समाज का हित ही लेखनी का ध्येय
July 28, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

समाज का हित ही लेखनी का ध्येय

पाञ्चजन्य के प्रथम संपादक अटल बिहारी वाजपेयी ने यह संबोधन पत्रकारिता के विभिन्न आयामों के प्रति पैनी दृष्टि को दर्शाता है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 25, 2022, 03:30 pm IST
in भारत, विश्लेषण

अटल जी ‘राष्ट्रधर्म’ और ‘पाञ्चजन्य’ के प्रथम संपादक थे। पत्रकारिता छोड़ कर राजनीति में पूरी तरह रम जाने और राजनीतिक ऊंचाइयां चढ़ने के बाद भी अटल जी की न सिर्फ दृष्टि और लेखनी की धार पैनी बनी रही बल्कि पत्रकारिता के तमाम पहलुओं पर वह चिंतन भी करते थे

दिल्ली में 29 और 30 मार्च, 1994 को प्रथम पाञ्चजन्य लेखक एवं संवाददाता सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इसके उद्घाटन सत्र को पाञ्चजन्य के प्रथम संपादक अटल बिहारी वाजपेयी ने संबोधित किया था। यह संबोधन अटल जी की पत्रकारिता के विभिन्न आयामों के प्रति पैनी दृष्टि को दर्शाता है।

अटल जी कहते हैं कि पत्रकारिता के लिए बुनियादी बात यह है कि ध्येय के प्रति समर्पण हो, विचार के प्रति समर्पण हो। उन्होंने कहा कि विचार में शक्ति है और विचार जब छप जाता है तो एक हथियार बन जाता है। हालांकि यदि विचार बिक रहा है, विचार बेचा जा रहा है और उसके मूल में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना नहीं है तो फिर विचारों का विक्रय हमें कहां ले जाएगा, इसकी कल्पना से हमें चिंता होती है।

अखबारों के स्वामित्व पर अटल जी ने कहा कि यद्यपि इस समय बाजार आधारित अर्थव्यवस्था चल रही है लेकिन फिर भी अखबारों के स्वामित्व का कोई न कोई तरीका होना चाहिए, ढंग होना चाहिए। विचारों की स्वाधीनता, अभिव्यक्ति की आजादी, उसका उपयोग समाज के हित में होगा या नहीं होगा या वह निहित स्वार्थ के हाथों का खिलौना बन कर रह जाएगी, यह देखना चाहिए। समाचारपत्र मालखाने से निकलने वाला माल नहीं है।

मई, 1996 में पाञ्चजन्य को दिए गए एक साक्षात्कार में आज के संपादकों को संदेश देने के लिए कहने पर अटल जी ने कहा कि मैं उपदेश देने की स्थिति में नहीं हूं। इतना ही कहूंगा कि संपादक को समाज के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए और अपने प्रति सच्चा होना चाहिए। आत्मा के विरुद्ध काम नहीं करना चाहिए। लेकिन यह जरूरी है कि पहले आत्मा को जीवित रखा जाए।

फरवरी, 2000 में अटल जी ने कहा कि लेखन एक कला है, उसकी साधना करनी पड़ती है। विषय कोई भी हो, उसको ठीक तरह से प्रस्तुत करके पाठक का ज्ञानवर्धन करना चाहिए। पत्रकारिता में लेखन का परम लक्ष्य समाज होता है जो समाज को सबल बनाता है। पत्रकारिता में यह भी जरूरी है कि विचारों के प्रति प्रतिबद्धता हो। विचारों की भिन्नता भी एक सत्य है। लेकिन विचार भिन्नता और मतभेद ऊंचे स्तर पर पेश किए जाने चाहिए।

पत्रकारों के लिए आचार संहिता की पैरवी करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अगर अपनी बात कहनी है तो कही जाए, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादा के भीतर, लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखते हुए। अगर बार-बार लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन होगा, तो उसका कोई अर्थ नहीं रहेगा। हर वर्ग को अपने लिए आचार संहिता बनानी चाहिए।

मैं उपदेश देने की स्थिति में नहीं हूं। इतना ही कहूंगा कि
संपादक को समाज के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए।

