शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के विजिटर राम नाथ कोविन्द ने प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित को जेएनयू के कुलपति के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति पांच साल की अवधि के लिए है।
जगदीश कुमार ने सोमवार को एक बयान में कहा, “मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की शांतिश्री धूलिपुडी पंडित को जेएनयू का अगला कुलपति नियुक्त किया गया है। वह जेएनयू की पहली महिला कुलपति हैं। उन्हें मेरी हार्दिक बधाई। मैं उन्हें कार्यभार सौंप रहा हूं। आज उन्हें प्रभार दिया और उनकी नई भूमिका में उनकी सफलता की कामना की।”
प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने 1988 में गोवा विश्वविद्यालय से अपने अकादमिक शिक्षण करियर की शुरुआत की। 1992 में वे पुणे विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता के रूप में अध्यापन करने लगीं। अपने करियर में, उन्होंने 29 पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है।
प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित वर्तमान में महाराष्ट्र में सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय के राजनीति और लोक प्रशासन विभाग में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर हैं। प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित जेएनयू में प्रो. एम जगदीश कुमार का स्थान लेंगी। जगदीश कुमार को पिछले सप्ताह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। वह पिछले साल अपना पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जेएनयू में कार्यवाहक वीसी का प्रभार संभाल रहे थे।
प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित का जन्म सेंट पीटर्सबर्ग, रूस में 15 जुलाई 1962 में हुआ था। वह तेलुगु, तमिल, मराठी, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा की ज्ञाता हैं। उन्होंने 1996 में स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय से पोस्ट-डॉक्टोरल डिप्लोमा इन पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज किया है। 1986 में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमफिल और 1990 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में “भारत में संसद और विदेश नीति – नेहरू वर्ष” पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने अमेरिका की कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से सामाजिक कार्य में डिप्लोमा किया है। इसके अलावा प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से 1983 में इतिहास और सामाजिक मनोविज्ञान में बीए और 1985 में एमए राजनीति विज्ञान किया है।
उन्होंने केंद्र सरकार की युवा मामले और खेल मंत्रालय की सलाहकार समिति सहित कई शैक्षणिक निकायों में प्रशासनिक पदों पर भी काम किया है। वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) की भी सदस्य रही हैं।
शिवम् दीक्षित एक अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार हैं, जिन्होंने 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत मनसुख टाइम्स (साप्ताहिक समाचार पत्र) से की। इसके बाद वे संचार टाइम्स, समाचार प्लस, दैनिक निवाण टाइम्स, और दैनिक हिंट में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया, जिसमें रिपोर्टिंग, डिजिटल संपादन और सोशल मीडिया प्रबंधन शामिल हैं।
उन्होंने न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, जहां इंडियाज़ पेपर परियोजना का नेतृत्व करते हुए 500 वेबसाइटों का प्रबंधन किया और इस परियोजना को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाया।
वर्तमान में, शिवम् राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं।
शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं।
उनकी उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी अंसार खान की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। यह सम्मान 8 मई, 2023 को दिल्ली में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र (IVSK) द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें केन्द्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल, RSS के सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र जी, और उदय महुरकर जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शिवम् की लेखन शैली प्रभावशाली और पाठकों को सोचने पर मजबूर करने वाली है, और वे डिजिटल, प्रिंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहे हैं। उनकी यात्रा भड़ास4मीडिया, लाइव हिन्दुस्तान, एनडीटीवी, और सामाचार4मीडिया जैसे मंचों पर चर्चा का विषय रही है, जो उनकी पत्रकारिता और डिजिटल रणनीति के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
टिप्पणियाँ