रूस और यूक्रेन के मध्य 1500 से भी अधिक दिनों से युद्ध से चल रहा है। इसके कारण अमेरिका के साथ ही यूरोपीय देशों ने भी रूसी तेल और गैस पर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन इससे वे खुद भी परेशान हैं और इसी के चलते अब स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने यूरोपीय संघ से रूस से तेल और गैस आयात पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से पैदा हुई ऊर्जा संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
विक्टर ओर्बन से बात के बाद कही ये बात
फिको ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन से फोन पर बात करने के बाद यह बयान दिया। उन्होंने लिखा कि यूरोपीय संघ और खासकर यूरोपीय आयोग को तुरंत रूस से दोबारा बातचीत शुरू करनी चाहिए। इससे सदस्य देशों को गैस और तेल की कमी पूरी करने में आसानी होगी। वे चाहते हैं कि सभी स्रोतों से, जिसमें रूस भी शामिल है, सप्लाई शुरू हो सके। उन्होंने इन प्रतिबंधों को “बेतुका” बताया और कहा कि ड्रुज्बा पाइपलाइन को फिर से चालू करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए अलग से यूरोपीय संघ की पहल होनी चाहिए। फिको और ओर्बन दोनों ही यूरोपीय संघ में रूस से संबंध बनाए रखने वाले अलग-थलग नेता माने जाते हैं।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला शुरू किया था। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई रुक गई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा तेल सप्लाई संकट बताया है। तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे यूरोप में ऊर्जा की समस्या और गंभीर हो गई है। अहम बात ये भी है कि हंगरी के राष्ट्रपति विक्टर ओर्बन पहले भी रूस के तेल और गैस पर से प्रतिबंध हटाने की मांग करते रहे हैं।
ज़ेलेंस्की ने तुर्की के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाया
उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने शनिवार को इस्तांबुल में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयिप एर्दोगन से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने तुर्की के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की घोषणा की। ज़ेलेंस्की ने टेलीग्राम पर लिखा कि यूक्रेन तुर्की को अपनी विशेषज्ञता, तकनीक और युद्ध अनुभव दे सकता है। एर्दोगन ने कहा कि तुर्की यूक्रेन और रूस के बीच शांति वार्ता का समर्थन जारी रखेगा।

















