पाञ्चजन्य का ‘साबरमती संवाद’ कार्यक्रम, दिग्गजों ने कई मुद्दों पर रखी अपनी बात
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होम भारत गुजरात

पाञ्चजन्य का ‘साबरमती संवाद’ कार्यक्रम, दिग्गजों ने कई मुद्दों पर रखी अपनी बात

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 10, 2023, 02:42 pm IST
in गुजरात

‘पाञ्चजन्य’ का ‘साबरमती संवाद’ कार्यक्रम आज गुजरात के अमदाबाद स्थित उद्यमिता विकास संस्थान में आयोजित हुआ। इस दौरान दिग्गजों ने कई मुद्दों पर अपने विचार रखे। पहले चरण में गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी शामित हुए, जहां उन्होंने गुजरात के आंतरिक एवं बाह्वा सुरक्षा को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि लगातार अवैध अतिक्रमण हटाने का कार्य किया है और आगे भी अतिक्रमण हटाने का कार्य करते रहेंगे। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कहा कि मेरे राज्य की एक भी बेटियों को आश्वासन में इस विषय में जरूरत नहीं है। पहले के समय शहर गुंडों के नाम से जाने जाते थे। अब उस शहर की खासियत की बात से जाने जाते हैं।

हर्ष संघवी ने कहा कि ड्रग्स आज के समय का पश्चिमी देशों का फैशन स्टेटस बन गया है। इसके सामने आज भी भारत सुरक्षित है। जो भी इसे गुजरात मॉडल के तौर पर जोड़ रहे हैं, यह राज्य इस राज्य की पुलिस ड्रग्स को पकड़ने वाला मॉडल है। गुजरात की पुलिस समुद्र की तेज लहरों के बीच, गोलियों का सामना करके ड्रग्स पकड़ती है, तो ये वास्तव में ये गुजरात मॉडल है। गुजरात ने कोलकाता से ड्रग्स भी पकड़ा है।

उन्होंने कहा कि गुजरात पुलिस ने पंजाब की जेलों से ड्रग्स पकड़ने का काम किया है। पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये बहुत ही बड़ा सामाजिक मुद्दा है। प्रत्येक व्यक्ति को इससे लड़ना पड़ेगा। कनाडा, थाईलैंड, यूएसए से जो किताबें भेजी गईं, उनके पन्नों पर कोकीन थी। ड्रग्स को रोकने में गुजरात पुलिस बहुत ही सफल रही है। उन्होंने कहा कि गुजरात के गिफ्ट सिटी को जरूर देखें। मीडिया में जो यह कहते थे कि यह ख्याली पुलाव है, आज वे भी मोदी जी की वाह वाह करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तार भी गुजरात मॉडल से जुड़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में भारतीय लोक गायिका मालिनी अवस्थी और सामाजिक कार्यकर्ता द्रुमि भट्ट शामिल हुईं। इस दौरान प्रख्यात लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि गुजरात सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से उतना ही जुड़ा है जितना पूर्वज थे। बापू से लेकर, सरदार पटेल से लेकर मोदी जी तक सामाजिक तानाबाना विश्व को दिखाया है। पहला सफल मॉडल कोआपरेटिव का था। 1964 में लाल बहादुर शास्त्री जी प्रधानमंत्री थे, कुरियन जी कहते हैं कि आप आएं हैं तो स्वयं प्लांट का निरीक्षण करें। मैं एक किसान के गांव में समय व्यतीत करना चाहता हूं। वह जब खेड़ा आते हैं तो उस समय उन्होंने देखा कि कोई कहीं से दूध ला रहा, सब मिलकर पी रहे हैं। कोई किसी से कुछ नहीं पूछ रहा था। सामाजिक समरसता था। अमूल के रूप में बड़ा मॉडल हमारे सामने है।

मालिनी अवस्थी ने कहा कि  भारत, अमेरिका की अब अनिवार्यता है। भारत ने दम खम के साथ अपनी जगह बनाई है। तीन दिन पहले इस तरह की घटना हुई जो पूरे विश्व में असर होगा। बिना देर किए प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया, उन्होंने इजरायल को समर्थन दिया। मुझे बतौर कलाकार वही बुलाएगा जो अपने संस्कार से जुड़ेगा। मुझे वही बुलाएगा जो परंपरा से जुड़ा है। मेरी यात्राएं प्राइवेट हैं। आप सोच सकते हैं कि अपने देश पर अभिमान करना पूरे वैश्विक संदर्भ में दिखता है।

