नाशिक के टीसीएस बीपीओ यूनिट में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के आरोपों पर पुलिस ने नौ एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक ने 16 अप्रैल 2026 को मीडिया को बताया कि उनकी जांच सिर्फ इन नौ एफआईआर तक सीमित है। इनमें एक एफआईआर जबरन शादी का वादा करके रेप की है, एक धर्मांतरण की है।
चार महिलाओं ने सिर्फ यौन उत्पीड़न की शिकायत की, जबकि तीन ने यौन उत्पीड़न के साथ-साथ धर्मांतरण का भी आरोप लगाया। कुल सात महिलाएं पीड़ित हैं। सभी एफआईआर 26 मार्च से 3 अप्रैल 2026 के बीच दर्ज हुईं। आरोप है कि कंपनी में अच्छे पदों पर बैठे कुछ लोग अपनी ताकत का गलत फायदा उठाकर महिलाओं को परेशान करते थे। पुलिस को लगता है कि ये आरोपी एक तरह का संगठित गिरोह बना चुके थे, क्योंकि ज्यादातर गिरफ्तार लोग एक-दूसरे के मामलों में जुड़े हुए हैं।
अब तक 7 आरोपियों की गिरफ्तारी
अब तक सात आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें शफी शेख (34), आसिफ अंसारी (22), तौसिफ अत्तर (36), शाहरुख कुरैशी (34), रजा मेमन (35), दानिश शेख (34) और आश्विनी चैनानी शामिल हैं। 16 अप्रैल को आश्विनी चैनानी को भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बाकी छह पहले से ही जेल में हैं। पुलिस एक महिला आरोपी नीदा खान की तलाश कर रही है, जो अभी फरार है।
आरोपियों के कट्टरपंथी संगठनों से लिंक
पुलिस कमिश्नर ने साफ कहा कि मीडिया में जो कुछ रिपोर्ट्स आई हैं, उनमें कट्टरपंथी संगठनों से कथित लिंक का जिक्र है। ऐसे आरोपों की सच्चाई जांचने के लिए उन्होंने स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट (एसआईडी), एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा, “हमारी जांच शुरुआती दौर में है। बिना सबूत के हम कोई दावा नहीं करना चाहते। सबूत इकट्ठा होने के बाद चार्जशीट में कोर्ट के सामने रखेंगे।”
मामला नाशिक शहर पुलिस के पास है और अभी सबूत जुटाने का काम चल रहा है। आरोपी अपनी कंपनी की पोजीशन का इस्तेमाल करके महिलाओं को निशाना बनाते थे, ऐसा पीड़ितों का कहना है। पुलिस इन आरोपों को गंभीरता से ले रही है और आगे की जांच जारी है।











