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सीजेपी के सौरव दास-आशुतोष रांका जमानत मामले में ट्विस्ट: मजिस्ट्रेट ने जान का खतरा बताकर केस से अलग हुए

Published by
कुलदीप सिंह

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत सुनवाई रविवार को स्थगित हो गई। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) तय समय पर नहीं पहुंचे और बाद में अपनी जान को खतरा बताते हुए खुद को इस सुनवाई से अलग कर लिया। दिल्ली पुलिस ने इस धमकी को लेकर मामला दर्ज कर लिया है।

गिरफ्तारी कैसे हुई

14 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों जंतर मंतर पहुंचे थे, जिसे अब प्रदर्शन के लिए नामित जगह नहीं माना जाता। पुलिस के मुताबिक उन्होंने बैरिकेड तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की थी। इसी आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।

सुनवाई में क्या हुआ

जमानत की सुनवाई रविवार को तय थी। सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे सुबह 11 बजे से ही पुलिस स्टेशन पहुंची हुई थीं। सुनवाई दोपहर 12 बजे तय थी, लेकिन सहायक पुलिस आयुक्त, जो एसईएम का काम भी करते हैं, शाम करीब 5:30 बजे पहुंचे।

एसईएम ने बाद में खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार उन पर दबाव बनाया जा रहा था कि दास और रांका को जल्द रिहा कर दिया जाए। पुलिस ने इस धमकी को लेकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत आपराधिक धमकी और लोक सेवक को धमकाने का मामला दर्ज किया।

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धमकी का मामला और पुलिस का बयान

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि किसी ने एसईएम को प्रभावित करने की कोशिश की। ऐसे में धमकी भरे माहौल में वे कैसे सुनवाई कर सकते थे, इसलिए उन्होंने खुद को अलग कर लिया। सीजेपी की तरफ से दलील दी गई कि कथित धमकी एक अलग शिकायत है। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जांच करे, ताकि पता चल सके कि एसईएम का नंबर किसी सीजेपी सदस्य के फोन से शेयर हुआ था या नहीं। मजिस्ट्रेट ने यह सुझाव स्वीकार नहीं किया।

सीजेपी का आरोप

सीजेपी का कहना है कि जमानत सुनवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। रत्ना सिंह ने बताया कि चार जमानतदारों को अस्पष्ट आधार पर खारिज कर दिया गया। एडवोकेट अभिष्ट हेला ने कहा कि सुनवाई स्थगित करने के लिए कोई खास कानूनी प्रावधान नहीं बताया गया। फैसला मुख्य रूप से न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता के आधार पर लिया गया।

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