गत दिनों बारां (राजस्थान) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क विभाग द्वारा ‘सनातन के समक्ष चुनौतियां एवं हमारी भूमिका’ विषय पर एक गोष्ठी आयोजित हुई। इसे संबोधित करते हुए क्षेत्र सह संपर्क प्रमुख योगेंद्र ने कहा कि भारत को प्राचीनकाल में सोने की चिड़िया और विश्व गुरु के रूप में जाना जाता था।
हिंदू चिंतन का मूल प्राणी मात्र का सुख और विश्व बंधुत्व की कल्पना है। अनेक महापुरुषों ने समय-समय पर समाज का जागरण किया। इसी क्रम में डॉ. हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
उन्होंने संघ के माध्यम से एक ऐसे समाज का निर्माण करने का संकल्प लिया, जो देश के लिए हर प्रकार से तैयार रहे। संघ का लक्ष्य भारत को वैभव संपन्न बनाना है और शाखा में चरित्रवान, संस्कारवान और देशभक्त नागरिकों का निर्माण होता है।
संघ के द्वार सभी मत, पंथ या संप्रदाय के लोगों के लिए खुले हैं, बशर्ते वे भारत माता को मातृभूमि मानें और उसके प्रति सम्मान रखें। कार्यक्रम का समापन एक चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रबुद्धजन से सुझाव प्राप्त किए गए।
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