मालिनी अवस्थी ने कहा कि 1558 की बात है अकबर के दरबार में तानसेन के बारे में प्रचलित था कि वे दीपक राग गाते थे दीपक जल जाते थे। अकबर ने अनुरोध किया। तानसेन ने राग शुरू किया। दीपक जलते हैं, आग लगती है, तानसेन स्वयं झुलस जाते हैं। नरसी मेहता के परिवार में दो बेटियां हैं। ताना और रीरी। मल्हार गाकर वर्षा कर सकती हैं। दोनों बहने मल्हार गाती हैं और तानसेन को राहत मिलती है। अकबर ने बुलाया तो लड़कियों ने जाने से मना कर देती हैं। अकबर सेना भेजती है, लेकिन उससे पहले दोनों बेटियां जलसमाधि ले लेती हैं। ताना रीरी की आज भी पूजा होती है। नरेंद्र मोदी ने 2010 में तानारेरी में भव्य मंदिर का निर्माण करते हैं। अपनी कहानी हम विश्व को बताएंगे, ये गुजरात है। गरबा शक्ति का उत्सव है। तीन तालियों से जो आवाज निकलती है, वह ब्रह्मा विष्णु महेश का प्रतीक है। गरबा में पूरा भारत एक हो जाता है।

वहीं, इस दौरान द्रुमि भट्ट ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात को आप ऐसे देख सकते हैं कि जहां-जहां बसे गुजराती, वहां बसे गुजरात। गुजराती के ब्लड में है रिस्क लेकर नफा-नुकसान को लेकर आगे चलते हैं। द्रुमि भट्ट ने कहा कि 90 प्रतिशत स्टार्टअप सफल होते हैं, लेकिन उसे चलाना होगा, सोचने से नहीं होगा। ये एक जर्नी है। परिश्रम, प्लानिंग, मेंटर और मार्केट की समझ जरूरी है। मार्केट की समझ रिसर्च से आती है। क्या स्टार्टअप दस साल में रिलेवेंट रहेगा कि नहीं, ये भी सोचें। मेंटर की सलाह मानें। जो आपके प्रॉडक्ट समझता है। निराश होकर इसे नहीं चला सकते। प्रयत्न, प्रयास और संचालन पर ध्यान देना होगा।

कार्यक्रम के तीसरे चरण में आईपीएस निधिन वलसन और सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप देशमुख शामिल हुए, जहां निधिन वलसन ने कहा कि मुझे 2021 में कैंसर हुआ तो मैं 36 साल का था। मुझे जब लक्षण दिखे तो डॉक्टरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जब मेरा स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया तो मेरे दोस्त ने जांच कराई। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। स्टेज चार पर पहुंच गया था। पूरे शरीर में कैंसर फैल गया। डॉक्टर ने कहा कि एडमिट कर इलाज करेंगे। सभी ने कहा कि प्राइवेट में कराएं, लेकिन मैं एक सरकारी अस्पताल गया। आठ महीने छुट्टी लेनी पड़ी। कीमोथेरेपी हुई। दो-तीन बार बहुत सीरियस रूप से एडमिट होना पड़ा। मेरी दूसरा कीमोथेरेपी हुई। मैं डिप्रेशन में था। मैंने सोचा कि मैं वापस जॉब के लिए जाऊंगा। मैंने सीनियर को फोन किया। मुझे वापस जाना है। एक कीमो और दूसरे कीमो के बीच 21 दिन का अंतर है। मैंने कहा इस बीच मैं काम करूंगा। एक दिन अचानक मेरा फीवर बढ़ गया। मुझे भर्ती किया गया। मुझे इंजेक्शन दिया गया। बहुत दर्द था। रात में जब लेटने वाला था तो सोचा कि मेरी फैमिली का क्या होगा। मैंने मित्र को फोन किया यदि मुझे कुछ हो जाए तो फैमिली की हेल्प करना। कीमोथेरेपी के बाद मुझे कोविड हो गया। मेरी इम्युनिटी काफी कम हो गई। एक साल बीमारी से लड़ा। लोगों ने कहा कि आयरन मैन की तैयारी करो। मैंने इसका निर्णय लिया। लक्ष्य बनाया।

