पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन के छह दिन के दौरे का फैसला शायद यह सोचकर लिया होगा कि इससे उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि बनेगी और आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भाषण देकर एक बुद्धिजीवी के तौर पर जानी जाएंगी। लेकिन हुआ इसका उलटा। लंदन में न सिर्फ उनकी किरकिरी हुई बल्कि वहां के लोग भी जान गए कि उनकी सोच कितनी भारत विरोधी है। लंदन में ममता ने जो कहा और जो किया वह मजाक और अपमान का विषय बन कर रह गया। उनके वहां दिए बयानों ने भारत के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत पर असहमति जताकर उन्होंने साबित कर दिया कि देश के गौरव से पहले उनके लिए उनकी ओछी राजनीति है।

लंदन के हाइड पार्क में सफेद धोती के साथ हवाई चप्पल पहने ममता के ‘जॉगिंग’ करने के वीडियो उन्हें मजाक का पात्र बना गए। ‘सादगी’ दिखाने के चक्कर में वे भी ‘केजरीवाल’ ही साबित हुईं। इसके बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में आयोजित अपने भाषण में ममता कुछ बोलतींं उससे पहले वहां बसे बंगाली हिन्दू छात्रों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। वे प. बंगाल में चुनावी हिंसा और हिन्दुओं पर अत्याचार का विरोध कर रहे थे। तमाम कोशिशों के बाद भी सभागार में 70 से ज्यादा श्रोता नहीं थे।
लेकिन इससे भी ज्यादा अपमानजनक ममता का वह साक्षात्कार कार्यक्रम रहा जिसमें उनसे पूछा गया कि क्या भारत 2060 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने इस भविष्यवाणी को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। इतना ही नहीं, साक्षात्कार करने वाले ने जब आंकड़ों के आधार पर कहा कि भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्दी ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, इस पर आपका क्या कहना है? तो ममता ने कहा कि वे इससे असहमत हैं।

ममता के ऐसे भारत विरोधी बोल देश में असहजता पैदा कर गए। उनके इस बयान को भाजपा नेताओं ने भारत के अपमान के रूप में देखा। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ममता बनर्जी सच्चाई को छिपाने और भारत का अपमान करने का काम कर रही हैं। भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि ममता का बयान शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि विदेशी धरती पर भारत के खिलाफ ऐसा बयान देना उनके संवैधानिक पद के लिए अपमानजनक है।
इस बयान के बाद बंगाली हिंदुओं और अन्य समूहों ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लंदन में उनके कार्यक्रम के दौरान पोस्टर लहराए गए और उनके बयान की आलोचना की गई। ममता बनर्जी के बयान ने भारत की आर्थिक स्थिति पर एक नई बहस छेड़ दी है। भारत, जो वर्तमान में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, ने हाल ही में ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है। आईएमएफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना की है।
यह विवाद न केवल ममता बनर्जी की राजनीतिक छवि को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाने का कारण बन सकता है। भारतीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना के साथ ही उनके ‘इंडी’ गठबंधन के राहुल गांधी जैसे अन्य सेकुलर नेता भी देश की आर्थिक ताकत पर झूठे कसीदे काढ़कर ममता का सही ठहराने की होड़ करेंगे।
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