अब तक कश्मीर घाटी के आतंकवादियों को बचाने वालों के लिए 12 अगस्त को उस समय एक बुरी खबर आई, जब जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके 27 वर्षीय बेटे वीेरेंद्र कौल की हत्या मामले में कार्रवाई शुरू की। बता दें कि आतंकवादियों ने उन दोनों की हत्या 30 अप्रैल, 1990 को कर दी थी। आश्चर्य की बात यह है कि हत्या के 36 वर्ष बाद भी हत्यारों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब कार्रवाई होने से कौल के परिवार वालों को न्याय की उम्मीद जगी है।
जांच एजेंसी ने मामले की जांच के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर में नौ स्थानों पर छापेमारी की। एसआईए की टीमें राजौरी जिले में छह स्थानों, जम्मू में दो और श्रीनगर में एक स्थान पर पहुंचीं। यह कार्रवाई अनंतनाग के डोरू थाने में पहले से दर्ज एफआईआर के सिलसिले में की गई। बता दें कि 29 अप्रैल, 1990 की शाम को तीन आतंकवादी सर्वानन्द कौल ‘प्रेमी’ के घर पहुंचे।
आतंकवादियों ने पहले कौल और उनके परिवार वालों से कुछ बातचीत की और घर की महिलाओं से उनके गहने इत्यादि मूल्यवान वस्तुएं लाने को कहा। डरी-सहमी महिलाओं ने सब कुछ निकालकर दे दिया। इसके बाद आतंकवादियों ने सारे गहने जेवरात और कीमती सामान एक सूटकेस में भरा और फिर वे लोग सर्वानन्द कौल और उनके बेटे वीरेंद्र कौल को अपने साथ अगवा कर ले गए।
परिवार इस उम्मीद में रहा कि वे वापस आएंगे, लेकिन अगले ही दिन यानी 30 अप्रैल, 1990 को पुलिस को उनकी लाशें अनंतनाग में चिनार के पेड़ से लटकती हुई मिलीं। सर्वानंद कौल अपने माथे पर भौहों के मध्य जिस स्थान पर तिलक लगाते थे, आतंकवादियों ने वहां कील ठोंक दी थी। पिता-पुत्र को गोलियों से छलनी तो किया ही गया था, इसके अतिरिक्त शरीर की हड्डियां तोड़ दी गई थीं और जगह-जगह उन्हें सिगरेट से दागा भी गया था। इस मामले में एक एफआईआर (45/1990) डोरू पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। उसी की जांच अब एसआईए कर रही है।

















