दिल्ली

प्रधानमंत्री आवास के पास सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद, हटाने का नोटिस

रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी गई थी। इस कार्रवाई ने सरकारी जमीन के इस्तेमाल और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है।

Published by
Mahak Singh

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास के पास रेस कोर्स मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने परिसर को सरकारी भूमि पर स्थित बताते हुए अनधिकृत करार दिया है और छह दिनों के भीतर इसे खाली करने का नोटिस जारी किया है। प्रशासन के मुताबिक मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और वक्फ ने इसे अपनी संपत्ति के रूप में दर्शाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी गई थी। इस कार्रवाई ने सरकारी जमीन के इस्तेमाल और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है।

सरकारी जमीन पर अधिकार को लेकर उठे सवाल

प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मस्जिद परिसर की जमीन का वास्तविक कानूनी स्वामित्व किसके पास है और वहां निर्माण तथा उपयोग के लिए आवश्यक अनुमति मौजूद है या नहीं। केवल लंबे समय से किसी स्थान पर मजहबी गतिविधियां होने से भूमि पर कानूनी स्वामित्व अपने आप साबित नहीं हो जाता। इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, भूमि अभिलेखों और संबंधित सरकारी आदेशों की जांच निर्णायक होगी।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने दावा किया है कि मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान का उल्लेख 1977 के दिल्ली गजट, NDMC की हेरिटेज सूची तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की संशोधित सूची में मिलता है। हालांकि, इन सूचियों में किसी संपत्ति का उल्लेख होना और उस जमीन पर वैध मालिकाना हक या निर्माण की अनुमति होना अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। इसलिए संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता, उनका दायरा और वर्तमान भूमि रिकॉर्ड से उनका संबंध स्पष्ट होना जरूरी है। जमीयत ने दिल्ली वक्फ बोर्ड और NDMC से भी अभिलेखों पर रिपोर्ट मांगी है।

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