नई दिल्ली । लोकसभा में बुधवार को वक्फ अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। विधेयक को पिछले साल अगस्त में पेश किया गया था और बाद में चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया। समिति की सिफारिशों पर विचार कर इसे सदन में आज चर्चा के लिए लाया गया।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर चर्चा करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने वक्फ के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा- वक्फ एक अरबी शब्द है। वक्फ का इतिहास कुछ हदीसों से जुड़ा हुआ मिलता है और आज कल जिस अर्थ में वक्फ का प्रयोग किया जाता है, इसका अर्थ है अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान… पवित्र धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का दान।
वक्फ का इतिहास
उन्होंने बताया- वक्फ का समकालीन अर्थ, इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय अस्तित्व में आया। एक प्रकार से आज की भाषा में व्याख्या करें तो वक्फ एक प्रकार का charitable enrollment है। जहां एक व्यक्ति संपत्ति, भूमि धार्मिक और सामाजिक भलाई के लिए दान करता है, बिना उसको वापिस लेने के उद्देश्य से। इसमें जो दान देता है उसका बहुत महत्व है। दान उस चीज का ही किया जा सकता है जो हमारा है, सरकारी संपत्ति का दान मैं नहीं कर सकता, किसी और की संपत्ति का दान मैं नहीं कर सकता।
विपक्ष पर निशाना
अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि ये जो भ्रम खड़ा किया जा रहा है कि यह एक्ट मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलापों के अंदर उनकी दान की हुई संपत्ति के अंदर दखल करने का है… ये बहुत बड़ी भ्रांति फैलाकर माइनोरिटी को डराकर अपनी वोटबैंक खड़ी करने के लिए किया जा रहा है।
वक्फ पर स्थिति स्पष्ट कर भ्रांतियां की दूर
गृहमंत्री ने बताया- वक्फ का कानून दान के लिए किसी द्वारा दी हुई संपत्ति, उसका एडमिनिस्ट्रेशन अच्छे से चल रहा है या नहीं, कानून के हिसाब से चल रहा है या नहीं… या तो दान जिस चीज के लिए दिया जा रहा है, इस्लाम के लिए दिया है, गरीबों के उद्धार के लिए दिया गया है… उसके उद्देश्य के लिए उपयोग हो रहा है या नहीं हो रहा है… इसका नियमन करने का काम है।
उन्होंने कहा- जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं तो मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि वक्फ मुस्लिम भाइयों की धार्मिक क्रिया-क्लाप और उनके बनाए हुए दान से ट्रस्ट है… उसमें सरकार कोई दखल नहीं देना चाहती है। मुतवल्ली भी उनका होगा, वाकिफ भी उनका होगा, वक्फ भी उनका होगा।
वक्फ में लूट नहीं चलेगी
उन्होंने बताया- 2001-12 के बीच दो लाख करोड़ की वक्फ की संपत्ति निजी संस्थानों को सौ साल की लीज पर हस्तांतरित कर दी गई। बेंगलुरु में उच्च न्यायालय को बीच में पड़ना पड़ा और 602 एकड़ भूमि को जब्त करने से रोकना पड़ा। ये पैसा देश के गरीब मुसलमानों का है, ये धन्नासेठों की चोरी के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा- वक्फ बोर्ड में जो संपत्तियां बेच खाने वाले, सौ-सौ साल के लिए औने-पौने दाम पर किराए पर देने वाले लोग है, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद उन्हें पकड़ने का काम करेगा। ये चाहते हैं कि इनके राज में जो मिलीभगत चलती रहे। अब ये नहीं चलेगा। अमित शाह ने कहा कि 2013 का जो संशोधन आया, वो नहीं आया होता तो आज ये संशोधन लाने की नौबत नहीं आती। कांग्रेस सरकार ने दिल्ली लूटियंस की 125 संपत्तियां वक्फ को दे दीं। उत्तर रेलवे की जमीन वक्फ को दे दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में वक्फ की जमीन बताकर मस्जिद बनाने का काम हुआ।
अमित शाह ने मणिपट्टी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा- एक लाख 38 हजार एकड़ जमीन किराये पर दिए जाने, सौ साल की लीज पर निजी संस्थानों की जमीन हस्तांतरित किए जाने, विजयपुर गांव की 1500 एकड़ भूमि पर दावा करके विवाद में डाले जाने, फाइव स्टार होटल को 12000 महीने के किराए पर देने का जिक्र किया और कहा कि ये पैसा गरीब मुसलमान का है।
जमीनें कब्जाने के दिए उदाहारण
