Hamas-Israel war: बहरीन के बाद अब कुवैत में भारतीय नर्स पर एक्शन, सोशल मीडिया पर इजरायल के समर्थन का आरोप

भारतीय नर्स पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इजरायल का समर्थन करके कुवैती कानून का अपमान किया है। बहरहाल, नर्स के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है कि वो कहां और किस हाल में हैं।

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Kuldeep singh

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास और इजरायल के मध्य जारी युद्ध के बीच मुस्लिम देश फिलिस्तीन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में ये देश इजरायल का समर्थन करने वाले लोगों पर कार्रवाई कर रहे हैं। दुबई में भारतीय डॉक्टर पर कार्रवाई के बाद अब इस्लामिक देश कुवैत में एक भारतीय नर्स सोशल मीडिया पर इजरायल का समर्थन कर मुसीबतों में फंस गई है। दावा किया गया है कि ये भारतीय नर्स मलयाली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मूल की नर्स कुवैत के मुबारक अल-कबीर अस्पताल में कार्यरत थीं। उस पर आरोप है कि नर्स ने अपने सोशल मीडिया हैंडल और व्हाट्सएप स्टेटस लगाकर इजरायल का समर्थन किया था, जबकि कुवैत सरकार ने प्रवासी लोगों के इस तरह के विषयों पर सार्वजनिक चर्चा पर बैन लगा रखा है। कई रिपोर्टों में ऐसा दावा किया जा रहा है कि नर्स को कुवैत से डिपोर्ट कर दिया गया है। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

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क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि कुवैत के ही एक स्थानीय वकील अली हबाब अल-दुवैख ने भारतीय महिला नर्स के खिलाफ कुवैती लोक अभियोजन अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उक्त वकील ने भारतीय नर्स पर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से इजरायली का समर्थन करने और यहूदी झंडे को सोशल मीडिया पर लगाने का आरोप लगाया था। अल-दुवैख ने लोक अभियोजक कार्यालय में अपनी आधिकारिक शिकायत में नर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया।

कुवैत के कानूनों का हवाला देते हुए कुवैती वकील ने कहा कि भारतीय नर्स इस तरह से कार्य कर रही थी कि यहूदियों के प्रति उसकी सहानुभूति और कुवैती कानून की अवमानना हो रही थी। ​​इसके लिए आरोपी महिला को आजीवन कारावास या कम से कम पांच साल की सजा हो सकती है।

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बहरीन में भारतीय डॉक्टर पर भी हुआ था एक्शन

इससे पहले इस्लामिक देश बहरीन में भारतीय सुनील जे. राव  को रॉयल बहरीन अस्पताल ने महज इसलिए नौकरी से निकाल दिया था, क्योंकि उन्होंने हमास-इजरायल की जंग में इजरायल के समर्थन वाली सोशल मीडिया पोस्ट की थी। खास बात ये है कि जिस रॉयल अस्पताल में डॉ राव सर्जन थे उस अस्पताल का मालिक केरल का ही एक संगठन है।

उल्लेखनीय है कि खुद के फंसने पर मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले ये इस्लामिक खुद मानवाधिकारों की धज्जियां खुले आम उड़ाते हैं। इस्लामवादी अपने खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं। बहरहाल अभी तक ये नहीं पता चल सका है कि केरल की उक्त नर्स कहां हैं औऱ किस हाल में हैं।

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