भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में लोग यही मानते हैं। “गोवा इंक्विजीशन” नाम से गोवा स्वतंत्रता संग्राम का यह अत्याचारों से भरा कालखंड कुख्यात है। अत्याचारों के इस युग में मतान्तरण का विरोध करने वाले हिन्दुओं को जो सहना पड़ा वह नाजियों को हिटलर द्वारा दी गई यातना से भी बदतर था। औरंगजेब ने संभाजी महाराज के साथ जिस तरह का बर्ताव किया, उसकी “इंक्विजीशन कैंप” से बराबरी नहीं हो सकती। गोवा के कई इतिहासकारों ने इस तथ्य को भली-भांति उजागर किया है। कई ईसाई स्वतंत्रता सेनानियों ने भी इसे स्वीकार किया है। आक्रमणकारी पुर्तगालियों का हिन्दुओं ने विरोध किया था। इसीलिए, मत एवं देश की रक्षा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इन्हीं तथ्यों को अगर फिल्म में दिखाया गया तो उस पर किसी को आपत्ति क्यों?गोवा के शिक्षा महानिदेशक ने इस फिल्म के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, “यह फिल्म दो वर्ष पूर्व यानी दिसम्बर, 2002 में ही मराठी के प्रसिद्ध अभिनेता एवं निर्देशक रमेश देव ने बनाई था। फिल्म के विमोचन समारोह में समाज के करीब 200 गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उनमें कई पत्रकार भी थे। फ्लावियो डिसूजा, दीपक डिसूजा जैसे स्वतंत्रता सेनानी, गोवा के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक प्रभाकर सिनारी, त्रिविकम संखवाल, नागेश करमानी, सुश्री सीमा रिसबुड जैसे राज्य के प्रतिष्ठित एवं विद्वान व्यक्तियों की समिति ने यह फिल्म देखकर उसके प्रदर्शन-प्रसारण की अनुमति दी थी। इस फिल्म को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने के लिए उसकी सी.डी. बनाना आवश्यक था। सी.डी. बनाना तय हुआ और इस प्रक्रिया में करीब दो वर्ष गुजर गए। बहरहाल, जब चर्च ने यह मुद्दा उछाला तो प्रदेश कांग्रेस ने तुरंत चर्च को अपने समर्थन की घोषणा कर दी। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की भी घोषणा की।” इन सभी बातों से चर्च के असली अभिप्राय का पता चलता है। गोवा में मनोहर पर्रीकर के नेतृत्व में भाजपा सरकार है। इस सरकार को गिराने की जितनी बार कांग्रेस ने की कोशिश, उतनी बार उसे ही नुकसान उठाना पड़ा। राज्य सरकार और मजबूत हुई। अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के सफल आयोजन से श्री पर्रीकर और उनकी सरकार की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चमक उठी है। भाजपा शासन में कुछ ईसाई विधायक पर्रीकर सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इसी बात से कांग्रेस परेशान है। कहा जा रहा है कि ईसाइयों में भाजपा के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगाने के लिए शायद चर्च के साथ मिलकर उसने यह साजिश रची है।NEWS