| दिंनाक: 05 Aug 2005 00:00:00 |
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अपने स्नायु को शक्तिशाली बनाओ। हम लोहे की मांसपेशियां और फौलाद के स्नायु चाहते हैं। हम बहुत रो चुके। अब और अधिक न रोओ, वरन् अपने पैरों पर खड़े होओ और मनुष्य बनो।-स्वामी विवेकानन्दउगते सूरज का संदेशउगते सूरज के देश जापान के प्रधानमंत्री श्री जुनीकीरो कोईजुमी की भारत यात्रा (29 अप्रैल) पिछले कुछ समय से घनिष्ठ हो रहे संबंधों के मार्ग पर एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत और जापान आध्यात्मिक एवं सभ्यता मूलक दृष्टियों से परस्पर सदियों से जुड़े रहे हैं। सामान्य भारतीयों के मन में जापान के प्रति जो स्नेह और सम्मान का भाव है वही सम्मान जापानियों के मन में भारतीयों के लिए पाया जाता है। एक शोध के अनुसार तो जापान की भाषा में तमिल का भी प्रभाव है और वहां बुद्ध, सरस्वती, गणेश की पूजा सामान्य प्रचलन में है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को भी जापान का सहयोग एवं समर्थन भारतीयों द्वारा हमेशा कृतज्ञता से याद किया जाता है। पिछले कुछ समय से भारत जापान आर्थिक संबंधों में भी तीव्रता आने का एक दौर शुरु हुआ है। अभी भारत में मारुति की 50 लाखवीं कार निकलने का उत्सव मनाया गया तो उसके पीछे जापान की सहायता और उद्यम की छाप स्पष्ट थी। भारत के विविध क्षेत्रों में जापानी सहयोग बढ़ रहा है। यद्यपि अभी जापान भारत व्यापार चार अरब डालर वार्षिक है जो वास्तविक क्षमता की तुलना में बहुत कम है, परंतु आने वाले वर्षों में यह कई गुना बढ़ेगा इसमें कोई संदेह नहीं है।नेपाल में गतिरोधनेपाल सरकार द्वारा अचानक रात के समय पूर्व प्रधानमंत्री श्री शेर बहादुर देउबा को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार करने से नेपाल के मित्र एवं शुभेच्छु लोकतांत्रिक शक्तियों को भी आश्चर्य हुआ है। नेपाल को यह समझना चाहिए कि वह अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और उसका मुख्य हेतु न केवल आतंकवादी माओवादी तत्वों को परास्त करना है तथा नेपाली जनता को सुख और चैन का वातावरण देना है बल्कि इसके साथ यह भी स्पष्ट करना है कि लोकतांत्रिक शक्तियां प्रभावी ढंग से मजबूत बनें। यह सत्य है कि नेपाल में माओवादी कम्युनिस्टों ने अराजकता का जो दौर चलाया उस संबंध में नेपाल के महाराजाधिराज के लिए कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। ऐसी स्थिति में नेपाल के सभी वर्गों तथा तत्वों को एकजुट होकर सबसे पहले नेपाल की अखंडता और रक्षा के लिए प्रयासों को मजबूत बनाना आवश्यक था। इस बीच नेपाल द्वारा राजनीतिक दलों एवं पत्रकारों पर जो प्रतिबंध लगाया गया उनसे मिश्रित संदेश गए। ऐसी स्थिति में जहां भारत द्वारा नेपाल को सैन्य सहायता पुन: प्रारंभ की ही जानी चाहिए, वहीं हमें स्पष्ट रुप से नेपाल की लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ खड़े रहना ही उचित है।लालू पर कोई समझौता न होकेन्द्रीय रेल मंत्री एवं सेकुलर प्रतिशोधी शिविर के प्रिय श्री लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध कानून का शिकंजा कसता ही जा रहा है। लेकिन केन्द्र की संप्रग सरकार अरक्षणीय लालू की रक्षा का लड़खड़ाता प्रयास कर रही है।सदन का बहिष्कार केवल उस परिस्थिति में एक विवशता बन जाता है जब न्याय मांगने पर न्याय न मिले, अपराधी के विरुद्ध प्रमाण होने के बावजूद उसे राजनीतिक संरक्षण दिया जाए तथा सरकार और विपक्ष में संवादहीनता जैसी स्थिति पैदा हो जाए। यद्यपि डा. मनमोहन सिंह ने श्री आडवाणी से आग्रह किया कि वे यह बहिष्कार का निर्णय बदल दें परंतु राजग के नेताओं ने इस आग्रह पर विचार कर उसे अस्वीकार किया।वास्तव में राजग को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह राजनीति में अतिशय सदाशयता और एकतरफा सकारात्मक रवैये का शिकार न बने। राजग के प्रति कांग्रेस व कम्युनिस्टों का दुराग्रह एवं प्रतिशोधी व्यवहार प्रारंभ से ही बहुत तेजाबी होता गया है।NEWS