निधिन वलसन ने कहा कि नेवर गिवअप, जितना भी आप सोचो, कभी कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर रहेगा। जितना भी प्लान करो, कुछ न कुछ अनएक्सपेक्टेड होगा। आप इससे जितना जल्दी वापस आएंगे, यह आप पर निर्भर करता है। आपको अपने माइंड को कंट्रोल करना होगा। धैर्य बहुत जरूरी है।

इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप देशमुख ने कहा कि मुझे लिवर की दिक्कत हुई थी। जब पहली बार डॉक्टर से मिला तो उन्होंने बात करनी शुरू की। उन्होंने पानी की बोलत मेरे सामने रखी। कहा कि यह आपके लिए जहर है। एक लीटर से ज्यादा पानी नहीं पीना है। मेरे शरीर से पहली बार 9 लीटर और दूसरी बार पांच पानी निकाला गया। लिवर में पानी भरने से हार्निया की दिक्कत होती है। कोविड के समय मुझे दिक्कत हुई। लॉकडाउन लग गया था। अस्पताल कोविड के लिए रिजर्व हो रहे थे। फल नहीं खाना था। पापड़, अचार नहीं खाना है। दो ग्राम नमक खाने की छूट थी। प्रोटीन कंटेंट खाने को कहा। पूरे दिन में एक बादाम खा सकते हैं। दिलीप देशमुख ने बताया कि अंगदान में गुजरात देश में तीसरे नंबर पर है। करीब पांच लाख लोगों को अंगों की प्रतीक्षा है। युवकों से विनती है कि इंटरनल आर्गन्स सही रखें।

कार्यक्रम के चौथे चरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुनील आंबेकर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हम लोग उद्यमिता संस्थान में हैं। गुजरात का संदर्भ उद्यमिता से है। जब गांधी जी विदेश गए तो वहां उनका साथ देने के लिए पहले से ही वहां बहुत गुजराती थे। अंग्रेजों के जहाज से हमने जाना नहीं शुरू किया। हम पहले से जाते रहे हैं। तीन हजार साल पहले का भी इतिहास है।

सुनील आंबेकर ने कहा कि कई लोगों को लगता है कि भारत इसलिए गरीब हुआ क्योंकि हमारे पास अर्थव्यवस्था की समृद्धि के लिए जो चाहिए वह नहीं था, साइंस नहीं थी। ये सतत प्रक्रिया है। हम लोगों को पुरानी बातों के बारे ज्ञान होना जरूरी है। हमें इतिहास से सीखना जरूरी है। यदि मोबाइल हैक या हैंग हो गया तो काम नहीं करता। आपको समझ नहीं आता है, मेमोरी लॉस होने पर समझ नहीं आता है कि क्या करें। हर एक में यह परेशानी है, लेकिन जब किसी देश की मेमोरी लॉस हो जाए तो वह देश हैंग हो जाता है।

अपने देश में ऐसे बहुत लोग हैं, जिन्हें यह नहीं पता कि उन्हें कहां और कैसे जाना है इसको लेकर भ्रम है। हम क्या हैं, ये पता होना जरूरी है। इसलिए आज इसकी जरूरत है। मेमोरी लॉस को रिकवर करने की जरूरत है। हमारे नॉलेज को किसी ने दबाया, किसी ने समाप्त किया। इसलिए जरूरी है कि उस नॉलेज को जानें। नालंदा यूनिवर्सिटी के बारे में लोगों से पूछा कि वहां क्या पढ़ाया जाता था। वहां से कंटेंट लिया तो वहां वेद, रामायण ग्रंथ पढ़ाए जाते थे। इसके साथ ही इंटरप्राइजेज के कई कोर्स थे। रंग, हेयर स्टाइल, सीक्रेट एजेंसी के लिए चौर्यकर्म के लिए भी कोर्स, काष्ठ के कोर्स। वेद पढ़ने वाला भी यह कोर्स पढ़ता था। व्यक्ति डीप नॉलेज भी लेता था।

उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा पद्धति में इंटरप्राइजिंग का पूरा प्रभाव था। सबने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। भारत में कृषि है, यह सही है, लेकिन भारत के लोगों को केवल कृषि ही आती थी ऐसा नहीं है। सही यह है कि हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष हुनर था। गुमला में आज भी पारंपरिक स्टील मेकिंग जीवंत है।

