| दिंनाक: 07 Mar 2005 00:00:00 |
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पानी का घमासानतमिलनाडु और कर्नाटक के मध्य कावेरी जल बंटवारे को लेकर दशकों तक जो संघर्ष चला, उससे तो सभी परिचित हैं ही। अब देश की राजधानी दिल्ली के सोनिया विहार जल संयंत्र को पानी देने के प्रश्न पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों, नौकरशाहों के बीच उग्र बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौ. अजीत सिंह, उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री मुन्ना सिंह चौहान और सिंचाई आयोग की अध्यक्षा अनुराधा चौधरी ने तो इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव तक को खुली धमकी दे दी है कि वे किसी कीमत पर सोनिया विहार जल संयंत्र, दिल्ली को 260 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहीं देने देंगे। दिल्ली को पानी उपलब्ध कराने के सवाल पर उत्तर प्रदेश सरकार के इस अन्तद्र्वन्द्व ने केन्द्र के समक्ष गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं। हरियाणा और उत्तरांचल की कांग्रेस सरकारों ने भी अपने राज्य के हितों को प्रमुखता देते हुए दिल्ली को पानी देने की बात उठने से पहले ही हाथ खड़े कर लिए थे। परिणामत: 800 करोड़ रुपए की लागत से बने सोनिया विहार जलशोधन संयंत्र को जलापूर्ति कहां से हो, यह सोच-सोच कर दिल्ली सरकार के आला अधिकारियों की नींद हराम है। वस्तुत: उत्तर प्रदेश सरकार की चिंताएं जायज हैं। अजीत सिंह की बात में दम दिखता है कि आखिर उत्तर प्रदेश दिल्ली को किस कीमत पर पानी देगा। क्या राजस्थान के किसानों की तरह उत्तर प्रदेश में भी किसान अपना हक मारे जाने पर आन्दोलित नहीं होंगे? वस्तुत: अपनी जरूरत का पानी तो उत्तर प्रदेश के पास भी नहीं है। पिछले वर्ष की ही बात है, राज्य में पूर्ण रूप से मानसून की बारिश न होने से किसान और उनके खेत प्यासे रह गए थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा जैसी नदियों का पेट जमीन को छूने लगा है। साथ ही क्षेत्र के इलाहाबाद, वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, मध्य आजमगढ़, मिर्जापुर आदि जिलों में जल स्तर इतना नीचे पहुंच गया है कि प्रशासन को नलकूप से होने वाली सिंचाई पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।NEWS