नन की गिरफ्तारी : चर्च की चर्चा और कांग्रेस का अवसरवाद
June 17, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

नन की गिरफ्तारी : चर्च की चर्चा और कांग्रेस का अवसरवाद

दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी पर कांग्रेस पीड़ितों की बजाय आरोपियों के पक्ष में खड़ी हुई, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में राजनीतिक लाभ-हानि का विचार कर आरोपियों के पक्ष में ही कांग्रेस के खड़े हो जाने का जाने का यह पहला मामला भी नहीं है...

Written byपंकज झापंकज झा
Jul 30, 2025, 10:13 pm IST
in विश्लेषण, छत्तीसगढ़

देश भर में कहीं भी महिला या आदिवासी उत्पीड़न का विषय हो, तो समाज से यह अपेक्षा होती है कि वह पीड़ित के पक्ष में खड़ा दिखे न कि आरोपियों की तीमारदारी में लग जाय। न्याय का अपना तकाजा है। नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत तो यह कहता है कि सौ दोषी भले छूट जाय लेकिन किसी एक निर्दोष को दंड नहीं मिलना चाहिए।

तो अदालत भले न्याय को अपनी छलनी में छानें किंतु समाज और संगठनों से आशा यही होती है कि वह पीड़ितों का पक्ष ले, तस्करी या दुष्कर्म आदि जैसे विषयों पर आरोपियों का मनोबल नहीं बढ़ाये। दुखद यह है कि अक्सर ऐसे विषयों पर भी कांग्रेस सस्ती और हल्की राजनीति से बाज नहीं आती।

दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पिछले दिनों दुर्ग में दो संदिग्ध महिला को गिरफ्तार किया गया, जिस पर आरोप था कि वह प्रदेश की वनवासी बेटियों की तस्करी में संलिप्त है। क्योंकि वे महिलायें ईसाई मिशनरी से संबंधित थी, तो आश्चर्यजनक ढंग से देश भर में कांग्रेस, दुनिया भर में दुष्प्रचार करने जुट गयी। आसमान सर पर उठा लिया उसने। संसद तक में प्रदर्शन करने पहुंच गए कांग्रेस के लोग।

हर गिरफ्तारी पर राजनीतिक हंगामा क्यों..?

सोचिए जरा.. प्रदेश के अंतिम छोर के एक धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र से संबंधित अपराध में हुई गिरफ़्तारी पर देश भर में हंगामा मचा देना, यह कौन सी नीति है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार देश भर में रोज तकरीबन 18 हजार मुकदमें दर्ज किए जाते हैं। इन मुकदमों में जघन्य अपराधों से लेकर सामान्य अपराधों के विषय भी शामिल होते हैं। जमानतीय से लेकर गैर जमानतीय तक। हत्या से लेकर बलात्कार और धर्मांतरण तक के। चोरी और डकैती, तस्करी आदि से संबंधित भी।

आप कल्पना कीजिए, अगर ऐसे हर अपराध दर्ज होने के बाद मुख्य विपक्षी कांग्रेस संसद तक को घेरने लगे, उसके तमाम बड़े कहे जाने वाले नेतागण ट्वीट/पोस्ट आदि करने लगे, तो कैसा होगा! कानून-व्यवस्था तक की स्थिति उसके बाद क्या होगी?

राहुल-प्रियंका से अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग?

छत्तीसगढ़ में दो नन की गिरफ्तारी का विषय ऐसा ही है। इस प्रकरण में भी बिना तथ्य जाने कूद कर नतीजे पर पहुंच कर, वनवासी बेटियों के पक्ष में एक शब्द नहीं बोल पाने वाले कांग्रेस के लोगों को सोचना चाहिए कि क्या हर मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर ही अब कोई प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है? या कुछ विशेष संप्रदायों के मामले में यह तय किया जाएगा कि इन संप्रदायों से जुड़े विषयों पर राहुलजी की राय पहले ली जाय? क्या ऐसी कोई व्यवस्था संविधान में है?