गृहमंत्री ने जमीनें कब्जाने के उदाहरण देते हुए कहा- कर्नाटक में एक मंदिर पर क्लेम किया, 600 एकड़ जमीन पर दावा किया। ईसाई समुदाय की ढेर सारी जमीनों पर भी दावा कर दिया। कई समूह वक्फ बिल का विरोध कर रहे हैं। अखिलेश जी, मुस्लिम भाइयों की सहनभूति लेने का कोई फायदा नहीं होगा। ये दक्षिण के जो सांसद बोल रहे हैं, वो अपने क्षेत्र के सारे चर्च को नाराज कर रहे हैं। कांग्रेस ने हरियाणा की गुरुद्वारे से संबंधित भूमि वक्फ को सौंप दिया। प्रयागराज में चंद्रशेखर आजाद पार्क को भी वक्फ घोषित कर दिया। ये सब जब जो चल रहा है, वक्फ मुस्लिम भाइयों के दान से बनाया ट्रस्ट है, उसमें सरकार कोई दखल नहीं करना चाहती है।
लालू यादव के बयान से घेरा
गृहमंत्री अमित शाह ने लालू यादव को कोट करते हुए कहा- लालू जी ने ही उस समय कहा था कि सरकार जो ये संशोधन विधेयक पेश किया है, सरकार की पहल का हम स्वागत करते हैं, शाहनवाज हुसैन और माननीय सदस्यों ने जो अपनी बातों को यहां रखा है मैं उसका समर्थन करता हूं। लेकिन ये देखिए कि सारी जमीनें हड़प ली गई हैं, चाहे सरकारी हो या गैर सरकारी। वक्फ बोर्ड में जो काम करने वाले लोग हैं उनके द्वारा सारी प्राइम लैंड को बेच दिया गया है। पटना में ही डाकबंगले की जितनी प्रॉपर्टी थी, सभी पर अपार्टमेंट बन गए, काफी लूट खसोट हुई है। इसलिए मैं चाहता हूं कि भविष्य में आप कड़ा कानून लाइए और चोरी करने वाले लोगों को सलाखों के पीछे भेजिए।
गृह मंत्री ने कहा- लालू जी की इच्छा तो इन्होंने (कांग्रेस) पूरी नहीं की, लेकिन मोदी जी ने पूरी कर दी। उन्होंने कहा- विपक्ष को वोटबैंक चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि हम वोटबैंक के लिए कोई कानून नहीं लाएंगे। कानून न्याय के लिए होता है, लोगों के कल्याण के लिए होता है।
क्या है वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024
बता दें कि ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024’ के साथ इससे जुड़े निष्क्रिय हो चुके पुराने अधिनियम को कागजों से हटाने के लिए ‘मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024’ लाया गया है। नए विधेयक का नाम अंग्रेजी में यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट इंपावरमेंट इफिशिएंट एंड डेवलपमेंट बिल (उम्मीद बिल) रखा गया है। हिन्दी में यह एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम होगा।
शिवम् दीक्षित एक अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार हैं, जिन्होंने 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत मनसुख टाइम्स (साप्ताहिक समाचार पत्र) से की। इसके बाद वे संचार टाइम्स, समाचार प्लस, दैनिक निवाण टाइम्स, और दैनिक हिंट में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया, जिसमें रिपोर्टिंग, डिजिटल संपादन और सोशल मीडिया प्रबंधन शामिल हैं।
उन्होंने न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, जहां इंडियाज़ पेपर परियोजना का नेतृत्व करते हुए 500 वेबसाइटों का प्रबंधन किया और इस परियोजना को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाया।
वर्तमान में, शिवम् राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं।
शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं।
उनकी उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी अंसार खान की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। यह सम्मान 8 मई, 2023 को दिल्ली में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र (IVSK) द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें केन्द्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल, RSS के सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र जी, और उदय महुरकर जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शिवम् की लेखन शैली प्रभावशाली और पाठकों को सोचने पर मजबूर करने वाली है, और वे डिजिटल, प्रिंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहे हैं। उनकी यात्रा भड़ास4मीडिया, लाइव हिन्दुस्तान, एनडीटीवी, और सामाचार4मीडिया जैसे मंचों पर चर्चा का विषय रही है, जो उनकी पत्रकारिता और डिजिटल रणनीति के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
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