भारतीय शेयर बाजार नियामक सेबी ने फाइनेंशियल इन्फ्लूएंसर अवधूत साठे और उनकी कंपनी पर कार्रवाई करते हुए, उन्हें शेयर बाजार में किसी भी तरह की गतिविधि करने से रोक दिया है। सेबी ने यह भी आदेश दिया है कि अवधूत साठे और उनकी कंपनी को 601.37 करोड़ रुपये वापस करने होंगे, जिसमें ब्याज भी शामिल है। यह बड़ी रकम उन्होंने 3.37 लाख से ज्यादा निवेशकों से इकट्ठा की थी। जांच में पाया गया कि साठे और उनकी अकादमी बिना किसी वैध पंजीकरण के निवेश सलाह दे रहे थे, जो कानूनी रूप से गैरकानूनी है।
शिक्षा के नाम पर निवेश धोखाधड़ी का आरोप- सेबी के अनुसार, अवधूत साठे अपने शेयर बाजार प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने छात्रों को विशेष शेयरों में ट्रेडिंग करने और खरीद-बिक्री की सलाह देने के लिए उकसाया। लेकिन यह सब उन्होंने ‘शिक्षा’ के नाम पर किया, जबकि असल में यह एक निवेश योजना थी। इस योजना के तहत जमा किया गया पैसा सीधे साठे और उनकी कंपनी के खातों में जमा हो रहा था। सेबी की जांच जुलाई 2017 से अक्टूबर 2025 तक की गई। इस दौरान पाया गया कि साठे और एएसटीएपीएल गुमराह करने वाली जानकारी दे रहे थे। उन्होंने अपने छात्रों और अन्य निवेशकों को यह भरोसा दिलाया कि उनकी सलाह पर ट्रेड करने से हमेशा मुनाफा होगा। लेकिन असलियत में यह जानकारी सटीक या वैध नहीं थी।
भ्रामक प्रचार पर सेबी की सख्त रोक- जांच में यह भी सामने आया कि साठे और उनकी अकादमी अपने कोर्स का विज्ञापन केवल सफल ट्रेड्स दिखाकर करते थे। वे दावा करते थे कि उनके सभी छात्र लगातार बड़े मुनाफे कमा रहे हैं। यह प्रचार केवल लोगों को कोर्स में शामिल करने और निवेश करने के लिए किया जा रहा था। सेबी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अवधूत साठे और उनकी अकादमी को किसी भी तरह की निवेश सलाह देने या रिसर्च सेवाएं प्रदान करने से रोक दिया है। इसके साथ ही उन्हें अपने छात्रों के पिछले प्रदर्शन या मुनाफे का विज्ञापन करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। अब वे अपने कोर्स या शिक्षण कार्यक्रमों में लाइव मार्केट डेटा का उपयोग भी नहीं कर सकते।
बिना लाइसेंस निवेश सलाह और निवेशकों के हितों को खतरा- सेबी ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि उन्हें डर था कि साठे और उनकी अकादमी और लोगों से पैसे जमा कर सकते हैं, जनता को गुमराह कर सकते हैं और निवेशकों को प्रभावित कर सकते हैं। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम निवेशकों की तुरंत सुरक्षा और वित्तीय हित सुरक्षित रहें। विशेष रूप से, सेबी के आदेश में बताया गया है कि साठे इस पूरी योजना के मुख्य व्यक्ति थे। उन्होंने अपने कोर्स के जरिए निवेशकों को विशेष शेयरों में निवेश के लिए आकर्षित किया और इसके बदले में पैसे लिए। इसका पूरा लाभ सीधे उनकी कंपनी और व्यक्तिगत खातों में गया। सेबी की विस्तृत जांच में यह भी सामने आया कि साठे और उनकी अकादमी कानूनी पंजीकरण के बिना ही निवेश सलाह दे रहे थे। यह निवेशकों के लिए जोखिम भरा था क्योंकि उन्हें सही जानकारी या उचित मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था। इसके बावजूद उन्होंने अपने कार्यक्रमों और कोर्स के जरिए बड़ी संख्या में निवेशकों को प्रभावित किया।

