न्यायिक प्रक्रिया ही अंतिम रास्ता

तथ्य तो यह है कि हर आरोपी को अंततः विहित व्यवस्था के तहत न्यायिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता ही है। अगर आपको किसी आरोप में निरुद्ध किया गया है, तो न्यायिक व्यवस्था के तहत आपको अपना पक्ष कोर्ट में रखना ही होगा, अगर आप निर्दोष भी हैं तो दोषमुक्ति होने का और कोई उपाय नहीं है। वनवासी लड़कियों की तस्करी जैसे घृणित आरोप में गिरफ्तार अपराधियों के पक्ष में ही खड़े हो कर आप स्वयं को और अधिक अलोकप्रिय ही बनायेंगे।

महिलाओं के विरुद्ध अपराध और कांग्रेस की राजनीति

महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में राजनीतिक लाभ-हानि का विचार कर आरोपियों के पक्ष में ही कांग्रेस के खड़े हो जाने का जाने का यह पहला मामला भी नहीं है। कुछ वर्ष पहले ही जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन नवा रायपुर में हुआ था, वहां कांग्रेस की ही डेलीगेट एक चर्चित दलित नेत्री, जो कांग्रेस प्रत्याशी भी रह चुकी है, ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा के निजी सचिव ने न केवल दलित नेत्री का उत्पीड़न किया बल्कि उसने जातिगत गाली-गलौज आदि भी की थी।

इस आशय का दलित नेत्री ने बाकायदा मुकदमा भी दर्ज कराया था। उस समय भी मामले को दबा दिया गया था और पीड़ित दलित महिला का ही उत्पीड़न होता रहा, वह दर-दर की ठोकर खाती रही लेकिन प्रियंका गांधी के लिए कई किलोमीटर लंबी गुलाबों की पंखुड़ियां बिछाई जाती रही थी। और उन्हीं मोटी पंखुड़ियों के बीच बीच रायपुर में हुए एक अन्य दुष्कर्म (जैसा कि कांग्रेस की एक पूर्व नेत्री ने आरोप लगाया है) की खबरें भी दबा दी गई थी ताकि अधिवेशन खराब न हो। लड़की हूँ लड़ सकती हूँ के नारे के पीछे किस तरह आदिवासी, दलित, महिलाओं की आवाज दबा दी जाती है और आरोपियों/अपराधियों के पक्ष में कांग्रेस खड़ी हो जाती है, उसके उपरोक्त जैसे सैकड़ों उदाहरण आपको मिल जायेंगे।

लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर तस्करी किए जाने अर्थात् ह्यूमन ट्रैफिकिंग विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में एक संगठित अपराध की तरह है। इस पर लगातार सरकारें लगातार कार्रवाई करती ही हैं। आदिवासी जन-जीवन और अस्मिता से जुड़े ऐसी किसी भी लड़ाई को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। पुलिस को अपना काम करने देना चाहिए। पर मामले में ईसाई एंगल आते ही इस तरह कांग्रेस का टूट पड़ना निंदनीय है।

छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी के चिंताजनक आँकड़े

राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े कहते हैं कि सन 2022 में (जब प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी) छत्तीसगढ़ में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के तहत दर्ज मामलों की संख्या लगभग 100 थी। ये मामले मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों की तस्करी से संबंधित थे, जिनमें देह व्यापार, जबरन मजदूरी, और घरेलू काम शामिल हैं। हाल के दिनों में केवल जनवरी-जुलाई 2024 तक, छत्तीसगढ़ पुलिस ने 50 से अधिक तस्करी पीड़ितों को बचाया, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे।

पिछले वर्ष के एक मामले में तो छत्तीसगढ़ पुलिस ने रायपुर में एक अंतरराज्यीय तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया, जिसमें 15 नाबालिग लड़कियों को दिल्ली भेजा जा रहा था। तब भी 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2024 में रायपुर में तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ कर 8 नाबालिग लड़कियों को बचाया गया।

मई 2024 में बस्तर से एक 12 बच्चों को तस्करी से बचाया, जो ईंट भट्टों में काम करने के लिए ले जाए जा रहे थे। इससे पहले सुरजपुर में पुलिस ने सामाजिक संगठनों की सहायता से 10 बच्चों को बचाया, फिर वनवासी समुदायों से युवतियों को नौकरी का झांसा देकर तस्करी करने के कई मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने बाकायदा अभियान चला कर दर्जनों ऐसे संगठित अपराधों का खुलासा किया और पीड़ितों का रेस्क्यू किया। ऐसे अन्य तमाम विषयों की तरह ही इसे भी देखा जाना चाहिए था।

