कर्नाटक से एक बहुत ही हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। यह वीडियो एक पब्लिक सस्कूल में आयोजित एक विज्ञान प्रदर्शनी का बताया जा रहा है। जो कुछ भी इस वीडियो में है, उसका साइंस से कोई भी लेना-देना नहीं है। इस वीडियो में कक्षा चार की एक मुस्लिम बच्ची दो कब्रों को दिखाकर यह कह रही है कि पर्दा करने वाली लड़कियों के साथ मरने के बाद क्या होगा और छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियों के साथ मरने के बाद क्या होगा।
गौरतलब यह है कि कक्षा चार में पढ़ने वाली वह लड़की भी पूरी तरह से अपना सिर ढके हुए है अर्थात स्कूल की यूनिफ़ॉर्म पहनकर उस पर दुपट्टे को हिजाब जैसे बांधे हुए है।
इस वीडियो के सामने आने पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर इस प्रोजेक्ट को किस तरह से किसी भी स्कूल में अनुमति प्रदान की जा सकती है? लोग यह भी पूछ रहे हैं कि इस कथित प्रोजेक्ट का विज्ञान से क्या लेना-देना है? और उससे भी बढ़कर जिस दक्षता से वह बच्ची यह बता रही है कि कैसे बुर्का और नकाब पहनने वाली लड़कियां मरने के बाद जन्नत में जाएंगी और कैसे छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियों की कब्र पर सांप, बिच्छू आदि चल रहे हैं, वह अपने आप में अचरज में डालने वाला है।
क्योंकि एक तरफ तो यह कहा जाता है कि हिजाब पूरी तरह से केवल महिलाओं की पसंद पर निर्भर करता है तो वहीं कक्षा चार की बच्ची का यह वीडियो यह भी बताता है कि कैसे छोटी-छोटी लड़कियों को बचपन से ही यह सिखा दिया जाता है कि क्यों उन्हें हिजाब या बुर्के में रहना है। और जब छोटी बच्चियों के दिल में सजा का डर भर दिया गया तो फिर उसकी चॉइस कहाँ से रह गई?
इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के प्रश्न सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं कि क्या यह कथन कि शिक्षा को धर्म के साथ मिक्स न करो, केवल हिन्दू धर्म के लिए है?
यह भी तय नहीं है कि बुर्का न पहनने वाली लड़कियों में केवल वे लड़कियां हैं जो मुस्लिम हैं और बुर्का नहीं पहनती हैं या फिर गैर मुस्लिम? कर्नाटक से ही लड़कियों ने स्कूलों में बुर्का पहनने का आंदोलन आरंभ किया था और उसके बाद हिंसा की कई घटनाएं भी सामने आई थीं।
स्कूलों का वातावरण हर प्रकार के मजहबी अतिक्रमणों से मुक्त होना चाहिए। शिक्षा तथ्यपरक होनी चाहिए और शैक्षणिक वातावरण भी तथ्यपरक होना चाहिए। उसमें इस प्रकार से मजहबी अतिक्रमण शिक्षा को केवल मजहब के प्रचार-प्रसार का माध्यम बना देंगे।
सोशल मीडिया पर लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि यह जो नफरत इन बच्चों के दिलों में भर दी गई है, उसे जाने में सदियाँ लग जाएंगी। कर्नाटक में एक और कॉलेज का वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें पढ़ने वाली मुस्लिम लड़कियां हिजाब और बुर्के में नजर आ रही हैं।
यह और भी दुर्भागयपूर्ण है कि जहां एक तरफ ईरान में मुस्लिम लड़कियां अपने साथ हो रहे अनिवार्य हिजाब के नाम पर लड़ाई लड़ रही हैं, और अफगानिस्तान में जहां मुस्लिम लड़कियों को पर्दे में इस प्रकार ढक दिया गया है कि उनके घरों में खिड़कियां ही नहीं हैं, तो वहीं भारत में जहां पर लड़कियों के लिए खुला आसमान है, लड़कियों के लिए करने के लिए बहुत कुछ है, वहाँ पर कर्नाटक जैसे प्रदेश में मुस्लिम लड़कियां बुर्के को ग्लोरीफाई कर रही हैं।
एक यूजर ने एक मौलाना का वीडियो साझा किया है, जो ऐसे गुड़ियों वाले प्रोजेक्ट बनाकर लड़कियों को डराता है और उनके दिलों में जहर भरता है.
वहीं एनडीटीवी के अनुसार इस संबंध में एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने ऑफ रिकॉर्ड बताया कि नवंबर में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में इस बच्ची ने यह मॉडल प्रदर्शित किया था। यह कार्यक्रम मुस्लिम समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा किसी अन्य स्थान पर आयोजित किया गया था। और एनडीटीवी के अनुसार स्कूल को प्रशासन से क्लीन चिट मिल गई है क्योंकि ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) के नेतृत्व में गठित दो सदस्यीय टीम ने स्कूल का दौरा किया था और जांच के दौरान, स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल ने लिखित बयान में स्पष्ट किया कि स्कूल परिसर में ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया था. हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि वीडियो में नजर आ रही बच्ची उनके ही स्कूल में पढ़ती है।
हालांकि लोग स्कूल की दलीलों पर सहमत नहीं दिख रहे हैं। लोग स्कूल द्वारा पेश की जा रही सफाई को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि यदि मुस्लिम समाज का कोई आयोजन होता तो क्या बच्ची के गले में स्कूल के आईकार्ड वाली पट्टी होती?
लोग इन तमाम प्रश्नों के उत्तर चाह रहे हैं और सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर लगातार बातें कर रहे हैं।
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