प्रतीकात्मक तस्वीर
जिस मोहल्ला क्लीनिक का हौवा बनाकर आम आदमी प्रमुख केजरीवाल ने अपनी सियासत चमकाई थी, सत्ता जाते ही उनके द्वारा बनाया गया धुएं का गुबार अब छंटने लगा है। केजरीवाल दावा करते थे कि मोहल्ला क्लीनिक आयुष्मान भारत योजना से कहीं बेहतर है। लेकिन अब कैग की रिपोर्ट केजरीवाल शासन के दौरान मोहल्ला क्लीनिक की असलियत को सामने ला दिया है। कैग रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि बाकी की सुविधाएं तो दूर की बात हैं, मोहल्ला क्लीनिक में तो थर्मामीटर तक नहीं है।
कैग की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक, कर्मियों, बुनियादी ढांचों की कमी, डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। वहां काम करने वाले 70 प्रतिशत मरीजों को एक मिनट भी नहीं देखते हैं। ऑडिट में पता चला है कि 218 मोहल्ला क्लीनिक में से 41 तो डॉक्टरों की कमी और प्रशासनिक मुद्दों के चलते बंद पड़े हैं। 74 में दवाओं के स्टॉक ही नहीं थे।
कैग की ऑडिट रिपोर्ट कहती है कि केजरीवाल ने अपनी सरकार के दौरान 2017 में दिल्ली में 1000 मोहल्ला क्लीनिक स्थापित करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 2023 तक केवल 523 ही खोले गए। इसके अलावा इन मोहल्ला क्लीनिक्स में असुविधाओं का अंबार है। यहां न तो पीने के लिए पानी, दवाओं के लिए एसी नहीं और दिव्यांगों के लिए व्हील चेयर तक नहीं है।
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