नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के युद्ध को एक महीने से भी अधिक हो गया है। इस युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर हो रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण एशिया के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई। हालांकि भारत पर इसका असर नहीं पड़ा है और सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई किल्लत नहीं है।
युद्ध की इस घड़ी में भारत कई देशों का संकटमोचन बना है। इन देशों को भारत ने जमकर मदद पहुंचाई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के युद्ध ने ऊर्जा संकट की स्थिति भी पैदा कर दी है। दुनियाभर के देश ऊर्जा बचा रहा हैं ताकि उनके यहां कोई समस्या पैदा न हो। भारत ने इस युद्ध के बीच बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान की जमकर मदद की है। अफगानिस्तान इस वक्त भूकंप और बाढ़ के संकट का सामना कर रहा है। ऐसी स्थिति में भारत ने मदद का हाथ बढ़ाकर उसे संकट से उबारा है।
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बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान को भारत ने पहुंचाई मदद
बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट से 90 फीसदी कच्चा तेल एशिया में आता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका तेल के लिए इस मार्ग पर निर्भर रहते हैं। ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है। हालांकि ईरान ने भारत के साथ अपनी मित्रता को निभाते हुए हिंदुस्तान के जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति दे रखी है। जिससे भारत में तेल और गैस का संकट नहीं हुआ। लेकिन अन्य एशियाई देश इस संकट का सामना कर रहे हैं।
इस संकट में भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका को कई टन ईंधन भेज चुका। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में बताया था कि इन देशों ने हमसे मदद मांगी थी। इस युद्ध के कारण बांग्लादेश की हालत खराब है और वहां गैस की आपूर्ति लगभग ठप है। ऐसे में भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए बांग्लादेश की मदद की है। दरअसल वहां की तारिक रहमान सरकार ने मुसीबत की इस घड़ी में भारत के आगे मदद के हाथ फैलाए थे। जिसके बाद भारत ने भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति बढ़ा दी। इस पाइपलाइन को 2017 में चालू किया गया था। इसका अधिकतर हिस्सा असम की नुमालीगढ़ रिफ़ाइनरी से भेजा जा रहा है।
इस युद्ध ने श्रीलंका को भी हिलाकर रख दिया है। यह देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है। इसका एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है। संकट की इस घड़ी में वहां के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने मार्च के मध्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी और मदद मांगी थी। भारत ने रिएक्ट करते हुए 28 मार्च को तुरंत 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल श्रीलंका भेज दिया। जिसके बाद वहां के राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत का आभार जताया। भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है।











