आक्रांता औरंगजेब इन दिनों भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस संदर्भ में पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी और लेखक सलमान रसीद ने हाल ही में इस मुद्दे पर बात की। सलमान रसीद ने कहा कि मुगलों को भारतीय नायक नहीं माना जा सकता, क्योंकि वे भारतीय नहीं थे। उनके अनुसार, मुगलों के साथ-साथ खिलजी, तैमूर और गजनी जैसे आक्रमणकारी भी भारत से बाहर के थे और वे केवल लूटने के उद्देश्य से भारत आए थे। रशीद का कहना है कि भारत का नायक वही हो सकता है जो भारतीय धरती से हो।
सलमान रसीद ने तैमूर लंग को लेकर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि तैमूर बहुत क्रूर था और उसने कई लोगों को मारा, जिनमें बड़ी संख्या में मुसलमान भी शामिल थे। रशीद ने यह भी कहा कि तैमूर एक रेपिस्ट था और उसने लोगों के साथ अत्याचार किए। मुगलों के बारे में रसीद ने यह भी कहा कि सभी मुगल बादशाह क्रूर थे और उनकी सत्ता में किसी प्रकार की महानता नहीं थी।
जब सलमान रसीद ने औरंगजेब के बारे में बात की, तो उन्होंने उसे 17वीं सदी के पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया-उल-हक के समान बताया। उनके अनुसार, जिया-उल-हक ने पाकिस्तान में जो कुछ किया ठीक वही औरंगजेब ने किया था। रसीद ने यह साफ कहा कि औरंगजेब की प्रशंसा करने लायक कोई बात नहीं थी। औरंगजेब के शासन में अत्याचार और अमानवीयता अधिक थी। उसकी प्रशंसा करने लायक कुछ भी नहीं है। इन बयानों के बीच, पिछले कुछ दिनों से औरंगजेब के मकबरे का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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