जब से डोनाल्ड ने वेनेजुएला को घेरना शुरू किया था, तभी से पूरी दुनिया ये कह रही थी कि ड्रग्स तो बहाना है, असल मक्सद तेल पर कब्जा करना है। हुआ भी वही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद खुले तौर पर ऐलान कर दिया कि वो वहां के तेल पर कब्जा करेंगे। ट्रंप ने देश की तेल की बड़ी कंपनियों को वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए कहा है। ताकि वे पुराने कर्ज और जब्त की गई संपत्तियों का मुआवजा वापस पा सकें।
क्या है पूरा मामला?
2000 के दशक में वेनेजुएला की सरकार ने, तब के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज के समय, कई अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों की संपत्तियां जब्त कर ली थीं। वजह ये थी कि कुछ कंपनियां राज्य की तेल कंपनी PDVSA को ज्यादा कंट्रोल देने को तैयार नहीं हुईं। जिन कंपनियों ने मना किया, उनकी एसेट्स छीन ली गईं।
कुछ कंपनियां जैसे शेवरॉन ने समझौता कर लिया और PDVSA के साथ जॉइंट वेंचर में काम जारी रखा। लेकिन एक्सॉन मोबिल और कॉनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियां बाहर निकल गईं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अरबिट्रेशन में केस दायर किए। एक्सॉन मोबिल करीब 1.65 अरब डॉलर का क्लेम कर रही है, जबकि कॉनोकोफिलिप्स का क्लेम और भी बड़ा है – लगभग 12 अरब डॉलर। ये रकम शावेज काल में हुई नेशनलाइजेशन से जुड़ी है।
अमेरिका का नया रुख
अभी हाल के हफ्तों में व्हाइट हाउस और स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारी अमेरिकी तेल कंपनियों के एग्जीक्यूटिव्स से मिले। उन्होंने साफ कहा कि अगर कंपनियां वेनेजुएला में जब्त हुई संपत्तियों का मुआवजा चाहती हैं, तो उन्हें जल्दी से वहां वापस जाना होगा और तेल इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा करने के लिए भारी पूंजी लगानी होगी।
खास बात ये है कि ये निवेश कंपनियों को खुद करना होगा – सरकार की तरफ से कोई सीधा फंडिंग नहीं मिलेगी। यानी कंपनियां पहले पैसा लगाएंगी, इंडस्ट्री को ठीक करेंगी, उसके बाद ही पुराने क्लेम्स पर बात आगे बढ़ेगी। ये शर्त ऐसे समय में रखी गई है, जब निकोलस मदुरो को अमेरिकी फोर्सेस ने कैप्चर कर लिया और सत्ता से हटा दिया।
ट्रंप का बयान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला में वापस जाने और वहां के तेल सेक्टर को फिर से चलाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियां वहां खर्च करने को तैयार हैं ताकि तेल का उत्पादन फिर से शुरू हो। ये बयान मदुरो के हटाए जाने के कुछ घंटों बाद आया। ट्रंप पिछले महीने से ही वेनेजुएला के जब्ती वाले मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं, खासकर जब उन्होंने सैंक्शन्ड ऑयल टैंकरों पर ब्लॉकेड लगाया था।
कंपनियों की प्रतिक्रिया
कॉनोकोफिलिप्स ने रॉयटर्स को बताया कि वो वेनेजुएला में हो रहे बदलावों पर नजर रखे हुए है और ये देख रही है कि इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर क्या असर पड़ता है। कंपनी ने कहा कि अभी किसी भी भविष्य के बिजनेस या निवेश पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। एक्सॉन मोबिल ने रविवार तक कोई कमेंट नहीं किया।
वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री की हालत
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रिजर्व्स में से एक हैं, लेकिन उत्पादन बहुत गिर गया है। 1970 के दशक में ये देश रोजाना 3.5 मिलियन बैरल तक तेल निकालता था, जो उस समय ग्लोबल सप्लाई का 7% से ज्यादा था। लेकिन मिसमैनेजमेंट, कम निवेश और अमेरिकी सैंक्शन्स की वजह से अब उत्पादन 1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन के आसपास रह गया है – यानी ग्लोबल उत्पादन का सिर्फ 1%।
निवेश की चुनौतियां
अगर कंपनियां वापस भी आती हैं, तो उत्पादन में बड़ा उछाल आने में सालों लग सकते हैं। वहां इंफ्रास्ट्रक्चर खराब हालत में है, सिक्योरिटी की समस्या है, कानूनी ढांचा अनिश्चित है। अमेरिकी ऑपरेशन से मदुरो को हटाने की वैधता पर भी सवाल हैं, और लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बना हुआ है। कंपनियों को ये सब देखकर फैसला करना होगा कि रिस्क लेना सही है या नहीं।