सुनील आंबेकर ने कहा कि हमने गांवों में इंटरप्राइजिंग की खोज की। उनके यहां पीढ़ियों से काम हो रहा था। यूपी सरकार ने एक कार्यक्रम शुरू किया कि एक जिला एक उत्पाद। यह परंपरा हजारों वर्षो की है। मुगलों के समय इसे बहुत नुकसान हुआ। ब्रिटिश के समय मशीन ने इसे नुकसान पहुंचाया। ये लोग भी उतना ही स्वाधीनता सेनानी हैं, जिन्होंने वर्षों के आक्रमण के बाद वह स्किल पीढ़ी दर पीढ़ी बना रखी है। पत्थर के उद्योग को लें। अयोध्या में श्रीराम मंदिर बन रहा है। मंदिर बनाने में भी बहुत संघर्ष हुआ। ऐसे मंदिर जो हजारों साल चलें, इस तरह का निर्माण करने वाले लोग हमें गांवों में उपेक्षित मिले। ऐसे कारीगरों को एकत्र किया गया। भारत की पारंपरिक कुशलता से मंदिर का निर्माण हो रहा है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि नई जनरेशन के पास दो बड़े सवाल हैं – च्वाइस ऑफ कल्चर और च्वाइस ऑफ टेक्नोलॉजी। आप कैसे जीना चाहते हैं, यह तय होना चाहिए, यह कल्चर है। इसके बात तकनीक आती है। भारत विश्वगुरु तभी बनेगा जब आप अपने दिमाग से चलेंगे। यानी अपनी नॉलेज से चलेंगे। अवर कल्चर अवर टेक्नोलॉजी, इस पर ध्यान दें।

कार्यक्रम के पांचवे चरण में पर्यावरण, पंचमहाभूत पर अतुल जैन (डीआरआई, दीनदयाल शोध संस्थान) ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हम लोग गुजरात की धरती पर हैं। यहां दो महापुरुषों का जिक्र आता है। गांधी जी, पटेल जी और अब नरेंद्र मोदी जी का। उन्होंने कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना 1968 में नानाजी देशमुख ने की थी। 750 गांवों में हमारी पहुंच है। 1978 में गोंडा में पहला काम शुरू किया। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच गुजारे। भारतीय दर्शन से हमें प्रेरणा मिलती है। यूएन ने एसडीजी लक्ष्य तय किए हैं। उसमें यह भी है कि जब हम अपनी आवश्यकताओं को कम करेंगे और मितव्ययी रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंच ज (जल, जंगल, जमीन, जानवर) हमारे मूल्यों से जुड़ें हैं और इसकी प्रेरणा हमने इन्हीं मूल्यों से ली। इसे हम लोग हर रोज अपने जीवन में उतरते देखते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी मैनेजमेंट की बात करें तो समाज को सामने रखकर देखें।

 

कार्यक्रम के छठवें चरण में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और बीजेपी नेता कपिल मिश्रा शामिल हुए। इस दौरान शहजाद पूनावाला ने कहा कि पांचजन्य वह शंख है महाभारत से पहले जिसकी ध्वनि से श्रीकृष्ण कौरवों में भय का संचालन करते हैं। उन्होंने कहा कि जी 20 उस कालखंड में हुआ जब भारत की विकास पताका लहरा रही है। चंद्रयान 3 के माध्यम से विज्ञान पताका लहराया। 130 साल पहले इसी कालखंड में भगवा चोला पहने एक सन्यासी ने विदेश में संदेश दिया। वह संदेश दुनिया सुनती तो 9/11 नहीं होता। अब विश्वास का भारत ने पताका लहराया। उन्होंने कहा कि सनातन का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है, वहीं भारत में कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

शहजाद पूनावाला ने कहा कि हमास ने जिस तरह आतंकी हमला किया, उसमें सीधी बात होती है। आप आतंक के साथ खड़े हैं या फिर आतंक के खिलाफ। जो लोग आतंक की पैरवी करने बैठे हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने 26/11 को हिंदू आतंकवाद कहा। जिन्होंने अफजल के समर्थन में नारे लगाए। इजरायल वह देश है, जो 1999 के युद्ध में भारत के साथ खड़ा रहा। जिस पार्टी के दो-दो नेता आतंकवाद की भेंट चढ़े हैं, उसके लोग आतंक के साथ खड़े हैं।