– 1996 में पाञ्चजन्य को दिए गए एक साक्षात्कार में

पत्रकारिता की पगडंडी पर
अटल जी के पत्रकार बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। बात 1947 की है। उन दिनों भाऊराव देवरस जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रचारक थे और पंं. दीनदयाल उपाध्याय सह प्रांत प्रचारक। संघ के कार्यक्रमों में अटल कविता-पाठ किया करते थे। खूब सराहना होती थी। भाऊराव जी और दीनदयाल जी की नजर में यह युवा, प्रखर और ओजस्वी कवि आ गया। जुलाई के महीने में दीनदयाल जी, भाऊराव जी और अटल जी की बैठक हुई। तय हुआ कि संघ के प्रचार-प्रसार के लिए एक मासिक पत्रिका निकाली जाए। किसी ने नाम सुझाया ‘राष्ट्रधर्म’। अटल जी इसके पहले संपादक बने। 31 अगस्त, 1947 को रक्षाबंधन पर राष्ट्रधर्म का पहला अंक प्रकाशित हुआ। इस अंक के पहले पन्ने पर संपादक अटल बिहारी वाजपेयी की कविता प्रकाशित हुई थी,
‘हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू मेरा परिचय,
मैं शंकर का वह क्रोधानल, कर सकता जगती क्षार क्षार।’
यह कविता बाद में बहुत मशहूर हुई।

‘राष्ट्रधर्म’ के पहले अंक की 3,000 प्रतियां प्रकाशित हुई थीं। उस दौर में कोई भी हिंदी पत्रिका 500 से अधिक संख्या में नहीं छपती थी। राष्ट्रधर्म की सभी प्रतियां हाथों-हाथ बिक गईं तो 500 प्रतियां और छापनी पड़ीं। राष्ट्रधर्म के दूसरे अंक की 8,000 और तीसरे अंक की 12,000 प्रतियां छपी थीं। अटल जी कुछ ही महीने इस पत्रिका के संपादक रहे।

‘राष्ट्रधर्म’ की सफलता से उत्साहित संघ ने ‘पाञ्चजन्य’ नाम से एक साप्ताहिक भी निकालने का फैसला किया। इसके भी पहले संपादक की जिम्मेदारी अटल जी को ही मिली। 1948 में मकर संक्रांति के अवसर पर पाञ्चजन्य का पहला अंक प्रकाशित हुआ। उनके साथ काम करने वाले लोग बताते थे कि संपादन का उनका अंदाज वाकई निराला था। उन दिनों लेटर प्रेस होने के कारण कम्पोजिंग आज जैसी आसान नहीं थी। अंतिम दौर में पता लगता था कि चार-छह पंक्तियों की जगह खाली छूट रही है। कम्पोजिटर दौड़ा-दौड़ा आता था कि कुछ और पंक्तियां दे दीजिए, जिससे जगह भर जाए। अब लेख हो, गीत हो या कविता, अटल जी तुरंत उसमें चार-छह पंक्तियां बोलकर जुड़वा देते थे। अटल जी उत्कृष्ट राजनेता, यशस्वी संपादक, कवि और पत्रकार होने के साथ-साथ अच्छे कम्पोजिटर भी थे। 1980 में रांची से प्रकाशित एक दैनिक में अटल जी पहुंचे तो उन्हें पीटीएस लग जाने के बारे में बताया गया। वे पीटीएस की तकनीक और इसकी बारीकियों, विशेषताओं को देखने प्रेस पहुंच गए। वे कुर्सी पर बैठ गए और काफी देर तक तकनीक को समझने का प्रयास करते रहे। इसी दौरान उन्होंने बताया कि वे ‘हैण्ड कम्पोजिंग’ करना भी जानते हैं। ‘राष्ट्रधर्म’ के संपादन के दौरान कभी-कभी यह भी करना पड़ता था।

शब्द शिल्पी

साहित्यप्रेमी राजनेता कम होते हैं। लेकिन अटलजी इन दोनों परिभाषाओं से परे थे। वे वास्तव में शब्दों का संधान बहुत कुशलता से कर लेते थे। चाहे वह भाषण में हो, प्रत्युत्तर हो, तर्क हो, लेखन हो या कविता हो। उनका साहित्यिक प्रस्फुटन बहुत अनूठा था। प्रस्तुत हैं, कुछ उदाहरण –

  • अमावस के अभेद्य अंधकार का अंत:करण पूर्णिमा की उज्ज्वलता का स्मरण कर थर्रा उठता है।
  •  राष्ट्र कुछ संप्रदायों तथा जनसमूहों का समुच्चय मात्र नहीं, अपितु एक जीवमान इकाई है।
  •  साहित्य और राजनीति के कोई अलग-अलग खाने नहीं होते।’

पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित सचित्र साप्ताहिक अभ्युदय में 11 फरवरी, 1946 को प्रकाशित अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता का एक अंश –
स्वतत्रता का युद्ध दूसरा, बजी समर की भेरी
लानत कोटि-कोटि पुत्रों की, मां कहलाए चेरी।
सर पर कफन बांध कर
निकली सरि-सी मस्त जवानी,
एक नया इतिहास बनाने, गढ़ने नई कहानी।
सागर सी लहराती आई मतवालों की टोली,
महलाप्रलय के बादल गरजे इंकलाब की बोली।
और …
आज लबालब भरा देश के अपमानों का प्याला,
आंसू के सागर में सुलगी है बड़वा की ज्वाला।
जला नहीं प्रह्लाद होलिका क्षार हो गई क्षण में,
सुनो प्रसून की अगवानी का स्वर उन्चास पवन में।
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है,
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है।
इसका कंकर-कंकर शंकर है,
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है।
**
आज सिंधु में ज्वार उठा है,
नगपति फिर ललकार उठा है,
कुरुक्षेत्र के कण-कण से फिर,
पाञ्चजन्य हुंकार उठा है।

अटल जी के भाषणों के कुछ उद्धरण

  •  जीवन को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता, उसका पूर्णता में ही विचार करा जाना चाहिए।
  •  हमारे पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा कि चुटकी तो बज सकती है।
  •  लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा पर संसद में बहस के दौरान (आप चाहते हैं कि) ‘हम कारसेवा करते रहें, और आप सरकार सेवा करते रहें
  •  वास्तव में हमारे देश की लाठी कमजोर नहीं है,बल्कि वह जिन हाथों में है, वे कांप रहे हैं।
  •  मेरे पास न परदादा, दादा की दौलत है और न बाप की। मेरे पास सिर्फ मेरी मां का आशीर्वाद है।
  •  बिना हमको सफाई का मौका दिए फांसी पर चढ़ाने की कोशिश मत करिए। क्योंकि हम मरते-मरते भी लड़ेंगे और लड़ते-लड़ते भी मरने को तैयार हैं।
  •  मेरा कहना है कि सबके साथ दोस्ती करें लेकिन राष्ट्र की शक्ति पर विश्वास रखें। राष्ट्र का हित इसी में है कि हम आर्थिक दृष्टि से सबल हों, सैन्य दृष्टि से स्वावलम्बी हों।

पाञ्चजन्य से लगाव
‘पाञ्चजन्य’ से उनका लगाव अंत तक बना रहा। प्रधानमंत्री कार्यालय में साथ काम कर रहे पाञ्चजन्य के एक पूर्व पत्रकार से कई बार ‘पाञ्चजन्य’ की चर्चा हो जाती थी। वे अपने व्यस्त समय में से कई बार अपने पुराने सहयोगियों की खोज-खबर लेने को कहते। इस कड़ी में ‘पाञ्चजन्य’ के पूर्व संपादक महेंद्र कुलश्रेष्ठ का पता लगाने के कई प्रयास किए गए। कई बार उन्होंने पूर्व सहयोगियों को मिलने के लिए बुलाया भी। स्व. रामशंकर अग्निहोत्री भी उनसे मिलते रहते थे।

स्व. दीनानाथ मिश्र और प्रो. देवेंद्र स्वरूप भी ‘पाञ्चजन्य’ में उनके सहयोगी रहे, जिनसे वे गपशप करते रहते थे। एक बार किसी कार्यक्रम के लिए उनका भाषण तैयार हो गया, लेकिन आयोजक ने उन्हें कुछ गलत जानकारी दी थी, जिसका पता उन्हें एक दिन पहले लगा। इस बात से वे क्षुब्ध थे। आयोजक के बारे में अतीत में उन्होंने जो प्रशंसा की थी, वह उस प्रारूप में थी। यह देखते ही अटल जी बिफर गए और उसे संशोधित करने को कहा। जब पूर्व पत्रकार ने उनसे आग्रह किया कि वे ‘पाञ्चजन्य’ के संपादक रहे हैं, यदि स्वयं कलम चलाएंगे तो अच्छा होगा और उन्हें कलम पकड़ा दी।

