खाड़ी युद्ध के बीच ईरान ने बंद किए गए होर्मुज स्ट्रेट को कुछ देशों के लिए खोलने की अनुमति दे दी है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अपने देश की स्टेट टीवी पर कहा कि हमने कुछ दोस्ताना देशों को इस स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दे दी है। इनमें चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं।
हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि हमारे दुश्मनों से जुड़े जहाजों को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह इलाका युद्ध क्षेत्र है, इसलिए दुश्मनों के जहाजों को पास करने का कोई कारण नहीं है।” बता दें कि यह 33 किलोमीटर लंबा संकरा जलमार्ग दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण ऊर्जा चोक पॉइंट है, जहां से तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अभी भी फंसे हैं 20 भारतीय झंडे वाले जहाज
इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अभी स्ट्रेट के पश्चिम की तरफ 20 भारतीय झंडे वाले कार्गो जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से पांच जहाजों में 2.3 लाख टन एलपीजी लदा है। साथ ही 18 खाली एलपीजी टैंकर भी वहां इंतजार कर रहे हैं, जो खाड़ी देशों से खाना पकाने की गैस लोड करने जाना चाहते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अगर ये जहाज आसानी से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच गए तो देश में एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की उपलब्धता बेहतर हो जाएगी। इन जहाजों में से कुछ भारत नहीं बल्कि दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए भी हैं।
भारत इस सूची में शामिल होना थोड़ा आश्चर्यजनक रहा। ईरान रूस और चीन को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ अपने साथी मानता है। पाकिस्तान और इराक भी इस्लामिक देश हैं। पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
भारत की कूटनीति का दिखा दम
भारत की तरफ से इस मुद्दे पर कूटनीति काम करती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान से दो बार बात की थी। मोदी ने स्ट्रेट को बंद करने को स्वीकार्य नहीं बताया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष अरागची से संपर्क किया था। भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत खाना पकाने की गैस (एलपीजी) आयात करता है। इसमें से 85-90 प्रतिशत खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई से आता है। सामान्य दिनों में हर महीने 27-30 एलपीजी टैंकर आते हैं।
इस वक्त सरकार अमेरिका, अर्जेंटीना, नॉर्वे, कनाडा और रूस से भी गैस मंगवा रही है। कुछ कार्गो दूसरे रास्तों से आ चुका है। पिछले हफ्ते दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंच गए। इस हफ्ते पाइन गैस और जग वसंत के पहुंचने की उम्मीद है। युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट से आवाजाही बहुत कम हो गई है। मार्च के पहले 23 दिनों में सिर्फ 138 जहाज गुजरे, जिनमें 87 तेल और गैस टैंकर थे। यानी रोजाना सिर्फ 5-6 जहाज। यह युद्ध से पहले की तुलना में 95 प्रतिशत कम है। आसपास के इलाके में 1900 से ज्यादा जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं।