शहजाद पूनावाला ने कहा कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का ऐसा निकाह है जिसमें पंजाब से लेकर दिल्ली तक रोज तीन तलाक होता है। इंडी गंठबंधन जो पहले एक-दूसरे को देख नहीं सकते थे वे आज एक हो गए हैं। ये मोदी के डर की वजह से है। ये बांटने आएंगे, ये हर जगह बंटवारे के बीज डालते हैं।

इस दौरान बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि जी 20 ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है। इसकी शुरुआत को प्रतीकों में देखा जाए तो एक प्रतीक नजर आता है जब ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर के स्टेडियम में वहां का प्रधानमंत्री कहता है कि नरेंद्र मोदी बॉस है। पापुआ न्यूगिनी के पीएम ने प्रधानमंत्री की पैर नहीं छुए उन्होंने मां भारती को प्रणाम किया। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि ये 420 हैं, ये बच्चा बचाओ आंदोलन है। इस दौरान उन्होंने कहा कि मां भारती का स्वर्णिम काल अब शुरू हुआ है। वह सपना आप और हम देखेंगे जिसे स्वामी विवेकानंद ने देखा, जिसे लाला लाजपतराय ने देखा। इंग्लैंड ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि भारत 70 साल में इतना जल्दी उठकर खड़ा हो जाएगा।

कपिल मिश्रा ने कहा कि इजरायल में जो हुआ उसे देखना, इजरायल में निर्दोष लोगों को घेरकर, झुंड बनाकर हमला किया गया। उन्हीं के मोबाइल से उनके फेसबुक पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि  जिन्होंने इजरायल पर हमले के बाद हमास के समर्थन में मार्च निकाला, वे लोग भारत पर हमला हुआ, अमदाबाद में ब्लास्ट में हुआ तब इन्होंने मार्च क्यों नहीं निकाला।

कपिल ने कहा कि एक नैरेटिव चलाया जा रहा है हिंदुओं को बांटने का, संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ। महिलाओं के लिए सबसे बड़ा काम जो सरकार ने किया वह है 11 करोड़ परिवारों में शौचालय का निर्माण। उन्होंने कहा कि नेहरू ने कहा कि भारत में जब सबके पास शौचालय हो जाएंगे भारत विकास के पथ पर चलेगा। ये कहने के बाद वे भूल गए। उन्होंने कहा कि आज जन धन अकाउंट, गरीबों के खातों में पूरा पैसा पहुंच रहा है। कपिल ने कहा कि 2017 में मैंने कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अरविंद, सत्येंद्र, मनीष जेल जाएंगे, दो जेल जा चुके हैं।

कार्यक्रम के सातवें चरण में जेएनयू की असिस्टेंट प्रोफेसर अंशु जोशी, रश्मि सामंत और काजल हिंदुस्तानी शामिल हुईं.। इस दौरान अंशु जोशी ने कहा कि जेएनयू में अगर आप वामपंथियों के साथ नहीं हैं तो करियर बर्बाद करने की धमकी दी जाती थी। आपके साथ अलग व्यवहार किया जाता था। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट और जिहादी जेएनयू में एक कैसे हो जाते हैं ? कम्युनिस्ट नमाज पढ़ते हैं तो सेक्युलर है, हम दिया जला लें तो कम्युनल, ऐसा क्यों है? ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त करने वाली रश्मि सामंत ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि छोटे शहर का मतलब छोटे सपने, लेकिन हर बड़ी कहानी छोटे शहरों से शुरू होती है। वहां से आसमान साफ दिखाई देता है।

इस दौरान प्रखर वक्ता काजल हिंदुस्तानी ने कहा कि हो गया है शंखनाद अब तांडव मचाएंगे, हर एक भारतीय को एकजुट करके भारत को विश्वगुरु बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं पहले बिजनेस वुमन थी, लेकिन 2016 में जब चैंबर में बैठकर टीवी में देख रही हूं कि भारत की राजधानी में भारत के टुकड़े होंगे के नारे लग रहे हैं। और अफजल की बरसी मना रहे होते हैं तब काजल सिंगाला उस दिन से काजल हिंदुस्तानी बन गई थी।

