मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित ‘सेंट एलायसिस स्कूल’ में कार्यरत महिला सफाई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन पर ईसाई मत अपनाने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। पीड़ित महिलाओं की शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हिंदू संगठन भी महिला सफाई कर्मचारियों के समर्थन में प्रशासन से मिले हैं और कन्वर्जन करा रहे लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
नौकरी करनी है तो मतांतरण करना होगा
जिले के मामला माढ़ोताल थाना क्षेत्र स्थित सेंट एलायसिस स्कूल, रिमझा से जुड़ा है। स्कूल में काम करने वाली महिला कर्मचारियों का कहना है कि हाल ही में स्कूल प्रबंधन में बदलाव के बाद उन पर चर्च जाने और ईसाई मत अपनाने का दबाव बनाया जाने लगा।
महिलाओं का आरोप है कि उन्हें साफ शब्दों में कहा गया कि यदि स्कूल में नौकरी जारी रखनी है तो ईसाई रिलीजन स्वीकार करना होगा। जिन्होंने इसका विरोध किया, उन्हें काम से निकाल दिया गया। महिलाओं ने दावा किया कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और परिवार का पालन-पोषण इसी नौकरी से चलता था, लेकिन प्रबंधन ने उनकी मजबूरी नहीं समझी।
नए फादर के आने के बाद बदला माहौल
शारदा विहार निवासी दीपा पटेल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह वर्ष 2024 से स्कूल में सफाई कर्मचारी थीं। उनके अनुसार पहले स्कूल का वातावरण सामान्य था और पूर्व पादरी वाल्टर के समय किसी प्रकार का पांथिक दबाव नहीं था। पीड़िता का आरोप है कि हाल ही में पादरी सोमी जैकब के आने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। उन्होंने महिला कर्मचारियों को बुलाकर चर्च आने के लिए कहा। कुछ कर्मचारियों ने डर के कारण हामी भर दी, लेकिन कुछ महिलाओं ने इनकार कर दिया। इसके बाद उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। जब उन्होंने मतांतरण से मना किया, तो उन्हें काम से हटा दिया गया।
फोन पर बात करने का बना विवाद का कारण
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन ड्यूटी के दौरान वह घर से आए जरूरी फोन पर बात कर रही थीं। इसी बात को लेकर वहां मौजूद एक अन्य महिला कर्मचारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। जब दीपा शिकायत लेकर स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचीं तो उन्हें राहत मिलने के बजाय कथित तौर पर मतांतरण की शर्त मानने को कहा गया। महिला का आरोप है कि प्रबंधन ने स्पष्ट कहा कि यदि स्कूल में काम करना है तो ईसाई बनना होगा, अन्यथा नौकरी छोड़नी पड़ेगी।
12 साल नौकरी करने वाले कर्मचारी को भी निकाला
मामले में सिर्फ महिला कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अन्य कर्मचारियों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। कंटगी निवासी राजेश वाल्मीकि ने बताया कि उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक स्कूल में काम किया। राजेश के अनुसार अप्रैल महीने में परिवार में शादी होने के कारण उन्होंने दो दिन की छुट्टी ली थी। छुट्टी से लौटने पर उन्हें स्कूल गेट पर ही रोक दिया गया। उनका आरोप है कि उनसे कहा गया कि या तो मतांतरण करो या फिर नौकरी छोड़ दो।
विरोध करने पर उन्हें दो महीने का वेतन देकर बाहर कर दिया गया। राजेश का दावा है कि स्कूल प्रबंधन पहले भी कई कर्मचारियों को इसी तरह नौकरी से निकाल चुका है।
पुलिस जांच शुरू, एएसपी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
पीड़ित कर्मचारियों ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, फिर एएसपी कार्यालय पहुंचीं। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और इनकार करने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकालने संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच संबंधित थाना प्रभारी को सौंप दी गई है और जांच के बाद तथ्य सामने आने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है और स्कूल प्रबंधन से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
मामला सामने आने के बाद हिंदू धर्म सेना सहित कई संगठन पीड़ित महिलाओं के समर्थन में उतर आए हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राजपूत ने आरोप लगाया कि शहर के कई मिशनरी संस्थानों में नौकरी के नाम पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन स्कूल के बाहर प्रदर्शन करेगा।

















