फ्रांस और जर्मनी के बीच छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने का संयुक्त प्लान रुक गया है। इससे भारत और फ्रांस के लिए एक नया मौका खुल गया है। दोनों देश अब मिलकर छठी पीढ़ी का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट विकसित करने पर चर्चा कर रहे हैं। इस साल फरवरी में रक्षा मंत्रियों के स्तर पर शुरुआती बातचीत हो चुकी है।
FCAS प्रोग्राम क्या था?
फ्यूचर कॉम्बैट एय़र सिस्टम (FCAS) की योजना 2017 में फ्रांस और जर्मनी के बीच शुरू हुई थी। इसका मकसद भविष्य का एडवांस्ड लड़ाकू विमान बनाना था। लेकिन एयरबस और दसॉल्ट जैसी कंपनियों के बीच दृष्टिकोण में अंतर के कारण यह प्रोजेक्ट ड्राइंग बोर्ड से आगे नहीं बढ़ सका। अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जर्मनी अपना अलग रास्ता चुन रहा है और जल्द ही नई कंसोर्टियम की औपचारिक घोषणा होने वाली है।
वहीं भारत की बात करें तो वह लंबे समय से अपने स्वदेशी AMCA (Advanced Multirole Combat Aircraft) प्रोग्राम के अलावा किसी विदेशी पार्टनर के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने की तलाश में था। FCAS के बंद होने से यह रास्ता खुल गया है।
इंजन टेक्नोलॉजी और रफाल डील
फ्रांस के साथ एक अलग समझौते के तहत भारत को एडवांस्ड फाइटर जेट इंजन टेक्नोलॉजी भी मिलने वाली है। इसके अलावा $35 बिलियन की डील के तहत फ्रांसीसी रफाल फाइटर जेट्स भारत में ही बनाए जाएंगे, जो भारतीय वायुसेना के लिए होंगे।
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सूत्रों के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स लिखता है, फरवरी में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वोट्रिन के बीच हुई बैठक में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर सहयोग की बात प्रमुखता से हुई थी।
भारत ने दूसरे विकल्प भी देखे
इसके साथ ही भारत ने FCAS के अलावा जापान-इटली-यूके के ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) पर भी तकनीकी चर्चा की थी। लेकिन कई देशों के समूह में मतभेद की आशंका को देखते हुए एक भरोसेमंद सिंगल पार्टनर के साथ काम करना बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
पांचवीं और छठी पीढ़ी का संदर्भ
भारत अभी AMCA प्रोग्राम के तहत अकेले पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित कर रहा है। अमेरिका, चीन और रूस पहले ही पांचवीं पीढ़ी के ऐसे विमान पहले से अपने रणनीतिक मौर्चों पर तैनात हैं, जो ज्यादा स्टेल्थी हैं और पुराने विमानों से भारी हथियार ले जा सकते हैं।
हालांकि, अभी दुनिया में कोई छठी पीढ़ी का फाइटर जेट ऑपरेशनल नहीं है। लेकिन चीन ने कम से कम दो नए प्रकार के एडवांस्ड विमान दिखाए हैं। अमेरिका भी अपने नेक्स्ट जेनरेशन एयर डॉमिनेंस प्रोग्राम के तहत छठी पीढ़ी की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय ने बताया था कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सह-विकास प्रोजेक्ट्स पर नजर रख रहे हैं।












