रा.स्व.संघ/ अ.भा.प्र. सभा 2025
‘बेंगलूरू में चन्नेनहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में 21-23 मार्च, 2025 को रा.स्व.संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संपन्न हुई। पहले दिन उद् घाटन सत्र में मंच पर सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के सान्निध्य में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने गत वर्ष का वृत्त रखा। वृत्त में संघ कार्य के विस्तार के साथ ही विभिन्न प्रशिक्षण वर्गों, कार्यक्रमों, उत्सवों और विविध क्षेत्रों में कार्य की स्थिति का विस्तृत ब्योरा प्रतिनिधियों के समक्ष रखा गया। प्रतिनिधि सभा ने बांग्लादेश के हिन्दू समाज की पीड़ा को रेखांकित करता एक प्रस्ताव पारित किया। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विश्व शांति और समृद्धि के लिए समरस-संगठित हिन्दू समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया। स्वतंत्रता सेनानी महारानी अबक्का के जन्म की 500वीं वर्षगांठ के अवसर पर सरकार्यवाह श्री होसबाले ने एक विशेष वक्तव्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुत हैं तीन दिवसीय अ.भा. प्रतिनिधि सभा में प्रस्तुत संकल्प, प्रस्ताव, विशेष वक्तव्य और प्रतिवेदन के संपादित अंश
संघ शताब्दी पर संकल्प
समरस-संगठित हिंदू समाज का निर्माण

अनंत काल से ही हिंदू समाज एक प्रदीर्घ और अविस्मरणीय यात्रा में साधनारत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव एकता और विश्व कल्याण है। हमारा राष्ट्र कई प्रकार के उतार-चढ़ावों के उपरांत भी निरंतर आगे बढ़ रहा है।
काल के प्रवाह में राष्ट्र जीवन में आए अनेक दोषों को दूर कर एक संगठित, चारित्र्यसंपन्न और सामर्थ्यवान राष्ट्र के रूप में भारत को परम वैभव तक ले जाने हेतु परम पूजनीय डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया। संघकार्य का बीजारोपण करते हुए, डॉ. हेडगेवार ने दैनिक शाखा के रूप में व्यक्ति निर्माण की एक अनूठी कार्यपद्धति विकसित की, जो हमारी सनातन परंपराओं व मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण का नि:स्वार्थ तप बन गई। उनके जीवनकाल में ही इस कार्य का एक राष्ट्रव्यापी स्वरूप विकसित हो गया।
द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय श्री गुरुजी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय जीवन के विविध क्षेत्रों में शाश्वत चिंतन के प्रकाश में कालसुसंगत युगानुकूल रचनाओं के निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। सौ वर्ष की इस यात्रा में संघ ने दैनिक शाखा द्वारा अर्जित संस्कारों से समाज का अटूट विश्वास और स्नेह प्राप्त किया। इस कालखंड में संघ के स्वयंसेवकों ने प्रेम और आत्मीयता के बल पर मान-अपमान और राग-द्वेष से ऊपर उठकर सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया। संघकार्य की शताब्दी के अवसर पर हमारा कर्त्तव्य है कि पूज्य संत और समाज की सज्जन शक्ति, जिनका आशीर्वाद और सहयोग हर परिस्थिति में हमारा संबल बना, जीवन समर्पित करने वाले नि:स्वार्थ कार्यकर्ता और मौन साधना में रत स्वयंसेवक परिवारों का स्मरण करें।
अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के चलते सौहार्दपूर्ण विश्व का निर्माण करने के लिए भारत के पास अनुभवजनित ज्ञान उपलब्ध है। हमारा चिंतन विभेदकारी और आत्मघाती प्रवृत्तियों से मनुष्य को सुरक्षित रखते हुए चराचर जगत में एकत्व की भावना तथा शांति सुनिश्चित करता है। संघ का यह मानना है कि धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित-सामूहिक जीवन के आधार पर ही हिंदू समाज अपने वैश्विक दायित्व का निर्वाह प्रभावी रूप से कर सकेगा।
अत: हमारा कर्त्तव्य है कि हम सभी प्रकार के भेंदों को नकारने वाला समरसता युक्त आचरण, पर्यावरणपूरक जीवनशैली पर आधारित मूल्याधिष्ठित परिवार, ‘स्व’ बोध से ओतप्रोत और नागरिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध समाज का चित्र खड़ा करने का संकल्प लें। इसके आधार पर हम समाज के सब प्रश्नों का समाधान, चुनौतियों का उत्तर देते हुए भौतिक समृद्धि एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण समर्थ राष्ट्रजीवन खड़ा कर सकेंगे। हम अ.भा.प्रतिनिधि सभा सज्जन शक्ति के नेतृत्व में संपूर्ण समाज को साथ लेकर विश्व के सम्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने वाले समरस और संगठित भारत का निर्माण करने हेतु संकल्प लेते हैं।
टिप्पणियाँ