उस दिन से मैं सबकुछ त्यागकर यह प्रयास करती हूं कि कोई बच्चा भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे न लगाए। उन्होंने कहा कि लव जिहाद, भूमि अतिक्रमण और कन्वर्जन पर काम कर रही हूं। संघर्ष है, कोई मुझे फ्रिंज इलीमेंट कहे कोई कुछ कहे तो, हम कहते हैं तुम भाड़ में जाओ, मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता है। मैं प्राउड हिंदू हूं, उन सभी का नाश करने के लिए मेरा जन्म हुआ है, जो सनातन को खत्म करने की बात करते हैं।  काजल ने कहा कि मेरा आठ साल का संघर्ष रंग लाया है। आज हम जहां जाते हैं वहां मेरे भाई आ जाते हैं। छात्रों से कहना चाहती हूं कि धैर्य, नेवर गिवअप, ईमानदारी से काम करेंगे तो भगवान से भी साक्षात्कार होगा।

 

कार्यक्रम के 9वें चरण में संचार राज्य मंत्री देवू सिंह चौहान शामिल हुए। जहां उन्होंने कहा कि आज देश के हर जिले में 5जी सेवा है और आने वाले समय में 6जी होगा। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की बात करते हुए कहा कि चंद्रयान 3 को लेकर आज हर देशवासी गर्व महसूस कर रहा है।

टेक्नोलॉजी के बढ़ते दौर के साथ साइबर की घटनाएं भी बढ़ी हैं, ऐसे में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं। इस पर देवू सिंह चौहान ने कहा कि संचारसाथी ऐप है, जो आपके मोबाइल में रहेगा और अगर मोबाइल खो जाता है तो उसे आसानी से खोजा जा सकता है। हजारों मोबाइल फोन इसकी मदद से खोजे भी जा सके हैं। उन्होंने कहा कि अब कोई भी व्यक्ति 5 से अधिक सिम नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा कि युवा कोई भी एप्लीकेशन के बारे में अच्छे से जान लें, तभी उसे इंस्टाल करें। एआई के जमाने में मोबाइल में कुछ भी यूज करते समय चौकन्ना रहें।

देवू सिंह चौहान ने कहा कि पोस्टल विभाग बेहतर काम कर रहा है। महिलाओं के लिए पोस्टल विभाग में सुकन्या समृद्धि योजाना चल रही है। महिला सम्मान बचत पत्र भी शुरू किया गया है। पोस्टल विभाग, बैंकिंग क्षेत्र में बेहतर काम कर रहा है। श्रमिकों के लिए बीमा सुविधा दी जा रही है।

 

कार्यक्रम के आठवें चरण में अमूल के एमडी जयेन मेहता शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बताया कि 18600 गांव अमूल से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि हमने उत्पादक और कंज्यूमर दोनों का ख्याल रखा। यह ऐसा मॉडल है जो सक्सेस होना है। कस्टमर का बेनिफिट और किसान को लाभ हो, ये दोनों सोचते हैं। उन्होंने बताया कि 50 से ज्यादा देशों में अमूल के प्रोडक्ट जाते हैं। हमारे मॉडल की पॉपुलरिटी भी बढ़ रही है। ये  जिंदगियों को समृद्ध भी करता है। उन्होंने कहा कि विश्व के एक तिहाई दूध का भारत में उत्पादन हो रहा है। 10 करोड़ लोग इससे जुड़े हैं। घी, पनीर, मक्खन, आइसक्रीम, प्रोटीन बेस्ड प्रॉडक्ट, की विदेश में मांग है। गुजरात और कर्नाटक के किसान मिलकर काम कर रहे हैं।

 

कार्यक्रम के 10वें चरण में विधायक रिवाबा जड़ेजा शामिल हुईं। उन्होंने मन की बात से लेकर क्रिकेट तक की बात की। उन्होंने कहा कि मेरे मन में हमेशा रहा कि देश के लिए कुछ करना है। इंजीनियरिंग के बाद सिविल सर्विस में जाना चाहती थी। मैं दिल्ली गई। उस दौरान मैंने देखा कि जेएनयू, डीयू के स्टूडेंट किसी भी विषय पर डिबेट कर सकते हैं, तब मैंने सोचा कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है। रियल हीरो हमारे सोल्जर हैं। मैंने टेरीटोरियल आर्मी की तैयारी की। मेरे पति ने मुझे पूरा सपोर्ट किया। वह मुझसे कहते थे कि तुम्हें मिसेज जडेजा बनकर रहना है कि अपनी आइडेंटिटी बनानी है। उन्होंने मुझे काफी प्रोत्साहित किया। पीएम ने भी गाइड किया।

