बौद्ध पर्यटन के लिए मशहूर देश थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में मुस्लिम भीड़ द्वारा भीड़ के इंसाफ का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है और लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या अब भीड़ का कानून चलेगा? नहीं, नहीं, भारत के कथित उदारवादी लोग यह बहस नहीं कर रहे हैं, यह बहस थाईलैंड के लोग कर रहे हैं।
क्या था मामला?
बैंकॉक में एक रेस्टोरेंट में अचानक से ही 11 मई को हलचल मच गई जब मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग अचानक से वहाँ पर इकट्ठा हो गए। हालांकि, इस मुलाकात का आयोजन यमीलूल मस्जिद समुदाय के अध्यक्ष ने ही किया था। उन्होंने वहाँ पर एक मुस्लिम ट्रांसवुमन लोर को एक मामले पर चर्चा करने के लिए बुलाया था। मगर इस मुलाकात की बात बाहर आते ही मुस्लिमों की भीड़ आ गई और लोग वहाँ पर इकट्ठे होकर लोर के खिलाफ नारे लगाने लगे। लोग लोर से माफी मांगने की बात कर रहे थे।
मगर वे लोग माफी क्यों मांगने की बात कर रहे थे? आखिर क्या किया था ऐसा मुस्लिम ट्रांसवुमन ने? कहा जाता है कि उसने इस्लाम की तौहीन की, या कहें बेअदबी की।
लोर के रहन-सहन से असहज थे इस्लामवादी
दरअसल बैंकॉक आने से पहले लोर नाराठीवत में मुस्लिम समुदाय में ही पला बढ़ा। thethaiger.com के अनुसार वह और उसके कई अन्य ट्रांसजेन्डर दोस्त नियमित ही महिला के रूप में रहते थे और उनका प्रस्तुतीकरण महिला के रूप में था। और इसे लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ सदस्य असहज थे। उनके अनुसार यह सब इस्लाम के अनुकूल नहीं था और इस्लामिक तालीम के यह सब उल्टा था।
और यह विवाद तब शुरू हुआ, जब फ्रीस नामक एक ऑनलाइन यूजर ने लोर और उसके दोस्तों की आलोचना यह कहते हुए की कि उन्हें लड़कियों की तरह कपड़े नहीं पहनने चाहिए और न ही उन्हें लड़कियों की तरह व्यवहार करना चाहिए। यह सब लाइव स्ट्रीमिंग में हो रहा था। सारा फसाद यहीं से शुरू हुआ।
कुरान के अपमान का आरोप लगाया
जब फ्रीस न ऐसा कहा तो यह कहा जाता है कि फ्रीस ने यह सब मजहबी हिदायतों के उदाहरण के साथ कहा। इसके बाद लोर और उसके दोस्तों ने भड़काऊ टिप्पणियाँ कीं। लोर पर यह आरोप है कि लोर ने कुरान की आयतों को अपने अनुसार तोड़ मरोड़ कर पेश किया। उसने लाइवस्ट्रीम में इस तरह से कुरान की आयतों को पेश किया कि उसमें कुत्ते तक का संदर्भ था, जिसके चलते ऑनलाइन ही मुस्लिम समुदाय में गुस्सा फैल गया।
लोग लोर और उसके दोस्तों की आलोचना करने लगे, उन्हें गाली देने लगे और देखते ही देखते यह क्लिप न केवल थाईलैंड बल्कि दूसरे मुल्कों में भी फ़ाइल गई। और सोशल मीडिया पर लोग लोर से माफी मांगने की बात करने लगे, हालांकि उसने इनकार कर दिया।
इसके बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। लोग और विरोध करने लगे। जैसे ही यह आलोचना ऑनलाइन और बढ़ी, वैसे ही बैंकॉक के प्रवेट जिले में यमीलूल मस्जिद समुदाय के अध्यक्ष ने लोर के साथ एक मुलाकात तय की। मगर उस रेस्टोरेंट में देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुट गई और लोग लोर से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग करने लगे। उन्होनें लोर से लाइव स्ट्रीम में की गई टिप्पणियों के लिए माफी की मांग की।
लोर ने माफी की मांग को स्वीकार कर लिया
भीड़ के सामने लोर ने माफी मांगने की शर्त को स्वीकार किया और माफी मांगी, मगर लोगों ने उसे सजा देने के लिए सभी के सामने उसके सिर को गंजा कर दिया। लोगों ने शर्त रखी कि लोर सार्वजनिक रूप से अपने थप्पड़ मारे और साथ ही अपना सिर मूँड़वाए। और स्थितियाँ बदलने लगीं और लोर को बाद में इन मांगों के आगे झुकना ही पड़ा।
लोर ने अपने आप को थप्पड़ भी मारे और उसका सिर भी मूँड दिया गया। पुलिस को जब इस हंगामे की सूचना मिली तो पुलिस ने आकर लोर को उस भीड़ के हाथों से बचाया। हालांकि पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि सजा मिलेगी तो किसे? क्या लोर को सजा मिलेगी या फिर उसका अपमान करने वालों को?
लोग कर रहे बहस
इस घटना को लेकर अब सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। वहाँ की मीडिया भी यही प्रश्न उठा रही है कि आखिर यह सब क्या था? क्या यह मामला इस्लाम की तौहीन का था ट्रांस जेंडर होने का था? क्या यह मामला यह है कि मुस्लिम समुदाय मजहबी रूप से ट्रांसजेन्डर्स के अस्तित्व को मानता ही नहीं है और यह मामला केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला था?
लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि यह तो भीड़ का शासन है। क्या थाईलैंड में भीड़ का शासन है, तो वहीं यह भी लिख रहे हैं कि थाईलैंड को सभी समुदायों के लिए आजादी की रक्षा करनी चाहिए। मजहबी उन्माद को काबू किया जाए। लोगों ने लिखा कि ऐसा तो सऊदी में भी शायद न हो।











