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उद्योग जगत के निशाने पर

Written byArchiveArchive
Mar 4, 2005, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 04 Mar 2005 00:00:00

वैट-दीवान अमित अरोड़ामूल्य संवर्धित कर प्रणाली यानी “वैट” को लेकर विभिन्न प्रदेश सरकारों ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसे पूरे देश पर समान रूप से लागू करने की मांग की है। 1 अप्रैल, 2005 से यह नया प्रावधान लागू किया जाना था। लेकिन देश के व्यापार और उद्योग जगत ने इसके विरुद्ध तीखी टिप्पणियां की हैं। आखिर क्या है “वैट”, यह जानने के लिए इस पर एक नजर डालनी जरूरी है।आज से 10 वर्ष पूर्व जब डा. मनमोहन सिंह भारत के वित्त मंत्री थे तो उन्होंने “गैट” संधि पर हस्ताक्षर करके देश को विश्व व्यापार संगठन के हवाले कर दिया था। तब से आज तक विश्व व्यापार संगठन के दबाव में हमारे देश में नए-नए कानून लागू हो रहे हैं। इन 10 वर्षों में मुक्त व्यापार के तहत हमारे बाजारों को खोला गया है। आयात शुल्क में भारी कटौती की गई है। लघु उद्योगों के लिए आरक्षित करीब 800 उत्पादों पर से नियंत्रण हटा लिया गया है, जिसके घातक परिणाम सामने आए हैं। उधर लघु उद्योगों पर भारी-भरकम कर लगा दिए गए हैं। लागत बढ़ने से बाजार में हमारे उद्योग प्रतिस्पर्धा में कहीं पीछे रह गए हैं तथा धीरे-धीरे बंद होने के कगार पर हैं। चीन और कोरिया के उत्पादों के कारण हमारा कपड़ा उद्योग, खेल सामान उद्योग, खिलौना उद्योग तथा बिजली के उपकरण बनाने वाला उद्योग चौपट होकर रह गया है। इन उद्योगों के बंद होने से लाखों की संख्या में मजदूर बेकार हो गए हैं।इन 10 वर्षों के अनुभवों से सीख न लेते हुए इस वर्ष भी विश्व व्यापार संगठन के दबाव में केन्द्र सरकार ने दो कड़े निर्णय लिए हैं, एक पेटैंट कानून, दूसरा “वैट” कानून। पेटेंट कानून तो 1 जनवरी, 2005 से लागू हो गया है, लेकिन अंदेशा है कि यह कानून हमारे देश की लघु औद्योगिक इकाइयों को, खासकर दवा निर्माताओं को तबाह करके रख देगा। छोटे-छोटे दवा निर्माता अब बड़ी अंतरराष्ट्रीय कम्पनियों के आगे कहीं भी टिक नहीं पाएंगे। “वैट” यानी वेल्यू एडिड टैक्स, जो वस्तु के उत्पाद से लेकर बिक्री तक सभी स्तर पर बढ़ती कीमत के आधार पर वस्तु की मूल कीमत में जुड़ेगा तथा प्रत्येक बिक्री स्तर पर उद्योगपतियों एवं व्यापरियों को सरकारी विभाग की जटिल कागजी कार्रवाइयों से जूझना पड़ेगा। इसी वजह से “वैट” का विरोध व्यापारी वर्ग द्वारा पूरे देशभर में किया जा रहा है। 21 फरवरी को तो इसके विरोध में भारत बंद पूर्ण रूप से सफल रहा। अगर “वैट” को व्यापक विरोध के बावजूद लागू कर दिया गया तो परिणाम बड़े घातक होंगे। अनपढ़ व्यापारी अगर कहीं भी कागजी कार्रवाई में चूक कर गए तो उन्हें 1,000 से 10,0000 रुपए तक का जुर्माना व कैद की सजा भी हो सकती है तथा अफसरशाही व्यापारिक प्रतिष्ठान को सील भी कर सकती है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सरकार को “वैट” अगर लागू ही करना है तो पूरे देश में एक समान रूप से “वैट” लगाना चाहिए जिससे बाकी करों में कटौती दरें लागू हो। “वैट” के लागू होने से जहां व्यापार पर बुरा असर होगा वहीं लघु उद्योगों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा, जो 32 लाख से भी अधिक लोगों को रोजगार देता है। “वैट” के इन संभावित खतरनाक परिणामों तथा विषम परिस्थितियों को देखते हुए भी सरकार इसे कड़ाई से लागू करने पर अड़ी हुई है। उधर व्यापारिक संगठनों, व्यापार मंडलों तथा औद्योगिक संगठनों ने “वैट” के खिलाफ आंदोलन करने की ठानी है।NEWS

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