कांग्रेस का तुष्टीकरण और ईसाई मिशनरी एंगल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका वाड्रा समेत दर्जनों कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों के पक्ष में सोश्यल मीडिया पर बयानों की बाढ़ ला दिया। एक बड़े कांग्रेस नेता ने तो बकायदा आरोपियों की सिफारिश करते हुए पत्र तक लिख दिया। संसद में कांग्रेस ने प्रदर्शन तक किया। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक स्थगन प्रस्ताव भी लाने की तैयारी से संबंधित खबर आ रही है।

कांग्रेस को यह ध्यान रखना होगा कि मानव तस्करी का यह कृत्य न केवल बच्चियों को देह व्यापार में धकेलने संगठित रूप से यह किया जा रहा है, बल्कि अंग तस्करी आदि के लिए भी ऐसे घृणित अपराध होने की सूचना है। ऐसे मामलों पर कांग्रेस की बासी कढ़ी में इतना उबाल नहीं आना चाहिए। अन्य विषयों से इसमें विशेषता केवल यह थी कि दोनों आरोपी महिला ईसाई समुदाय से जुड़ी थी और ‘नन’ थी।

तो क्या छत्तीसगढ़ में पुलिस को अब कोई कार्रवाई करने से पहले यह देखना पड़ेगा कि आरोपी कोई ईसाई या मुस्लिम न हो? अगर ऐसे किसी के खिलाफ मुकदमें आदि दर्ज किए गए, तो कांग्रेस इस तरह अपनी समूची ताकत बस्तर की बेटियों का सौदा करने वालों के पक्ष में झोंक देगी? जिस संविधान की बड़ी-बड़ी बात राहुल गांधी करते हैं, क्या वह संविधान ऐसे किसी कृत्य की इजाजत देता है? क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार प्रदेश की सरकार को आखिरकार क्यों केंद्रीय कांग्रेस से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहिए भला?

भूपेश सरकार के समय का मिशनरी समर्थन
कांग्रेस और चर्च के ऐसे गठजोड़ के मामले लगातार आते रहना चिंता की बात है। यह देश के पंथ निरपेक्ष ढांचे पर प्रहार जैसा है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार रहते अनेक ऐसी ही घटनायें हुई जिसमें तब की कांग्रेस सरकार आदिवासियों के उत्पीड़न से संबंधित घटनाओं पर न केवल हाथ पर हाथ धरे बैठे रही थी बल्कि प्रत्यक्ष-परोक्ष समर्थन भी मिशनरियों का किया जाता रहा।

बस्तर में कमिश्नर और एसपी ने अलग-अलग पत्र लिख कर तब की भूपेश बघेल सरकार को ईसाई मिशनरियों में कारण पैदा होने वाले रहे संकट से सावधान किया था। लेकिन कोई सार्थक कदम उठाने के बजाय तब के मुख्यमंत्री पादरियों से दिल्ली में मुलाकात कर आए और बकायदा ट्वीट कर इसकी जानकारी भी साझा की थी। फिर कांग्रेस के ही विधायक ने तब मिशनरियों की सभा लेकर वनवासियों के खिलाफ उनकी लड़ाई में साथ देने का वादा किया था।

उस समय मिशनरियों के मंसूबे इतने बुलंद थे कि राजधानी रायपुर में एक पादरी ने तो संविधान जलाने की धमकी तक दी थी, फिर भी तब की कांग्रेस सरकार न केवल उन तमाम हरकतों के विरुद्ध तटस्थ रही थी, बल्कि प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से उसे हवा भी देती रही थी। सांप्रदायिक तुष्टीकरण के अलावा कोई भी दूसरा तर्क नहीं हो सकता जब ऐसी हरकतों को उचित ठहराया जा सके।

दो संदिग्ध ननों की गिरफ्तारी पर केरल से लेकर दस जनपथ तक का हिल उठना उन्हीं संदेहों को बल देता है, जिसके खिलाफ राष्ट्रवादी संगठन लगातार आवाज उठाते रहते हैं। इससे पहले, भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस द्वारा अराजकता फैलाने की कोशिश हुई थी, लेकिन तब भी कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इतना अधिक नहीं उबला था जितना इस मामले में परेशान दिख रहा है। सवाल यह उठता है कि गिरफ्तार हुई उन ईसाइयों के पास क्या कुछ ऐसे राज हैं, जिसका खुलासा हो जाने पर कांग्रेस आलाकमान आतंकित है? क्या यह गठजोड़ माओवादी आतंक से भी संबंधित होगा? ऐसा संदेह इसलिए भी उत्पन्न होता है क्योंकि बेरहमी से आदिवासियों और गरीबों का कत्ल करने वाले नक्सली कभी भी आदिवासी संस्कृति को समाप्त करने पर आमादा इन मिशनरियों के विरुद्ध कोई भी कदम नहीं उठता। निर्बाध ये धुर माओवाद प्रभावित इलाकों में भी मतांतरण आदि करते रहते हैं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था को बंधक बनाने की कोशिश

