कट्टरपंथी तत्वों की कठपुतली बने Bangladesh ने Hindu दमन से किया इंकार, कहा-'यह India का दुष्प्रचार'
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कट्टरपंथी तत्वों की कठपुतली बने Bangladesh ने Hindu दमन से किया इंकार, कहा-‘यह India का दुष्प्रचार’

बयान में इस बात पर 'चिंता' जताई गई है कि भारत 'इक्का-दुक्का हुईं आपराधिक घटनाओं को हिंदुओं के सुनियोजित उत्पीड़न के रूप में पेश' करने की कोशिश कर रहा है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Dec 29, 2025, 12:18 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
अमेरिका में हिन्दुओं ने प्रदर्शन कर बांग्लादेश के हिन्दू समाज की सुरक्षा की मांग की (फाइल चित्र)

अमेरिका में हिन्दुओं ने प्रदर्शन कर बांग्लादेश के हिन्दू समाज की सुरक्षा की मांग की (फाइल चित्र)

बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस की सरपरस्ती और कट्टर मजहबियों के दखल से इस वक्त पूरी तरह जिन्ना के इस्लामी देश की तर्ज पर चल रहा है। पांचजन्य का शुरू से रहा यह कहना सही साबित होता दिख रहा है। अब बांग्लादेश के सरकारी बयान पाकिस्तान की तरह ही सच से मुंह मोड़ने वाले और गुमराह करने वाले दिखते हैं। इस्लामवादियों की जकड़ में जा चुके बांग्लादेश में हिन्दू उत्पीड़न की लगातार हो रहीं घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने आपत्ति जताई थी और यूनुस सरकार से इन्हें काबू करने की अपील की थी। उसके जवाब में वस्तुस्थिति से मुंह मोड़ते हुए ढाका की ओर से कल जारी हुए बयान ने दिखा दिया है कि कट्टर उन्मादियों के इशारे पर चल रही यूनुस सरकार पाकिस्तानी नेताओं की तरह ही लापरवाह और अक्खड़ होती जा रही है। बांग्लादेश के विदेश विभाग द्वारा जारी बयान में उस इस्लामी देश ने अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिन्दुओं की चिंताजनक स्थिति पर भारत की टिप्पणियों को खारिज किया है।

बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस की सरपरस्ती और कट्टर मजहबियों के दखल से इस वक्त पूरी तरह जिन्ना के इस्लामी देश की तर्ज पर चल रहा है (File Photo)

ढाका में बांग्लादेश के विदेश विभाग की ओर से प्रवक्ता एस.एम. महबूबुल आलम द्वारा जारी बयान में इस बात पर ‘चिंता’ जताई गई है कि ‘इक्का—दुक्का हुईं आपराधिक घटनाओं को हिंदुओं के सुनियोजित उत्पीड़न के रूप में पेश’ करने की भारत कोशिश कर रहा है। यूनुस सरकार के विदेश विभाग ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति के बारे में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा पिछले दिनों की गई टिप्पणियों को सिरे से ही खारिज नहीं किया है बल्कि यहां तक कहा है कि ये टिप्पणियां जमीनी हकीकत नहीं दर्शाती हैं।

बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ‘भारत की ये टिप्पणियां गलत हैं और चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।’ विज्ञप्ति कहती है कि ‘बांग्लादेश ऐसे किसी भी बयान को सिरे से खारिज करता है जो देश की सांप्रदायिक सद्भाव की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को गलत तरीके से पेश करता है।’

बांग्लादेश के विदेश विभाग के प्रवक्ता एस.एम. महबूबुल आलम

हैरानी की बात है कि इस बयान में इस बात पर ‘चिंता’ जताते हुए कहा गया है कि ‘भारत की ओर से बांग्लादेश में हुईं छिटपुट आपराधिक घटनाओं को हिंदुओं के संगठित उत्पीड़न के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। भारत के कुछ हिस्सों में बांग्लादेश विरोधी भावनाएं फैलाने के लिए ऐसे बयानों का इस्तेमाल करने की एक व्यवस्थित कोशिश देखने में आ रही है।’

बांग्लादेश का कहना है कि ‘कुछ लोग चुनिंदा घटनाओं को प्रचारित कर रहे हैं और उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहे हैं ताकि आम भारतीयों को बांग्लादेश, उसके राजनयिक मिशनों और भारत में संस्थानों के खिलाफ भड़काया जा सके।’

मंत्रालय ने आगे कहा कि ‘भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा जिस व्यक्ति का जिक्र किया गया था, वह एक लिस्टिड क्रिमिनल था जिसे एक मुस्लिम सहयोगी के साथ जबरन वसूली की कोशिश के दौरान मार दिया गया, जिसे गिरफ्तार भी किया गया था। घटना को अल्पसंख्यक से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश करना न केवल गलत था, बल्कि गुमराह करने वाला भी था।’

बांग्लादेश में हिन्दू उत्पीड़न की घटनाएं लगातार हो रही हैं (File Photo)

और तो और, इस्लामवादी तत्वों की कठपुतली बनी यूनुस सरकार भारत को ‘संयम बरतने’ का ज्ञान दे रही है। उनके विदेश मंत्रालय ने ‘भारत में विभिन्न लोगों से गुमराह करने वाले बयान फैलाने से बचने का आग्रह किया जो अच्छे पड़ोसी संबंधों और आपसी विश्वास को कमजोर करते हैं।’ इस बयान से पहले, यूनुस की अंतरिम सरकार ने कहा था कि ‘पुलिस की जानकारी और शुरुआती जांच से पता चलता है कि विचाराधीन घटना सांप्रदायिक प्रकृति की नहीं थी।’

बांग्लादेश की मानें तो ‘मृतक, जिसकी पहचान शीर्ष अपराधी अमृत मंडल उर्फ ​​सम्राट के रूप में हुई है, कथित तौर पर जबरन वसूली का पैसा मांगने के लिए इलाके में गया था और स्थानीय निवासियों के साथ झड़प के दौरान मारा गया।’ इसी बयान में आगे कहा गया है कि ‘उस पर 2023 में दर्ज हत्या और जबरन वसूली सहित कई गंभीर मामलों में आरोप थे, और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी थे।’

यही यूनुस सरकार बीच बीच में ऐसे बयान भी देती रही है कि ‘हिन्दुओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ ऐसे बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिखाने के लिए दिए जाते हैं, घड़ियाली आंसू बहाए जाते हैं, लेकिन कट्टरपंथी तत्वों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाती। सरकार यह तो कहती रही है कि वह भीड़ की हिंसा या कानून को हाथ में लेने का समर्थन नहीं करती है, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ होता नहीं दिखता।

बांग्लादेश के आज के सभी प्रमुख अखबारों ने विदेश विभाग की यह विज्ञप्ति प्रमुखता से छापी है। ‘ढाका ट्रिब्यून’ और ‘प्रोथोम आलो’ में पहले पन्ने पर छापी इस खबर में विज्ञप्ति की अधिकांश बातों को ज्यों का त्यों छापा गया है। हालांकि यह बात भी सच है कि जिस प्रकार कट्टरपंथी तत्वों ने वहां मीडिया को निशाना बनाया है, उसे देखते हुए वहां के अखबार खुलकर सच छापेंगे, इसकी संभावना कम ही दिखती है। पत्रकार और संपादक अंदर से घबराए हुए हैं।

‘प्रोथोम आलो’ के संपादक ने तो एक न्यूज चैनल पर यहां तक स्वीकारा था कि ‘उनके पत्रकार शहर में निकलने से घबरा रहे हैं, सब 24 घंटे से अखबार के दफ्तर के अंदर ही जमा हैं।’

यूनुस सरकार भारत सरकार को ‘चेतावनी’ दे रही है कि ‘इस तरह का प्रचार सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति को खराब कर सकता है, इसलिए सभी संबंधित लोग जिम्मेदारी से काम करें और गुमराह करने वाले, भड़काऊ या सांप्रदायिकता फैलाने से बचें।’

यानी कुल मिलाकर जिन्ना के देश की ही तरह बांग्लादेश ने भी सच को अनदेखा करके अपने कट्टरपंथी एजेंडे को ही आगे बढ़ाने की सोच दिखाई है। अब यह छुपा सच भी उघड़ता जा रहा है कि यूनुस की सरकार कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के दिखाए रास्ते पर चलते हुए हिन्दुओं और भारत से व्यवहार कर रही है।

 

Topics: ISIBangladeshबांग्लादेशdhakaIndiaयूनुसyunusViolence against HindusHindu Lives Matterपाकिस्तानPakistan
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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