उन्होंने भाषण के शुरू की 13 पंक्तियों को जिस तरह दो पंक्तियों में संपादित किया, वह उनके कुशल संपादन की एक झलक मात्र थी। ऐसा करते समय उनके चेहरे पर जो संतोष का भाव दिखा, वह एक संपादक जैसा भाव था। उनका लेखकीय मन बार-बार कुछ लिखने को या संपादित करने को तैयार दिखता था। कई बार जब भाषण तैयार कर उन्हें दिए जाते तो वह ऐसा कोई न कोई शब्द या वाक्य ढूंढ लेते और चर्चा करते। तब उनके चेहरे पर लेखक भाव झलकता था।

Topics: दीनदयाल जीप्रथम संपादक अटल बिहारी वाजपेयीराष्ट्र के प्रति समर्पण की भावनाभाऊराव जी‘राष्ट्रधर्म’अटल जी उत्कृष्ट राजनेतायशस्वी संपादकराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघकवि और पत्रकारपाञ्चजन्यस्व. दीनानाथ मिश्रअटल जीप्रो. देवेंद्र स्वरूपपं. दीनदयाल उपाध्याय
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

गुरु पूर्णिमा पर विशेष : ऐसे शुरू हुई गुरु दक्षिणा की परंपरा

Assam Flood 2026 RSS Volunteers Relief Work Sivasagar Betbari Amguri Food Water Distribution Panchjanya

“नर सेवा ही नारायण सेवा”: असम में भयावह बाढ़ के बीच पीड़ितों का सहारा बने संघ के स्वयंसेवक, देखिए तस्वीरें!

Journalist Alok Goswami passes away

वरिष्ठ पत्रकार आलोक गोस्वामी का निधन, पाञ्चजन्य के अतुलनीय सहयोगी अब हमारे बीच नहीं रहे

माता रेवतीबाई संस्कार केंद्र का उद्घाटन संपन्न, बच्चों में संस्कार एवं राष्ट्रभाव जागृत करने का संकल्प

मुरली मनोहर जोशी

अमिट अटल : ‘संघ से जुड़ी है हमारी नाल’

Bharat Vikas Parishad Membership Campaign RSS Panch Parivartan Sutra Emerging India Social Service

‘उभरते भारत’ में महासंकल्प को तैयार भारत विकास परिषद! 2 लाख परिवारों तक सदस्यता और घर-घर पहुंचेगा ‘पंच परिवर्तन’ सूत्र

Load More

ताज़ा समाचार

प्रयागराज में सीजेपी आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने वाले उपद्रवियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

प्रयागराज में आंदोलन की आड़ में उपद्रव करने वाले 10 गिरफ्तार, डिप्टी सीएम केशव बोले- बवाल करने वाले सपा के गुंडे

काशी विश्वनाथ धाम

वाराणसी : सावन में रेस्टोरेंट और दुकानों पर नहीं बिकेगा मांस, मछली और अंडा 

मातृत्व पर सरसंघचालक मोहन भागवत जी का बड़ा संदेश- “सृष्टि का सृजन बिना मातृत्व के संभव नहीं”

जनता दर्शन में फरियादियों की समस्याएं सुनते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

परेशान न हों, हर उचित समस्या का निष्पक्षता से कराएंगे समाधान : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

पुस्तकें (प्रतीकात्मक चित्र)

एंथ्रोपिक समेत कई AI कंपनियां पुरानी किताबें खरीदकर क्यों कर रहीं कॉपी?

दिल्ली में छात्रों पर आधी रात गोलीबारी की खबर वायरल, PIB फैक्ट चेक ने बताई सच्चाई

West bengal Malda Shivling

पश्चिम बंगाल: मालदा में हिन्दुओं ने स्थापित किया 3.5 फुट का शिवलिंग, हजारों की संख्या में उपस्थित रहे भक्त

गुरु पूर्णिमा : त्याग, तप और तेज का प्रतिनिधि भगवा ध्वज

ओडिशा के CM ने फुलबाणी मेडिकल कॉलेज का नाम ‘स्वामी लक्ष्मणानंद’ के नाम पर रखा, विकास पैकेज की घोषणा

प्रतीकात्मक तस्वीर

POJK में पाकिस्तानी बर्बरता जारी: शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रेंजरों ने चलाई गोलियां, 12 लोगों की मौत

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies