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हमास को सही ठहराने वाली किताब पर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में होगा कार्यक्रम, छिड़ा विवाद

सोशल मीडिया पर जो पोस्ट्स हैं उनके अनुसार इस किताब में 7 अक्टूबर 2023 पर इजरायल पर हमले के बाद कहा गया है कि हमास को खलनायक बनाने के प्रयास निरंतर किये गए।

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सोनाली मिश्रा

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स अपने परिसर में मार्च में एक पुस्तक पर कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है। यूं तो पुस्तक पर आयोजन किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए बहुत आम बात है, परंतु इस पुस्तक के आयोजन को लेकर विवाद छिड़ गया है। यह कोई साधारण पुस्तक नहीं बल्कि हमास की वकालत करती हुई किताब है। Understanding Hamas And Why That Matters इस किताब का शीर्षक है। 10 मार्च 2025 को इस चर्चा का आयोजन होने जा रहा है। सोशल मीडिया पर जो पोस्ट्स हैं उनके अनुसार इस किताब में 7 अक्टूबर 2023 पर इजरायल पर हमले के बाद कहा गया है कि हमास को खलनायक बनाने के प्रयास निरंतर किये गए।

इस किताब को हेलेन कॉबन और रामी जी खौरी ने लिखा है और यह दावा किया है कि हमास शुरू में यहूदी विरोधी था, मगर अब वह यहूदी मत और ज़ायोनीवाद में अंतर महसूस करने वाला हो गया है। jewishnews.co.uk के अनुसार इस किताब के आयोजन के संबंध में लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की वेबसाइट पर यह लिखा गया था कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले के बाद पश्चिम में हमास को इसलिए बदनाम किया गया, क्योंकि उसे पहले से ही आतंकवादी समूह घोषित किया गया है।
परंतु जब jewishnews ने यूनिवर्सिटी से संपर्क किया तो उस टेक्स्ट को बदल दिया गया।

आयोजकों की वेबसाइट के अनुसार 10 मार्च 2025 को होने वाले इस आयोजन में कई अकादमिक वक्ता भी भाग लेंगे। कई मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि इनमें वे भी लोग सम्मिलित हैं जो पूर्व में इजरायल और जियोनिज़्म की निंदा कर चुके हैं और हमास को आतंकी संगठन ठहराए जाने का विरोध कर चुके हैं।

इस आयोजन को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं आरंभ हो गई हैं। लोग प्रश्न कर रहे हैं कि क्या लंदन में कोई कॉलेज ऐसा भी कर सकता है? क्या ऐसी किताब पर अकादमिक चर्चा भी हो सकती है? वेस्टर्न इंटेल नामक यूजर ने इस आयोजन के विषय में एक्स पर लिखा कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एक आयोजन को लेकर विवादों में है। यह है कि वह Understanding Hamas and Why That Matters पर एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसे शिक्षा जगत के वे लोग करवा रहे हैं, जिन्होंने पहले सरकारी अधिकारियों को यह सिखाया था कि हमास को आतंकी कहना शांति के लिए बाधा है।

सोशल मीडिया के कुछ पोस्ट्स के अनुसार इस आयोजन के माध्यम से हमास की छवि में परिवर्तन करने की कोशिश की जा रही है। विद्यार्थियों को ईमेल भेजा गया, जिसमें कहा गया कि 7 अक्टूबर को इजरायल में हुए हत्याकांड के बाद हमास को अनावश्यक रूप से शैतान घोषित किया जा रहा है। इसमें एक बहुत ही वैध प्रश्न उठाया है कि हमास को यूके में आतंकी संगठन घोषित किया गया है, फिर वहाँ पर ऐसे आयोजन कैसे हो सकते है? लोग सोशल मीडिया पर प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर कोई यूनिवर्सिटी एक ऐसी किताब पर आयोजन कैसे करा सकती है, जो यह कहती है कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए आतंकी हमले के बाद हमास को खलनायक बनाया जा रहा है।

7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के आतंकियों ने हमला किया था और निहत्थे लोगों की हत्या की थी। उन हत्या के वीडियो अभी तक इसलिए ताजे हैं, क्योंकि पिछले दिनों ही हमास ने उस हमले में अगवा किये हुए जिंदा लोगों को रिहा करना शुरू किया है। उन रिहा किये गए लोगों में दो नन्हें बच्चों और उनकी उस मां के ताबूत भी थे, जिन्हें 7 अक्टूबर 2023 को अगवा कर लिया गया था। दो दूधपीते बच्चों की हत्या की गई और वह भी तब जब उन्हें कैद करके रखा गया था। हमास की बर्बरता की कहानियां केवल 7 अक्टूबर 2023 तक ही सीमित नहीं हैं।

हमास की शुरुआत फिलिस्तीन के अहमद यासीन ने 1987 में की थी। यह 1973 में मुस्लिम ब्रदरहुड से संबद्ध उसकी मुजामा अल-इस्लामिया इस्लामिक चैरिटी से उभरा था। तो यह स्पष्ट है कि हमास और कुछ नहीं बल्कि मुस्लिम ब्रदरहुड का ही विस्तार है। हालांकि वर्ष 2017 के अपने चार्टर के अनुसार उसने अपने आप को मुस्लिम ब्रदरहुड से अलग कर लिया था।
jewishnews.co.uk के अनुसार इस किताब के एक लेखक रामी जी खौरी अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बेरूत में सार्वजनिक नीति और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के लिए इस्साम फारेस संस्थान के निदेशक हैं और वे अल जजीरा के लिए लगातार लिखते हैं। पिछले सप्ताह ही उन्होनें हमास को लेकर लिखा था कि “लंबे समय से इजरायली प्रचार ने हमास को एक लापरवाह और क्रूर आतंकवादी समूह के रूप में पेश किया है जो इजरायल को नष्ट करना चाहता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि हमास एक सफल फिलिस्तीनी राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन रहा है।”

आयोजकों की वेबसाइट पर अब क्या लिखा है:

इस किताब पर जो चर्चा रखी गई है, उसके आयोजन को लेकर आयोजकों की वेबसाइट पर लिखा है कि यह किताब हमास के पक्ष में या उसके खिलाफ कोई वकालत नहीं करती है, बल्कि यह विशेषज्ञों के साथ संवाद की शृंखला है, जिससे आज जो संकट है, उसमें मुख्य भूमिका निभाने वाले आंदोलन को गहराई से समझा जा सके।

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