भारत में पिछले कुछ वर्षों में बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां बेटियों को बोझ माना जाता था, वहीं अब सरकार और समाज दोनों मिलकर उन्हें आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसी सोच के तहत केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं। इन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, जिसका उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक मदद देना है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बन सके।
बेटियों के लिए आर्थिक सहयोग- इस योजना की शुरुआत अक्टूबर 2019 में की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच बनाना, बाल विवाह रोकना, भेदभाव कम करना और शिक्षा को बढ़ावा देना है। पहले इस योजना के तहत कुल 15,000 रुपये दिए जाते थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है, ताकि ज्यादा परिवारों को फायदा मिल सके।
छह चरणों में दी जाने वाली सहायता राशि- इस योजना में सहायता राशि एक साथ न देकर बेटी के जीवन के अलग-अलग महत्वपूर्ण पड़ावों पर छह चरणों में दी जाती है। पहले चरण में जन्म के समय, दूसरे चरण में एक साल का टीकाकरण पूरा होने पर, तीसरे में कक्षा 1 में दाखिले पर, चौथे में कक्षा 6 में प्रवेश पर, पांचवें में कक्षा 9 में एडमिशन पर और छठे चरण में 12वीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन या दो साल के डिप्लोमा कोर्स में दाखिले पर अंतिम किस्त दी जाती है। सभी किस्तें सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
इस योजना का लाभ केवल उत्तर प्रदेश के निवासी परिवार ही ले सकते हैं। परिवार की सालाना आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को ही इसका लाभ मिलता है। विशेष स्थिति में, जैसे जुड़वा बेटियां होने पर तीसरी बेटी को भी शामिल किया जाता है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर जाकर सिटीजन सर्विस पोर्टल से रजिस्ट्रेशन किया जाता है। आधार नंबर और मोबाइल नंबर से ओटीपी सत्यापन करने के बाद लॉगिन आईडी मिलती है। इसके बाद बच्ची का रजिस्ट्रेशन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। यह योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सराहनीय कदम है।