रिवाबा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने की कोशिश कर रही हूं। नारी शक्ति को आगे लाने के लिए थोड़ा प्रयास कर रही हूं।  पति के पैर छूते हुए वीडियो वायरल पर कहा कि मेरे और जडेजा के बीच में मीठी नोकझोंक होती रहती है। वह कहते हैं कि तुम्हें मुझे धन्यवाद करना चाहिए। वह मैच का ऐसा मूवमेंट था, ऐसी जीत थी कि वह जेस्चर आया। वह कोई प्रीप्लान्ड नहीं था। हमारी जो सनातन संस्कृति है, हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि कोई ऐसा व्यक्ति विशेष हैं जिनसे आप प्रभावित हैं अगर उनके चरणों की रज माथे पर लगाते हैं तो उनकी सकारात्मकता मिलती है। रोल मॉडल की बात करें तो मैंने 200 गांव घूमें हैं। वहां की महिलाएं इतना श्रम के बाद मुस्कराती हैं। वह अपने को बहुत अच्छे से कैरी करती हैं। उन्होंने कहा कि सुधामूर्ति जी की सिंप्लीसिटी भी मुझे प्रभावित करती है।

रिवाबा ने कहा कि गुजरात भारत ही नहीं, पूरे विश्व में रोल मॉडल बन चुका है। मोदी जी का एक नेचर बहुत अच्छा लगता है कि वह यंग जेनरेशन से जिस तरह से मिलते हैं, वैसा कभी नहीं हुआ। उनका आदर्श व्यक्तित्व है। हमारे ऊपर एक जिम्मेदारी भी है। यह पूरी बात भारत की है। यह व्यक्ति विशेष पर भी निर्भर करता है कि आप भावी पीढ़ी को क्या देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई विषय वस्तु पर अपना मत रखना चाहते हैं तो उसका पूरा परिचय होना चाहिए। चाहे पक्ष में हो या फिर विपक्ष है। विश्व में अपने को साबित कर सकते हैं। मूलभूत विचारों को न खोएं, इसका विचार रखें। आप विश्व के किसी भी देश को ले लीजिए जिसे मां का दर्जा दिया गया है। यह देश भारत है जिसे मां का दर्जा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि देश की गरिमा बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। निगेटिव नैरेटिव को सपोर्ट न करें। 80 प्रतिशत आबादी सनातन के पक्ष में है। कुछ न पढ़ें, लेकिन गीता जरूर पढ़ें। अगर भगवद्गीता को पढ़ते हैं तो कोई प्रश्न अनुत्तरित नहीं रहेगा। सारे सवालों के जवाब मिलेंगे। यह वास्तव में बहुत उपयोगी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बेटियों के कौशल को निखारें। जितना हो सके बेटियों को फाइनेंसियल सिक्योर करें।

कार्यक्रम के 11वें चरण में उद्यमी रेशमा दीदी और ध्वनि शर्मा शामिल हुईं, जहां रेशमा ने तृतीय लिंग समुदाय को अल्पसंख्यक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि परिवारों को समझना होगा कि किसी के शरीर से उसकी पहचना निर्धारित न की जाए। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी पहचान के साथ सामने आ रहे हैं तो किसी और को इससे परेशानी नहीं होनी चाहिए, यह आजादी है। परिवारों को अपने बच्चों को बगैर लैंगिक पहचान के स्वीकार करना चाहिए। उसके भौतिक लक्ष्यों को पूरा कराइए। उन्हें लैंगिकता में नहीं बाधें, बल्कि आजादी दें। उन्होंने कहा कि 72 तरीके से जेंडर की पहचान होती है। इस दौरान उन्होंने अपने समुदाय की पहचान, समस्या समेत कई मुद्दों पर विचार व्यक्त किए। इस मुद्दें पर ध्वनि शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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