
श्री नरेंद्र मोदी और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी
भाजपा अपने स्थापना काल से संस्थापक श्यामा प्रसाद मुख़र्जी के जन्मस्थल प्रदेश में सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही थी। मतगणना के रुझान अब स्पष्ट बता रहे हैं कि भाजपा अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करती दिख रही है। यह लक्ष्य इतना आसान भी नहीं था। यह सत्ता का नहीं, सभ्यतागत राजनीतिक द्वंद था। भाजपा ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत और तप किया है। भाजपा के लिए सबसे बड़ा पहेली पश्चिम बंगाल ही बना हुआ था, जिसे अब वह हासिल करती दिख रही है।
भाजपा के पश्चिम बंगाल में जीत के कई कारण हैं।
भाजपा बंगाल में शुरुआत से ही हिंदुत्व की पिच पर फ्रंट फुट पर बैटिंग कर रही थी। हिंदुओं को अपने पाले में करने के लिए भाजपा ने कई बड़े कदम उठाए, जो सफल हुए। ममता बनर्जी ने भाजपा को शाकाहारी पार्टी बताकर बंगाल की जनता से दूर करने की कोशिश की तो भाजपा ने खुद को शाक्त परंपरा का वाहक बताकर पेश किया, जिसमें बंगाल में मछली को महाप्रसाद माना जाता है. हिंदी प्रदेशों में जय श्री राम का नारा देने वाली भाजपा ने बंगाल में जय मां काली के नारे के साथ खुद को मजबूती से जोड़ा ताकि वह बंगाली परंपराओं में के साथ अपने को अधिक निकटता से जोड़ सके.
भाजपा ने घुसपैठ के हकीकत से राज्य की जनता को सजग करने का प्रयास किया है. भाजपा ने घुसपैठ को अचानक चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है बल्कि पिछले काफी समय से कई सालों से जब चुनाव दूर था तब भी भाजपा इस मुद्दे पर जनता को अपने साथ लाने का प्रयास करती रही थी. घुसपैठ के मुद्दे पर बंगाल की जनता ने गम्भरीता से समझते हुए खुद ही भाजपा के साथ जुड़ने का निश्चय किया. घुसपैठ के मुद्दे पर असम में भाजपा के सरकार का कामकाज भी पश्चिम बंगाल की जनता को भाजपा के करीब लाया है. घुसपैठ सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि बंगाल के लिए कड़वी और शर्मनाक हकीकत है जिसे कोई भी स्थानीय नागरिक नकार नहीं सकता है.
अन्य राज्यों में एसआईआर के कारण ममता इस मुद्दे पर बौखला गई थीं क्योंकि उन्हें पता था कि अगला नंबर पश्चिम बंगाल का है. बंगाल को समझने और जानने वाले इस तथ्य से भलीभांति अवगत हैं कि अवैध मतदाता किस पार्टी और किस नेता का वोट बैंक हैं. जैसे ही चुनाव आयोग ने इन अवैध मतदाताओं का नाम काटना शुरू किया तृणमूल कांग्रेस पार्टी को दिन में तारे नजर आने लगे. इससे परेशान ममता बनर्जी काला चोगा पहनकर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गई थीं. चुनाव आयोग हिम्मत के साथ डटा रहा और मतदाता सूची के शुद्धिकरण में कोई कमी नहीं रखी. इसका नतीजा यह हुआ कि चुनाव होने से पहले ही ममता बनर्जी के सारे हौसले पस्त हो गए.
यह भी तृणमूल कांग्रेस पार्टी पर भारी पड़ा. बंगाल में नारी शक्ति का सम्मान करते हुए भाजपा ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं के लिए कई सौगातों की घोषणा की. भाजपा ने हर महीने महिलाओं को 3000 रुपये देने का वादा किया जो ममता दीदी की योजना से ठीक दोगुना ज्यादा है. उल्लेखनीय है कि पिछले तीन चुनावों में महिला मतदाता ममता दीदी की बहुत बड़ी ताकत थीं.
आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल और संदेशखाली की वीभत्स घटनाओं की डरावनी यादें आज भी बंगाल की महिलाओं के बीच कायम हैं. इस कारण भाजपा ने संदेशखाली आंदोलन का चेहरा बनी रेखा पात्रा और आरजीकर केस में पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ को अपना उम्मीदवार बनाकर महिला सुरक्षा के लिए एक नया अध्याय लिखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली में वादा किया कि भाजपा सरकार आने पर महिलाओं को रात 2:00 बजे भी घर से निकलने में डर नहीं लगेगा. इसके अलावा भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में महिला सुरक्षा के लिए अलग स्क्वाड बनाने, हर मंडल में एक महिला थाना खोलने और पुलिस में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का ईमानदार प्रयास भी महिलाओं के बीच भाजपा को मतदान करने के लिए प्रेरित किया.
ममता बनर्जी 15 साल से सरकार में हैं और इस दौर में बंगाल हर मामले में अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़ गया है. ममता दीदी भावनात्मक मुद्दों, अपने को प्रताड़ित दिखने की प्रवृति और काफी हद तक सियासी नौटंकी के दम पर चुनाव जीतती रही हैं. वर्तमान में ममता सरकार के 15 साल के कुशासन का आरोप इस बार उनपर भारी पड़ता दिख रहा है.
वर्तमान में ममता बनर्जी देश में सबसे ज्यादा मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली नेत्री हैं. इसमें उन्होंने अखिलेश यादव को भी पीछे छोड़ दिया है. हावड़ा में मुस्लिम इलाके में रामनवमी के जुलूस पर पत्थर फेंके गए तो ममता दीदी पत्थर फेंकने वाले समुदाय का बचाव करते हुए उनके साथ खड़ी नजर आई थीं. इसके अलावा ममता सरकार द्वारा इमामों, मौलवियों, मदरसों पर सरकारी खजाना लुटाया गया. वहीं इसके उलट हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा को ममता बनर्जी ने हमेशा जान-बूझकर नज़रअंदाज करती रहीं.
भाजपा ने अपनी रैलियों में इसे सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार का शासन बताकर ममता सरकार पर सीधा हमला बोला. वैसे भी कटमनी कल्चर की झलक बंगाल की आम जनता अपनी आम दिनचर्या में देख रही है. भर्ती घोटाले के कारण से युवा पहले से ही नाराज थे जो इस बार ममता दीदी को भारी पड़ा.
इसके अलावा बंगाल में नरेंद्र मोदी की जबरदस्त लोकप्रियता है. उत्तरी बंगाल में उनकी रैली में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ देखी गई, जिसने बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया. मोदी जी ने महिला सुरक्षा की गारंटी देकर बंगाल में ममता की राजनीति की जमीन खिसका दी। भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने लगातार दौरे करके बंगाल भाजपा में एकजुटता स्थापित की. इसके साथ ही सूक्ष्म चुनावी प्रबंधन पर भाजपा ने काम किया।