‘मैं पश्चिमी लोगों से बदला ले रहा था, जो हर दिन मुसलमानों की हत्याएं करते हैं।’ ये शब्द हैं फ्रांस के नीस शहर में स्थित एक चर्च में हत्याएं करने वाले आतंकी के। जिसे 4 साल के बाद अब फ्रांस की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आतंकी ने अदालत में फ्रांस को गाली दी और कहा कि ये दुष्टों और कुत्तों का देश है।
क्या है पूरा घटनाक्रम
ये घटना है अक्तूबर 2020 की जब फ्रांस के नीस शहर में एक चर्च में ट्यूनीशियाई मूल के मुस्लिम आतंकी 25 वर्षीय ब्राहिम औइसाउई ने किचेन में इस्तेमाल होने वाले चाकू से घोपकर तीन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस हमले में एक व्यक्ति की तो गर्दन धड़ से अलग ही हो गई थी। आतंकी ने नादिन डेविलर्स (60) का सिर तो लगभग अलग ही कर दिया था, ब्राजील के रहने वाले केयर टेकर 44 वर्षीय बेरेटो सिल्वा की चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी, उसी तरह से बेसिलिका में 55 साल के चर्च कर्मी विंसेंट लोकेस का भी गला रेत दिया था। बाद में पुलिस वालों ने उसे किसी तरह से काबू कर लिया।
इस मामले में हत्यारे को तीन हत्या और 6 हत्या की कोशिशों के मामले में दोषी ठहराया गया। इस मामले में सुनवाई करते हुए फ्रांस के पीठासीन जज क्रिस्टोफ पेटिटेउ इस हमले को असामान्य बर्बरता करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया के आरोपी ने खुद इस बात को कबूल कर लिया है कि वो आतंकवाद फैलाने के लिए दृढ़ निश्चयी था। उसने फ्रांस को दुष्टों और कुत्तों का देश करार दिया है। इसके अलावा उसे 7 पुलिसकर्मियों ने एक साथ मिलकर गिरफ्तार किया था। उसके पास से कुरान, तीन चाकू और दो मोबाइल मिले थे।
जिरह के दौरान अदालत को पता चला कि हमलावर जब 13 साल का था, तभी उसने तुर्की में अपना स्कूल छोड़ दिया था। मात्र 13 साल की उम्र में वो शराब और भांग पीता था। ये हत्याएं सैमुअल पैटी की हत्या के बाद की गई थीं, जिसने पूरे फ्रांस को हिलाकर रख दिया था।
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