बहरहाल। बात चाहे भ्रष्टाचार की हो या तस्करी की, कानून-व्यवस्था का विषय हो या साम्प्रदायिक मतांतरण आदि का। कांग्रेस को असुविधा पैदा करने वाले मुद्दों पर इस तरह न्याय प्रणाली के विरुद्ध वितण्डा खड़ा कर देना, किसी अज्ञात दबाव में समूचे सिस्टम को बंधक बनाने की ऐसी कोशिश नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की दृष्टि में सभी एक हैं। सबको न्यायिक उपचार लेने का अधिकार है। लेकिन इस प्रणाली पर दबाव बनाना, किसी भी अज्ञात आरोपी के पक्ष में स्वयं ही कूद कर नतीजे पर पहुंच जाना। स्वयं ही वकील, अपील और दलील बन जाना अनुचित है।

दुनिया में सबसे अधिक साख वाली भारतीय उदार लोकतांत्रिक प्रणाली पर भरोसा नहीं कर देश भर में गलत तरीके से माहौल बना कर कानून या संविधान को बंधक बनाने की साजिश सफल नहीं होने दी जायेगी। ऐसी गलत परिपाटी से किसी भी राजनीतिक समूह को बचना चाहिए। देश-प्रदेश की जनता ऐसे विषयों को बेहतर जानती है। सूचना विस्फोट के इस जमाने में हंगामा खड़ा कर अब किसी समूह का मकसद नहीं होना चाहिए। आप कुछ समय के लिए सभी को या हमेशा के लिए कुछ समूह को बेवकूफ बना सकते हैं लेकिन हमेशा के लिए समूची जनता को बरगला देना अब संभव नहीं है। कांग्रेस को यह समझना होगा।

Topics: आदिवासी बेटियों की तस्करीकांग्रेस ईसाई मिशनरी समर्थनराहुल गांधी प्रतिक्रियाप्रियंका गांधी बयानमानव तस्करी छत्तीसगढ़बस्तर ह्यूमन ट्रैफिकिंगकांग्रेस पर राजनीति के आरोपमिशनरी और तस्करी मामलेछत्तीसगढ़ नन गिरफ्तारीआदिवासी उत्पीड़न कांग्रेसकांग्रेस पर तुष्टीकरणदुर्ग महिला तस्करी
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

No Content Available
Load More

ताज़ा समाचार

महाराणा प्रताप और आक्रांता अकबर

आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्र चेतना संकल्प सभा : उदयपुर पहुंचे सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत

प्रतीकात्मक चित्र

कानपुर में डेयरी की आड़ में हो रही थी गोकशी, रेहान मुठभेड़ में घायल, तीन गिरफ्तार 

किशाऊ बांध परियोजना के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक करते गृहमंत्री अमित शाह

किशाऊ बांध परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति, अमित शाह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक

पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए पत्रकारों को दिया गया देवर्षि नारद सम्मान

‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हमेशा प्रासंगिक रहेगा: सुनील आंबेकर

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं : भाजपा

कैंची धाम में इस बार आए करीब दो लाख श्रद्धालु

ऐतिहासिक रहा कैंची धाम मेला, 2 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, प्रशासनिक व्यवस्था से मिले सुगम दर्शन

सेना के खिलाफ प्रदर्शन करते पीओजेके के लोग

पीओजेके : दमन से भी नहीं दबा हाैसला

समीक्षा बैठक करते मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम एवं भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार

उत्तराखंड SIR : अनुपस्थित मतदाताओं के घर BLA को साथ ले जाएं BLO, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिया आदेश

मेदिनीपुर में तृणमूल पार्षद सुसमय मुखर्जी गिरफ्तार, जमीन कब्जाने और सरकारी जमीन बेचने का आरोप

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies