हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय आता है, तो ज्यादातर लोग इसे जल्दी-जल्दी पूरा करने की कोशिश करते हैं। कई लोगों को लगता है कि फॉर्म भर दिया तो काम खत्म हो गया। लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है। ITR भरना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जरा सी भी गलती आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है। इसलिए रिटर्न फाइल करते समय हर जानकारी को ध्यान से भरना बेहद जरूरी है। आजकल आयकर विभाग के पास सभी लेनदेन की डिजिटल जानकारी मौजूद रहती है। बैंक ट्रांजैक्शन से लेकर टीडीएस (TDS) और इन्वेस्टमेंट तक, हर रिकॉर्ड ऑनलाइन ट्रैक किया जाता है। ऐसे में छोटी-सी गलती भी पकड़ी जा सकती है, और यदि गड़बड़ी सामने आई तो आपको इनकम टैक्स नोटिस भी मिल सकता है।
ITR में होने वाली आम गलतियां- गलत PAN नंबर भरना, PAN नंबर में एक छोटा-सा अंक गलत होने पर आपकी पूरी जानकारी गलत हो सकती है। इससे टैक्स क्रेडिट सही तरह से मैच नहीं होता। इनकम या इनकम कैटेगरी गलत दर्ज करना, जैसे वेतन वाली इनकम को बिजनेस इनकम की कैटेगरी में डाल देना। TDS या 26AS स्टेटमेंट न मिलान करना। कई लोग TDS की जानकारी बिना चेक किए भर देते हैं, जिससे टैक्स कैलकुलेशन गलत हो सकता है। बैंक अकाउंट संबंधी गलतियां, अकाउंट नंबर, IFSC कोड गलत बैठने पर रिफंड अटक सकता है। गलत सेक्शन में डिडक्शन (कटौती) क्लेम करना, जैसे- 80C, 80D आदि में गलत एंट्री कर देना। सभी आय न दिखाना, पार्ट-टाइम कमाई, ब्याज आय या किराया आय छिपाना बड़े झमेले का कारण बन सकता है। इन गलतियों को आम लोग छोटी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन आयकर विभाग इन्हें गंभीर मानता है।
नोटिस आने पर क्या करें- कई लोग यह मानकर चलते हैं कि केवल टैक्स चोरी करने वालों को ही नोटिस मिलता है, जबकि ऐसा नहीं है। अगर ITR में किसी प्रकार की गलत जानकारी या mismatch पाया जाता है तो विभाग आपको ई-मेल या आयकर पोर्टल पर डिजिटल नोटिस भेज सकता है। नोटिस में बताया जाता है- कहां गलती मिली है, किस राशि में अंतर है।
सुधार करने की अंतिम तारीख क्या है- नोटिस मिलते ही घबराने की जरूरत नहीं है। आप अपने बैंक रिकॉर्ड, फॉर्म 16, TDS और 26AS की जानकारी मिलान करके गलती सुधार सकते हैं। आजकल पोर्टल पर ऑनलाइन सुधार और जवाब देने की प्रक्रिया काफी आसान है। ज्यादातर मामलों में मामला जल्दी सुलझ जाता है, लेकिन कुछ में अतिरिक्त टैक्स या पेनल्टी भी भरनी पड़ सकती है।
ITR सही तरीके से कैसे भरें- अपनी इनकम का पूरा डेटा इकठ्ठा करें, PAN और आधार की जानकारी की जांच कर लें, TDS और फॉर्म 26AS को मिलान करें, सही ITR फॉर्म चुनें,डिडक्शन और छूट सही सेक्शन में क्लेम करें, बैंक अकाउंट की डिटेल्स दो बार चेक करें, सभी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखें। अगर आपको टैक्स नियमों की जानकारी कम है, तो किसी प्रोफेशनल टैक्स कंसल्टेंट की मदद लें या ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करें जो ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन करता हो।इससे गलती की संभावना काफी कम हो जाती है और आपका रिफंड भी समय पर मिल जाता है।

















