यूरोपीय यूनियन की पार्लियामेंट ने एक चौंकाने वाले कदम के दौरान महिलाओं के हितों और अधिकारों पर एक असंवेदनशील रेसोल्यूशन पारित किया है। यूरोपीय पार्लियामेंट ने स्पेनिश सांसद लीना गलवेज द्वारा लिखी गई रिपोर्ट को अपनाया है, जिसमें यह कहा गया है कि ट्रांस महिलाएं पूरी तरह से महिलाएं ही होती हैं।
जेंडर इक्वालिटी के नाम पर विवाद
यह कदम यूएन’स कमिशन ऑन द स्टेटस ऑफ वुमन की आने वाली जेन्डर इक्वालिटी नीतियों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। यह और भी परेशान करने वाली बात है कि जैविक महिलाओं के अधिकारों और यह कुठाराघात महिलाओं के अधिकारों के नाम पर किया गया है।
महिला की परिभाषा पर प्रश्न
यह बात पूरी तरह से सत्य है कि महिला मात्र वही हो सकती है जो गर्भ धारण करे, जो बच्चों को जन्म दे पाए और जिसके भीतर गर्भाशय है। परंतु क्या होगा, जब पुरुष प्रजनन अंग वाले लोग भी खुद को महिला कहकर महिलाओं के स्पेस में आएंगे?
मत विभाजन का चौंकाने वाला परिणाम
यूरोपीय यूनियन की पार्लियामेंट में जब इस प्रस्ताव पर बहस हुई कि क्या जैविक महिलाएं ही केवल गर्भवती हो सकती हैं तो इसका परिणाम भी चौंकाने वाला था। 200 लोगों ने इसके पक्ष में मत किया और 233 के इसके खिलाफ।
https://x.com/BasilTheGreat/status/2022282260569813122
महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
यह किसी भी विश्वास से परे है कि यूरोप भर के नेता, जिनमें महिलाएं भी बहुतायत में हैं, वे महिलाओं के अधिकारों पर इस सीमा तक आघात करें और साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को दांव पर लगा दें। समानता के नाम पर महिलाओं के अस्तित्व को ही समाप्त करने का षड्यन्त्र रच दिया गया है।
रिपोर्ट में क्या लिखा गया है
समानता के नाम पर यूरोपीय यूनियन ने जिस रिपोर्ट को पारित किया है, उसमें लिखा है कि
““ट्रांस महिलाओं को महिला के तौर पर पूरी पहचान देने की अहमियत पर ज़ोर देते हैं, यह बताते हुए कि किसी भी जेंडर-इक्वलिटी और एंटी-वायलेंस पॉलिसी के असर के लिए उनका शामिल होना ज़रूरी है; ट्रांस महिलाओं को सुरक्षा और सपोर्ट सर्विस देने और उनकी बराबर पहुँच की मांग करते हैं;”
महिलाओं के कानूनी अस्तित्व का प्रश्न
इन्होनें अब महिलाओं की परिभाषा में जैविक पुरुषों को भी सम्मिलित कर लिया है। क्या महिलाओं के लिए नीतियाँ बनाते समय अब इन कथित महिलाओं का ध्यान सबसे पहले रखा जाएगा? यह एक प्रकार से महिलाओं के कानूनी अस्तित्व को समाप्त करना है।
महिला होने की परिभाषा पर बहस
या फिर कहें कानूनी से भी बढ़कर महिला होने की परिभाषा को ही समाप्त करना है। महिलाओं के लिए जब नीतियाँ बनती हैं, तो उनमें यही लक्ष्य होता है कि महिलाओं की रक्षा आपराधिक प्रवृत्ति से की जाए। परंतु जब जैविक महिला होने को ही अपराध ठहरा दिया जाएगा और यह कहने पर कि मात्र जैविक महिलाएं ही बच्चे पैदा कर सकती हैं, को अपराध ठहरा दिया जाएगा तो इसमें कौन सी प्रवृत्ति आपराधिक होगी और कौन सी सामान्य?
जैविक पुरुषों को कानूनी महिला का दर्जा
जैविक पुरुषों को कानूनी रूप से महिला ठहरा दिया गया है।
यूरोप में महिलाओं की सुरक्षा पर संकट
क्या यह महिलाओं की पीठ पर छुरा भोंकने जैसा कदम नहीं है? क्या जिस समय यूरोप में महिलाओं के साथ ग्रूमिंग गैंग्स की घटनाएं सामने आ रही हैं, और लड़कियों की रक्षा उनसे करने के लिए नीतियाँ या कानून बनने चाहिए थे, उस समय महिलाओं के कानूनी अधिकारों को ही पूरी तरह से उनसे छीन लिया गया है।
महिलाओं का अस्तित्व कठघरे में
महिलाओं को इस रिपोर्ट के माध्यम से मझधार में छोड़ दिया गया है। महिला होने को ही कठघरे में खड़ा करके उनसे उनका जैविक अस्तित्व ही छीन लिया गया है। क्या इससे अपराधियों की संख्या नहीं बढ़ेगी? जैविक महिला पर कोई भी ट्रांस महिला कभी भी किसी प्रकार का हमला कर सकती है, मगर यदि महिला इसकी शिकायत भी नहीं कर पाएगी। क्योंकि जैविक महिला को ट्रांसोफोबिया से ग्रसित ठहराया जाएगा।
उपलब्धियों पर संकट
उनसे उनकी उपलब्धियों को छीन लिया जाएगा, जैसा कि अभी हो रहा है।
सार्वजनिक स्थानों को लेकर आशंका
जरा कल्पना करें उस दृश्य की जब बिना सर्जरी कराए हुए और पुरुष प्रजनन अंग वाले लोग कथित रूप से महिला बनकर महिलाओं के वाशरूम, महिलाओं के चेंजिंग रूम्स मे जाएंगे? यह सब भय से भरने वाला है, परंतु इस भय को कम करने वाले लोग ही इस भय को जन्म देने वाले हैं। क्या इससे यह साबित नहीं हुआ कि पश्चिम का समाज अभी भी महिलाओं के प्रति भेदभाव से भरा हुआ समाज है?
इतिहास की पुनरावृत्ति का प्रश्न
क्या पहले जो महिलाओं को परदे में बंद करने की कुप्रथा पूरे मध्यकालीन यूरोप में थी, वही एक नए रूप में सामने नहीं आ रही है? जब महिलाओं के अस्तित्व को ही समाप्त करके परदे में कर दिया जाएगा अर्थात यह वे लोग साबित ही नहीं कर पाएंगी कि वे महिला हैं।
महिला द्वेष का आरोप
जैविक पुरूषों को जैविक महिलाओं पर प्राथमिकता देना, महिला द्वेष का सबसे बड़ा उदाहरण है। महिलाओं के अस्तित्व से घृणा का सबसे बड़ा उदाहरण है। महिलाओं के खेलकूद, महिलाओं की सौन्दर्य प्रतियोगिताएं, महिलाओं के कार्यस्थान ये सभी पर डाका है। और सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि यह सब महिला समानता के नाम पर हो रहा है, और यह सब महिला अधिकारों के परदे में हो रहा है।
महिला अधिकारों का आवरण
आवरण है महिला अधिकारों का और छीने जा रहे हैं, महिलाओं से अधिकार। इस रिपोर्ट के पारित होते ही यूरोपीय महिलाओं के खिलाफ ऐसा फरमान पारित हो गया है, जो उन्हें पर्दे में ही बंद नहीं करेगा, अपितु वे लोग अपने साथ होने वाले अपराधों की रिपोर्ट भी नहीं कर पाएंगी।














