देहरादून: देवभूमि के हिमालय क्षेत्र में तीन युवाओं के रहस्यमय तरीकों से गायब हो जाने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। क्या ये लोग अपनी मर्जी से कहीं चले गए हैं या फिर दुर्घटना का शिकार हो गए हैं?
दो सप्ताह के सर्च अभियान में नहीं चल रहा पता
खास बात ये कि दो हफ्तों से चल रहे सर्च ऑपरेशन में खोजी दस्ते इनका कोई सुराग नहीं ढूंढ सके हैं। जबकि इनकी खोज में हेलीकॉप्टर, ड्रोन पैदल दस्ते, ट्रेकर्स भी लगे हुए हैं। उत्तरकाशी में दायरा बुग्याल में लापता हुई रामनगर निवासी युवती बबिता के बारे में कोई सुराग नहीं है जबकि वो एक अच्छी ट्रैकर भी मानी जाती हैं।
बागेश्वर के पिंडर ग्लेशियर ट्रेकिंग पर निकले यूपी के अभिषेक चौहान का कोई पता नहीं चल पाया है। जबकि फूलों की घाटी में लापता हुए गब्बर सिंह के बारे में भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। दिलचस्प बात ये है कि गब्बर सिंह के विषय में जब उसके आधार कार्ड में दर्ज सूचना के आधार पर उसके घर पर पूछताछ की गई तो मालूम चला कि वो तो पिछले तीन सालों से घर से लापता हैं। गब्बर सिंह फूलों की घाटी में गया और वापिस नहीं लौटा। वो कहां गायब हो गया कोई खबर नहीं।
कई एजेंसियां जांच में जुटी
इन लापता लोगों की तलाश में प्रशासन ने विभिन्न एजेंसियों को लगाया हुआ है यहां तक कि खोजी कुत्तों की भी मदद ली गई है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के ट्रेकर्स, वन विभाग, पुलिस के जवान इस खोज अभियान में जुटे हुए हैं।
स्थानीय लोग ये भी बताते हैं कि कुछ लोग आध्यात्म की तलाश में हिमालय में चले जाते हैं और फिर वापिस नहीं आना चाहते।











